लेखक

अविनाश भारद्वाज शर्मा

अविनाश भारद्वाज शर्मा

लेखक भारतीय इतिहास, संस्कृति, धर्म एवं अध्यात्म के गहन जानकार हैं

लेख

साम्राज्यलक्ष्मी का प्रकटीकरण राजा के लिए जरूरी
धर्म · संस्कृति

साम्राज्यलक्ष्मी का प्रकटीकरण राजा के लिए जरूरी

सामान्य जन और साधकों के लिये शास्त्र का आदेश है की वो अपनी साधन-भजन-अर्चन को गोप्य रखें। परंतु श्रीमंतो, धनिकों और राजन्यवर्ग जब अपने धार्मिक कर्तव्य का निर्वहन करते हैं तो वहां इस अति कठोर "गोप्यता" के नियम को निरस्त कर दिया गया शास्त्रकारों, लोक समाज के कर्ताओं द्वारा। और उसे प

19 मई 2019 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

शालिग्राम शिलाओं से मूर्तियाँ बनाने की प्राचीन कला हो रही लुप्त

भारत में प्राचीन काल से ही श्री मंदिर के विग्रहों के लिये विशेष पाषाण चुनने का चलन रहा है| प्राचीन काल से संभवतः आज से करीब डेढ़ सौ साल पहले तक, जब से जयपुर में मूर्तिकारों का बाजार बना तबसे लगभग पूरे उत्तर भारत में सफेद संगमरमर की प्रतिमायें मंदिरो मे स्थापित होने लगीं| पहले के

7 अक्टूबर 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

सनातन धर्म के शैव सम्प्रदाय

" लयनात इति लिंगमुच्यते " जिसमे सर्व सृष्टि लय हो जाये वही लिंग है अर्थात सकल जगत लय होजाने के बाद शेष बचे वह अर्थात ब्रह्मपदार्थ। सकल शैव जगत मे परमात्मा शंकर की लिंग रूप मे उपासना की जाती है। पहले ये जाने की शैव होते क्या हैं मोटे मोटे शब्दो में, शैव मंजे शिव को ही पूर्ण परमात्

19 जुलाई 2018 · 5 मिनट का पाठ