आयुर्वेद – आयु का वेद – सम्पूर्ण रोगमुक्तपद्धति
लेखक:- आचार्य वासुदेव मिश्र वेद विज्ञाता यत्रौषधीः समम्मत राजानः समिताविव । विप्रः स उच्यते भिषग् रक्षोहामीवचातनः ॥ ऋग्वेदः १०-९७-६ ॥ राजा जिसप्रकार सङ्ग्राममें अपने सैनिकोंके साथ विराजते हैं, उसीप्रकार शल्यादि अष्टतन्त्रज्ञ नाडीविज्ञान विशारद जिस विद्वानपुरुष नाना प्रकारके औषधीग
11 जून 2021 · 15 मिनट का पाठ