Jyotish

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ज्योतिष

ज्योतिष की शास्त्रीय पद्धति, गणित और उसके शोधपरक अध्ययन पर विवेचन।

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महामारी जनित उपसर्गों का शास्त्रोक्त विवरण एवं शमन

॥ नमः प्रकृत्यै ।। लेखक:- पण्डित गङ्गाधर पाठक ‘वेदाद्याचार्य’ मुख्याचार्य- श्रीरामजन्मभूमिशिलापूजन, अयोध्या मार्गदर्शक:- श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्गम् , जयपुर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर का शिलान्यास करवाते मुख्य पुरोहित आचार्य श्री

पण्डित गङ्गाधर पाठक · 2 जून 2021 · 13 मिनट

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शास्त्रानुसार व्रतोपवासादि में सूर्यसिद्धान्तीय पञ्चाङ्ग ही ग्राह्य

लेखक:- पण्डित गङ्गाधर पाठक ‘वेदाद्याचार्य’ (मुख्याचार्य- श्रीरामजन्मभूमिशिलापूजन, अयोध्या) प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर का शिलान्यास करवाते मुख्य पुरोहित आचार्य श्री गंगाधर पाठक साङ्गोपाङ्गाय वेदाय ज्योतिषां ज्योतिषे नमः । सूर्याय सूर्यसि

29 मई 2021 · 6 मिनट का पाठ

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सूर्यसिद्धान्त सार्वकालिक और सार्वभौमिक है

विक्रमादित्य के नवरत्न वराहमिहिर की पञ्चसिद्वान्तिका−१⁄३ १ में सूर्यसिद्धान्त को “सौर” सिद्धान्त की संज्ञा दी गयी तथा पञ्चसिद्वान्तिका−१⁄४ २ में इसे “सावित्र” सिद्धान्त कहा गया। अतः वराहमिहिर के अनुसार गायत्री मन्त्र के वैदिक देवता सविता ही सूर्यसिद्धान्त के प्रतिपादक हैं, तथा उन

29 मई 2021 · 5 मिनट का पाठ

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राक्षस संवत्सर है संवत् 2078, अ.भा.विद्वत्परिषद, काशी ने लगाई मुहर

◆संवत् २०७८ है राक्षस संवत्सर◆ ◆लुप्तसंवत्सर में विवाद क्यों ?◆ -- आचार्य श्री विनय झा , त्रिस्कन्ध ज्योतिर्विद्, सूर्यसिद्धान्तीय गणितज्ञ संरक्षक, अखिल भारतीय विद्वत्परिषद, वाराणसी गणितज्ञ, आदित्य पञ्चाङ्ग (काशी), श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग (जयपुर) आदि आदित्य पञ्चाङ्ग के सम

20 अप्रैल 2021 · 8 मिनट का पाठ

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2078 राक्षस नाम संवत्सर ही शास्त्रीय

◆वर्ष २०७८ राक्षस नाम संवत्सर ही शास्त्रीय◆ -- डॉ. पारसनाथ ओझा , प्रधान सम्पादक, श्रीआदित्य पञ्चाङ्ग वाराणसी ◆ प्रभवादि संवत्सर का आनयन- आचार्यों ने सौरमान, चान्द्रमान तथा मध्यम गुरूमान से प्रभवादि सवत्सरों की प्रवृत्ति माना है। ◆ प्रभवादि संवत्सर विवेचन- यथा महर्षि नारदमुनि, "गृ

14 अप्रैल 2021 · 7 मिनट का पाठ

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'श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पंचांग' केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में विमोचित

चैत्र अमावस्या, २०७७, 12 अप्रैल, 2021 को केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के डॉ. हिन्दकेसरी सभागार में राजस्थान के एकमात्र सूर्यसिद्धान्त गणना पर आधारित पञ्चाङ्ग श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग का विमोचन विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. अर्कनाथ चौधरी तथा श्रीनिम्बार्क परिषद् क

13 अप्रैल 2021 · 5 मिनट का पाठ

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राजस्थान का एकमात्र सूर्यसिद्धान्तीय श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग प्रकाशित

नम्र निवेदन - श्रीनिम्बार्क परिषद् सादर सूचित किया जा रहा है कि आराध्यदेव ठाकुर श्रीगोविन्ददेवजी एवं ठाकुर श्रीसरसबिहारीजी की असीम अनुकम्पा से प्राचीन गणित श्रीसूर्यसिद्धान्त पर आधारित राजस्थान का एकमात्र पञ्चाङ्ग श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग जयपुर से श्रीनिम्बार्क परिषद् के द

13 अप्रैल 2021 · 6 मिनट का पाठ

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केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में पंचांग सम्पादन कार्यशाला आयोजित

आगामी संवत् 2078 से श्रीनिम्बार्क परिषद् , जयपुर द्वारा केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , जयपुर परिसर के सहयोग से राजस्थान का एकमात्र सूर्यसिद्धान्तीय पंचांग ' श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पंचांग ' प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है। इस हेतु पंचांग में व्रतपर्वोत्सवों-मुहूर्त्तादि के

27 मार्च 2021 · 4 मिनट का पाठ

क्यों और कब लगता है प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक में कुंभ?
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क्यों और कब लगता है प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक में कुंभ?

मानव जीवन का परम एवं चरम लक्ष्य है अमृत्व की प्राप्ति। पुराण वर्णित देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से अमृत कलश प्रकट हुआ था| भगवान विष्णु ने स्वयं मोहिनी रूप धारण कर दैवी प्रकृति वाले देवताओं को अमृतपान कराया था। पर उससे पहले अमृत कलश पर अधिकार जमाने के लिए देव-दानवों में बारह द

3 जनवरी 2019 · 6 मिनट का पाठ

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स्वतंत्र भारत की कुण्डली में ऐसी है ग्रहों की स्थिति

ज्योतिष अपने आप में एक क्लिष्ट विद्या है। उसमें भी मेदिनी ज्योतिष तो बहुत ही कठिन है। कोई बहुत समय लगाकर व्यक्तिगत कुण्डली पर तो महारत हासिल कर सकता है, पर मेदिनी ज्योतिष पर कोई भी पूरी तरह दखल नहीं रख सकता। इसका कारण यह है कि मेदिनी ज्योतिष में ग्रहों के बदलती हुई स्थिति का प्रभ

30 जुलाई 2018 · 8 मिनट का पाठ

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क्या एक ज्योतिषी चाँद पर जन्में बच्चे की कुंडली और भविष्य बता सकता है?

लोगों की ओर से एक सामान्य जिज्ञासा ये सामने आई है कि अगर किसी बच्चे का जन्म चाँद पर हो तो उसकी कुंडली कैसे बनाई जायेगी और उसके भविष्य के बारे में कैसे बताया जायेगा? इस प्रश्न का दायरे को बढ़ाते हुये ये भी कहा जा सकता है कि अगर किसी बच्चे का जन्म मंगल ग्रह या किसी और ग्रह पर हो तो

22 जुलाई 2018 · 5 मिनट का पाठ

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दक्षिणा देने से ही क्यों मिलता है धार्मिक कर्मों का फल.

यजुर्वेद में एक बहुत सुंदर मन्त्र(१) है, वह कहता है ब्रह्मचर्य आदि व्रतों से ही दीक्षा प्राप्त होती है अर्थात् ब्रह्मविद्या या किसी अन्य विद्या में प्रवेश मिलता है। फिर दीक्षा से दक्षिणा अर्थात् धन समृद्धि आदि प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। यहाँ दक्षिणा मिलने का अर्थ है दक्षिणा देना,

18 सितम्बर 2017 · 6 मिनट का पाठ