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Wednesday, January 28, 2026
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ज्योति तिवारी

‘लड़का हुआ है’- दायित्वों और नारीवाद के बीच पिसते पुरुष का यथार्थ चित्रण

आचार्य जगन्नाथ के साहित्य बोध 'रमणीयार्थ-प्रतिपादक: शब्द: काव्यं' को आधुनिकता की कसौटी पर कसते हुए कहा जा सकता है- 'सामाजिक पक्षों का यथार्थ चित्रण...

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