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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनमोहन सिंह समझ लेने की भूल न करें राहुल गांधी

Murari Sharan Shukla · 21 जुलाई 2018 · 6 मिनट का पठन

राहुल गांधी ने संसद को मछली बाजार समझ लिया है या मुन्ना भाई का पप्पी झप्पी कॉर्नर? संसद की कुछ मर्यादा होती है राहुल गांधी। लोकतंत्र में सर्वोच्च वरीयता प्राप्त संस्था संसद ही होता है। आप उस संसद के सदस्य होते हुए, एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष होते हुए, अपनी इटालियन माँ के पीएम बनने के अधूरे सपने पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री पद पर बैठने के सपने अनेक वर्षों से देखते हुए भी संसद की मर्यादा नहीं समझ पाए अबतक? क्या आपको यह मालूम नहीं था कि नरेंद्र मोदी आपके नकली गांधी परिवार के आदेशपाल नहीं हैं? अति उत्साह में आप नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह में अन्तर करना भूल गए थे क्या? आपने और आपकी राजमाता ने मनमोहन सिंह को लगातार दस वर्षों तक इसी प्रकार इशारों से उठाया बिठाया है। रबर स्टाम्प पीएम को मनमर्जी से उठाने बिठाने की आपलोगों को आदत पड़ गई थी। दस वर्षों में वह आदत लगता है आचरण में रूढ़ हो गया है।आपने उसी आदत का प्रयोग नरेंद्र मोदी के साथ भी करने का प्रयास कर दिया? यह संप्रभुता सम्पन्न भारत राष्ट्र की जनता के व्यापक जनादेश से चुने हुए लोकप्रिय प्रधानमंत्री का सरासर अपमान है। राहुल गांधी की यह हरकत पूरे देश की राष्ट्रप्राण जनता का अपमान है।

जिस काँग्रेस को विपक्षी दल का दर्जा लेने का सामर्थ्य नहीं छोड़ा जनता ने उस काँग्रेस पार्टी का अध्यक्ष दो तिहाई बहुमत वाले प्रधानमंत्री को कहता है कि आँखों में आँखें डालकर देखने का साहस नही है। सदन में एक एक लाइन झूठ बोलकर 25 जनवरी 2008 को एके एंटनी के हस्ताक्षर से हुए राफेल डील के मामले में फ़्रांस के राष्ट्रपति का नाम लेकर देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लज्जित किया। यह अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले के काँग्रेसी पाप के बारे में देश को भ्रमित करने का प्रयास है, कुत्सित और घृणित स्तर की हरकत है। यह ओछी हरकत आज का जागरूक मतदाता सहन नहीं करेगा। सत्ता की भूख में इतना भी पागल हो सकता है व्यक्ति की स्वस्थ आलोचना की लोकतांत्रिक परिपाटी भी भूल जाए और केवल झूठ का आवरण ओढ़ ले। क्या झूठ का पुलिंदा हाथ में थामकर काँग्रेस आज के जागरूक युवा पीढ़ी का वोट आकर्षित कर पाएगी? क्या भ्रामक बयानबाजी के बलपर काँग्रेस आंकड़ों में खेलने वाली आधुनिक पीढ़ी का मत आकर्षित कर पायेगी?

राहुल गांधी

राहुल गांधी आपके बहुरूपिया चरित्र को देश की जनता देख चुकी है। गुजरात में जनेऊधारी ब्राह्मण तो नागालैंड में कैथोलिक क्रिश्चियन बन जाते हो और कर्नाटक में कट्टर मुसलमान बन जाते हो। आजादी के पहले वाली काँग्रेस की दुहाई देते देते काँग्रेस को मुसलमानों की पार्टी घोषित कर देते हो? फिर संसद में कहते हो कि बीजेपी, आरएसएस ने आपको हिन्दू होने का मतलब समझाया? कौन से हिन्दू की बात कर रहे हो आप? कहीं चिदम्बरम और दिग्विजय सिंह के हिन्दू आतंकवाद वाले नैरेटिव का संकेत तो नहीं कर रहे हो? आपने जिन हिंदुओं को इंटोलेरेंट कहकर पूरी दुनियाँ में बदनाम करने का प्रयत्न किया था उस इंटोलेरेंसी की बात तो नहीं कर रहे हो?

आपने कहा कि बीजेपी और आरएसएस ने आपको हिंदुस्तानी होने का मतलब समझाया। जिस हिंदुस्तान को आप चार वर्षो तक बदनाम करते रहे उस हिंदुस्तान के बिना आपकी राजनीति नहीं चलेगी यह अवश्य सिखाया है आपको बीजेपी ने। आप अमेरिका में जाकर जिस हिंदुस्तान की साख पर बट्टा लगा रहे थे उस हिंदुस्तान का महत्व आपको अवश्य समझाया है बीजेपी ने। जिस हिंदुस्तान में सत्ता हथियाने के लिए आपके नेता पाकिस्तान की मदद मांग रहे थे उस हिंदुस्तान का महत्व आपको समझाना आवश्यक था। जिस डोकलाम की चर्चा में आप झूठ सदन में बोल रहे थे उस डोकलाम के संकट के समय चीनी दूतावास में भारत के विरुद्ध मंत्रणा करने जाने वाले को हिंदुस्तानी होने का महत्व समझाना बहुत आवश्यक था। पाकिस्तानी कमांडरों से दुनियाँ के अनेक देशों में जा जा कर मीटिंग्स करने वालों को हिंदुस्तानी होने का अर्थ समझाना बहुत आवश्यक था। इटली के पासपोर्ट होल्डर को हिंदुस्तानी होने का अर्थ समझाना बहुत आवश्यक था।

आप सदन में पूछते हो कि यह देश आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं का नहीं है? राहुल गांधी आप आदिवासियों के पक्ष में नहीं हो। आप कैथोलिक ईसाईयों के पक्ष में यह बातें बोल रहे हो। आप मिशनरीज ऑफ चैरिटी के पक्ष में यह बातें बोल रहे हो। आप मूल निवासी और बाहरी का देशद्रोही सिंथेटिक राग छेड़ने का प्रयास कर रहे हो। दलित शब्द संविधान की किस धारा, किस अनुच्छेद में वर्णित है? कब से इसका प्रयोग आरम्भ हुआ राहुल गांधी? आप अनर्गल शब्द प्रयोग से देश के निर्धनों का अपमान करने का प्रयत्न कर रहे हो। दिल्ली में केंद्रीय सदन में पिछड़ों की बात करने वाला यह व्यक्ति वही है जो गुजरात में पिछड़ों के विरुद्ध जनेउधारी ब्राह्मण बनने का प्रयत्न कर रहा था? महिला का अर्थ सोनियाँ गांधी नहीं होता केवल। कितने महिलाओं को आपने टिकट दिया था विगत अनेक राज्यों के चुनावों में? कितनी महिलाओं को आपने स्थान दिया अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में?

 rahul gandhi

आपकी और आपकी माता जी की हर यात्रा सीक्रेट होती है। आपलोगों की हर बीमारी गुप्त होती है। आपको स्मरण रहना चाहिए कि राजनेता का जीवन व्यक्तिगत जीवन नहीं होता है। सार्वजनिक जीवन का चुनाव करने वालों को ही राजनेता कहा जाता है। आपने राजनीति को जीवन में चुना है आपको व्यक्तिगत जीवन की स्वच्छंदता और गोपनीयता का अधिकार नहीं है केवल मानवीयता निजता के विषय को छोड़कर। आपको देश को बताना पड़ेगा कि आप किस देश में क्या करने जाते हो? आपको देश को बताना पड़ेगा कि आपको कौन सी बीमारी हुई है और क्या उपचार आप ले रहे हो? आपकी चिंता करने का अधिकार भारत की जनता को है। और आपको तदनुरूप रिस्पांड करना ही पड़ेगा।

आपलोग हमेशा घूमते हो विदेश में और राजनिति करने पहुँच जाते हो भारत में। क्या भारत आपके लिए पोलिटिकल टूरिज्म का हॉट स्पॉट है? बस भारत मे राजनीति किया और निकल लिए? संसद के सत्र के समय भारत में, चुनाव के समय भारत में, विवाद के समय भारत में, इंटोलेरेन्सी खड़ा करने के समय भारत में और योग दिवस पर विदेश में? भारत की विद्याओं से आपको इतनी चिढ़ क्यों है? भारत के महापुरुषों से भी आपको चिढ़ है। श्रीराम को काल्पनिक कहती रही काँग्रेस, रामसेतु को झुठलाती रही काँग्रेस, अयोध्या पर अनर्गल बयान देती रही काँग्रेस। आखिर आपको हिंदुओ से इतनी घृणा क्यों है? इस घृणा में पकिए मत। आपके द्वारा काँग्रेस को मुसलमानों की पार्टी घोषित कर देना भी इसी हिन्दूओं के प्रति घृणा का परिणाम था। इसी हिन्दू विद्वेष के कारण आप साम्प्रदायिक एवम लक्ष्यित हिंसा निवारण विधेयक 2012 में लाने को प्रयत्नशील थे। भारत आपको और आपकी पार्टी को टॉलरेट कर रहा है बहुत समय से। उसी टॉलरेंट देश को आप इंटोलेरेंट कहते हो पूरी दुनियाँ में? इन सब हरकतों का निदान चुनाव में मतदाता तय करेगा।

 – श्री मुरारी शरण शुक्ल, लेखक वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक एवं राष्ट्रघातक मिशनरियों के विरोध में काम करते हैं.

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इस लेख को उद्धृत कीजिए

Murari Sharan Shukla. “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनमोहन सिंह समझ लेने की भूल न करें राहुल गांधी”. युगसंवाद, 21 जुलाई 2018. https://yugsamvad.com/articles/pradhaanamantree-narendra-modee-ko-manamohana-sinha-samajha-lene-kee

Murari Sharan Shukla

Murari Sharan Shukla

लेखक वरिष्ठ पत्रकार, ज्योतिर्विद, राष्ट्रवादी विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं

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