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युगसंवाद

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कन्यादान हो या वरदान! अब आप ही बताईये क्या बुराई है?
धर्म · संस्कृति

कन्यादान हो या वरदान! अब आप ही बताईये क्या बुराई है?

क्या कन्यादान सिर्फ खैरात है? क्यों होता है कन्यादान और क्या यह स्त्री का अपमान है? जानिए हिन्दू विवाह संस्कार में कन्यादान का सही अर्थ, उसका सांस्कृतिक और वैदिक महत्व। पढ़ें वरदान बनाम कन्यादान की सच्ची व्याख्या, ब्रह्म विवाह का रहस्य और उन कुतर्कों का उत्तर जो हिन्दू परम्पराओं को गलत साबित करते हैं।

अमित शर्मा · 22 सितम्बर 2021 · 5 मिनट

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"द सिटी ऑफ गॉड" - ऑगस्टीन का पैगन पर हमला
राजनीति · इतिहास

"द सिटी ऑफ गॉड" - ऑगस्टीन का पैगन पर हमला

"द सिटी ऑफ गॉड" A.D. 410 में, पश्चिमी इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था, जब वंडल्स ने अपने राजा, अलारिक के नेतृत्व में, रोम शहर पर कब्जा कर लिया। रोम को सनातन शहर के रूप में जाना जाता था क्योंकि रोमियों ने सोचा था कि यह सचमुच कभी नहीं गिरेगा, और वर्ष 410 ने इस विश्वास को अपनी नींव

3 सितम्बर 2021 · 6 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

युधिष्ठिर - सार्वभौम दिग्विजयी हिन्दूराष्ट्र निर्माता सम्राट

जैसा कि युधिष्ठिर जी आदि पर विवाद देखने को मिलता है तो हमें महाभारत में ही देखना चाहिए कि युधिष्ठिर आदि पाण्डव स्वयं से भी शक्तिशाली या धर्मपुंज थे अथवा नवयुगी दुष्प्रचार अनुसार मात्र श्रीकृष्ण की दया पर ही लंबित थे क्योंकि ऋषि बार बार उनको धर्मराज कह रहे तब उनका वचन मिथ्या नहीं

1 सितम्बर 2021 · 13 मिनट का पाठ

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सर्वधर्मसमभाव के प्रतिकार में आत्मघाती कमियां

विगत ९० वर्षों में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति बढ़ जाने से भारतीय संस्कृति को बहुत क्षति पहुंची है। अली मौला अल्लाह को ईश्वर के समतुल्य दिखा कर छद्म धर्मनिरपेक्षता ने हमारी मूल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को पंगु बना दिया है। परिभाषिक दृष्टि से भी रिलीजन और मजहब धर्म से भिन्न

18 सितम्बर 2021 · 8 मिनट का पाठ

संत रविदास और तत्कालीन समाज
धर्म · संस्कृति

संत रविदास और तत्कालीन समाज

संत रविदास निम्न लेख प्रतिज्ञ @RamaInExile द्वारा लिखित है । संत रविदास संत शिरोमणि वैष्णवाचार्य संत रविदास जी रामानंदी संप्रदाय के एक महान आचार्य थे। श्री आद्य गुरु रामानंदाचार्य द्वारा दीक्षित संत रविदास तथाकथित निम्न जाति से थे। उनसे संबंधित साहित्यिक इतिहास और उनके स्वयं रचित

3 सितम्बर 2021 · 8 मिनट का पाठ

युधिष्ठिर का द्यूत - वैदिक रहस्यमयी अक्षविद्या
धर्म · संस्कृति

युधिष्ठिर का द्यूत - वैदिक रहस्यमयी अक्षविद्या

धर्मराज युधिष्ठिर को जुआरी कहना गलत है । धर्मराज युधिष्ठिर ने जीवन में कितनी बार द्यूत खेला?“व्यसनी” कहलाने के लिये कितनी बार खेलना पड़ता है? द्यूतविद्या को जुआ कहना भी गलत है । धर्मराज युधिष्ठिर को ऋषि से द्यूतविद्या क्यों सीखनी पड़ी?ऋषि के सिवा अन्य कोई शिक्षक क्यों नहीं मिला?शकु

1 सितम्बर 2021 · 1 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

ॐ का सही उच्चारण कैसे होता है?

अष्टाध्यायी (१⋅२⋅३४) का कथन है कि “जप,न्यूङ्ख तथा साम के सिवा यज्ञकर्म में एकश्रुति का पाठ किया जा सकता है” । किसी भी वेदमन्त्र में जब दीर्घ “ॐ” (वा ह्रस्व “उ” अथवा “ओ”) को जोड़ना पड़े तो उस “ॐ” को “न्यूङ्ख” कहते हैं । एकश्रुति का अर्थ है सारे स्वरों को एक ही स्वर मानकर पाठ करना ।

1 सितम्बर 2021 · 2 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

मेधा, कौतूहल, जिज्ञासा का अर्थ और झुण्ड प्रवृत्ति

मेधा और झुण्ड “जो धर्म की रक्षा करता है,धर्म उसकी रक्षा करता है ।” धर्म का अर्थ है वैदिक यज्ञ,अर्थात् वैदिक कर्म का काण्ड । धर्म के दस लक्षण हैं — धृति क्षमा दम अस्तेय शौच इन्द्रियनिग्रह धी विद्या सत्य अक्रोध । किन्तु ये सब तो केवल लक्षण हैं जिनके आधार पर हम पहचान सकते हैं कि अमु

1 सितम्बर 2021 · 8 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

पूर्णावतार भगवान् श्रीकृष्ण - धर्म और रासलीला

कृष्णपक्ष!उसपर अष्टमी!वह भी दक्षिणायन वाली!केवल पूर्णावतार ही इसे झेल सकते हैं,और इसे शुभ बना सकते हैं! एक महायुग में श्रीविष्णु के दस अवतार होते हैं जिनमें केवल तीन ही पूर्णावतार हैं । उन तीनों में से केवल कृष्णावतार ही दो युगों के लिये होते हैं — द्वापर और कलि,क्योंकि कलियुग मे

1 सितम्बर 2021 · 4 मिनट का पाठ

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