युगसंवाद · राजनीति · इतिहास
राजनीति · इतिहासअसम में अवैध घुसपैठ द्वारा निर्मित नागरिकता संकट की पूरी कहानी, भाग-3
प्रवक्ता · 1 अगस्त 2018 · 4 मिनट का पठन
पहले पढ़ें भाग – 1,2
असम में अवैध घुसपैठ द्वारा निर्मित नागरिकता संकट की पूरी कहानी, भाग-1
असम में अवैध घुसपैठ द्वारा निर्मित नागरिकता संकट की पूरी कहानी, भाग-2
भारत की सीमाओं के भीतर ही राजधानी दिल्ली से 2 हजार किलोमीटर दूर दूसरा प्रांत बसता है जो है पूर्वोत्तर। प्राकृतिक विविधताओं के बीच नदियों में लिपटा संसार। प्राकृतिक सौंदर्य में पूर्वोत्तर के राज्य किसी भी विश्व के पर्यटक स्थलों से कम नहीं। प्रकृति ने पूर्वोत्तर को हर तरह की सौगात दी लेकिन आजादी के 70 वर्ष बाद भी पूर्वोत्तर भारत के राज्य देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी पिछड़े हुए हैं। पूर्वोत्तर में 7 राज्य हैं और यह 7 बहनों के रूप में जाने जाते हैं। असम के अलावा बाकी 6 बहनें मेघालय, अरुणाचल, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और मिजोरम हैं। इन सभी राज्यों में स्वतंत्रता और स्वायत्तता का जुनून छाया रहा।
घुसपैठिया मुस्लिमों का जनसंख्या विस्फोट
बांग्लादेशी घुसपैठ से असम ही नहीं, पश्चिम बंगाल आैर बिहार भी अछूते नहीं रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सर-संघचालक गुरु गोलवलकर ने दशकों पहले देश को आगाह करते हुए कहा था कि असम में जिस तरह से बांग्लादेश से आव्रजन चल रहा है और ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा असम वृहत्तर बांग्लादेश का हिस्सा बन जाएगा। उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई। 2001 की जनगणना के अनुसार असम के विभिन्न जिलों में बांग्लादेशी मुस्लिमों की जनसंख्या इस प्रकार है-धुबरी 74 प्रतिशत, ग्वालपाड़ा 54 प्रतिशत, नरपेटा 59 प्रतिशत, हेलाकाडी 58 प्रतिशत, करीमगंज 52 प्रतिशत, नौगान 51 प्रतिशत, मोरीगान 48 प्रतिशत, दरांग 36 प्रतिशत, बोंगाईगांव 39 प्रतिशत और कधार 36 प्रतिशत। 2001 से 2017 तक आप अनुमान लगा सकते हैं कि हालात कितने भयावह हो चुके होंगे। राज्य की आबादी के दशकवार आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि हर जनगणना में मुस्लिमों की जनसंख्या असाधारण रूप से बढ़ी है।
पूर्वोत्तर के सभी राज्य बांग्लादेशी घुसपैठ से ग्रसित
बांग्लादेशी घुसपैठ की इस समस्या से केवल असम ही नहीं पूरा पूर्वोत्तर भारत पीडि़त है। त्रिपुरा लगभग चारों ओर से बांग्लादेश से घिरा हुआ है और यह भी अवैध आव्रजन से परेशान है।मणिपुर में भी असम के कधार जिला व अन्य दूसरे रास्ते से घुसपैठ की गूंज सुनाई देती है। मणिपुर में घुसपैठिये आबादी के हिसाब से एक चौथाई हो चुके हैं। नगालैंड में भी स्थिति यही है। इतना ही नहीं बांग्लादेशी नागा युवतियों से शादी भी कर लेते हैं और उनकी सम्पत्तियों पर कब्जा कर लेते हैं। इन राज्यों की सरकारों ने वोटबैंक के लालच में इन घुसपैठियों को राशन कार्ड आदि बनवा दिए। बैंकों में अकाउंट खोलना इनका पहला काम होता है। कई विधानसभा सीटें तो ऐसी हो गई हैं कि घुसपैठिये जिसे चाहते हैं उसे जिता देते हैं। असम के मूल वासियों की जमीन पर उनकी इच्छा के खिलाफ बसाए गए बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से सामाजिक विद्वेष फैलता गया। उसी की वजह से ही उल्फा समेत बोडो उग्रवादी गुट पैदा हो गए। बोडो उग्रवादियों ने अपने आदिवासी समुदाय के लोगों की पहचान का संकट समाप्त होने की आशंका से हथियार सम्भाल लिए और अलग राज्य का आंदोलन छेड़ दिया था जिसमें कोई बाहरी बांग्लादेशी न हो।
गैर बोडो समुदाय बोडोलैंड की मांग का विरोध करता आया है। गैर बोडो सुरक्षा मंच और अखिल बोडोलैंड मुस्लिम छात्र संघ दोनों ही संगठनों में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिये सक्रिय हैं। यह संगठन चाहते हैं कि जिन इलाकों में बोडो समुदाय की आबादी आधे से कम है, उन्हें बोडोलैंड क्षेत्र से बाहर किया जाए। स्थिति यह हो गई है कि अवैध घुसपैठिये असम के मूल वनवासियों की हत्याएं करने लगे, उनके घर जलाए जाने लगे, उनकी जमीनें छीनने लगे। असम के मूल नागरिकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने का षड्यंत्र पूरे जोरों से चला।
सामरिक लिहाज से भारत के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण उत्तर-पूर्व के कुछ हिस्सों, खासकर असम के हिस्सों, को मिलाकर एक वृहद इस्लामी राष्ट्र बनाने के लिए इस क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की साजिशें पाकिस्तान की आईएसआई, पाक सेना और आतंकी संगठन चलाते रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस समस्या का समाधान किया जाए जो राज्य की पहली भाजपा सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। बाकी चर्चा मैं अगले लेख में करूंगा। क्रमशः...
आगे पढ़ें - असम में अवैध घुसपैठ द्वारा निर्मित नागरिकता संकट की पूरी कहानी, भाग-4
– मनीष प्रकाश, लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं और राष्ट्रिय महत्व के मुद्दों पर लिखते हैं।
यह भी पढ़ें,
मोदी सरकार की मुद्रा योजना का कैसे उठाएं लाभ?
इस लेख को उद्धृत कीजिए
प्रवक्ता. “असम में अवैध घुसपैठ द्वारा निर्मित नागरिकता संकट की पूरी कहानी, भाग-3”. युगसंवाद, 1 अगस्त 2018. https://yugsamvad.com/articles/asama-men-avaidha-ghusapaitha-dvaaraa-nirmita-naagarikataa-sankata-kee-3858
https://yugsamvad.com/articles/asama-men-avaidha-ghusapaitha-dvaaraa-nirmita-naagarikataa-sankata-kee-3858 · देखा गया
- NRC
- ULFA
- Assam
संबंधित आलेख

माइक्रोसॉफ्ट का मिथिलाक्षर व भारतीय लिपियों से सौतेला व्यवहार
माइक्रोसॉफ्ट अपने मंगल फॉण्ट में तो (देवनागरी) टाइप करने देता है किन्तु SMP प्लेन के मिथिलाक्षर में न तो टाइपिंग सम्भव है और न ही कॉपी-पेस्ट, क्योंकि उसके Word में LOOKUP को प्रतिबन्धित किया गया है जिसके बिना किसी भी भारतीय लिपि में टाइपिंग असम्भव है क्योंकि भारतीय लिपियों में बह
25 सितम्बर 2020 · 10 मिनट का पाठ

आंग सान सू की - म्यांमार की माँ को हर भारतीय का नमन
नमन है म्यांमार की नोबल विजेता माँ आंग सान सू की को, जो अंतराष्ट्रीय दबाव को दरकिनार कर अपने देश के साथ अडिगता से खड़ी रहीं। अनेक अवार्ड पहले ही छीन लिए जाने और वैश्विक वामपंथी शक्तियों द्वारा नोबल छीनने की धमकियों को धता बताकर उन्होंने अपने देश का साथ दिया। आज ब्रह्मदेश का जन जन
14 दिसम्बर 2019 · 3 मिनट का पाठ

जब एक कम्युनिस्ट ने कहा, "लोगों को खून का स्वाद लेने दो"!
अभी हाल ही में मैंने राज थापर की पुस्तक All these years पढ़ी। राज थापर (1926- 1987) के निधन के बाद उनके डायरी से संकलित करके यह संस्मरणात्मक पुस्तक 1991 में प्रकाशित की गयी। पुस्तक में कुल 24 चैप्टर हैं, और आखिरी चैप्टर अधूरा है, जो राज थापर की असमय कैंसर से मृत्यु हो जाने के कार
16 सितम्बर 2019 · 5 मिनट का पाठ