Buddhism & Jainism

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बौद्ध · जैन

बौद्ध और जैन परंपराएँ भारतीय दार्शनिक इतिहास की स्वतंत्र किन्तु सम्बद्ध धाराएँ हैं। इन पर लेख और शोध यहाँ एक साथ संकलित हैं।

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श्रेष्ठ आलेख

Buddha was a Hindu.
धर्म · संस्कृति

Buddha was a Hindu.

Some years ago, I met an American from Seattle, who studied Sanskrit at the university there. He had come to India to meet his guru and had even taken an Indian name. He told me that westerners, including professors, at his university who had accepted Buddhism had no hesitation t

Maria Wirth · 22 अक्टूबर 2019 · 6 मिनट

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की आसुरी सभ्यता की वास्तविकता
संस्कृत · शास्त्र

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की आसुरी सभ्यता की वास्तविकता

यूरोप के तथाकथित 'विद्वानों' ने मोहनजोदड़ो और हड़प्पा 'सभ्यता' को भारतीय सभ्यता की प्राचीनतम आधारशिला बताया और उसे वैदिक पशुपालक लोगों की तुलना में विकसित तथा पुरातन घोषित कर दिया, जिसे आजतक हमारे नीति-निर्धारक और तथाकथित बुद्धिजीवी स्वीकारते आ रहे हैं, खासकर वामपन्थी इतिहासकार। इत

18 अक्टूबर 2019 · 25 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

मूर्तिपूजा - सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण अंग

यह शत-प्रतिशत झूठा प्रचार है कि सनातन धर्म में मूर्तिपूजा नहीं थी। भारत की प्राचीनतम मूर्तियाँ जैनियों या बौद्धों की नहीं हैं। सबसे पहले यह प्रचार अंग्रेजों ने आरम्भ किया कि भारत में ग्रीक राजाओं ने मूर्तिपूजा आरम्भ की, और बाद में ब्रह्म-समाज के छद्म-ईसाईयों तथा आर्यसमाजियों जैसे

17 अक्टूबर 2019 · 6 मिनट का पाठ

पानी कब, कितना और कैसे पीना चाहिए?
समाचार · मीडिया

पानी कब, कितना और कैसे पीना चाहिए?

1. परिश्रमी जनों को आहारग्रहणोपरान्त एक मुहूर्त (48 मिनट) पर्यन्त एवं बुद्धिजीवियों को दो मुहूर्त (एक घण्टा 36 मिनट) पर्यन्त पानी नहीं पीना चाहिए। इस अवधि में जल पीने से पाचक रस तनु (diluted) हो जाते हैं जिससे आहारपाचन भली-भाँति नहीं हो पाता। 2. स्नान के उपरान्त जल पिए बिना तत्का

6 अक्टूबर 2019 · 2 मिनट का पाठ

इतने साल पहले हुआ था भगवान श्रीराम का जन्म
संस्कृत · शास्त्र

इतने साल पहले हुआ था भगवान श्रीराम का जन्म

सनातन संस्कृति कालसापेक्ष नहीं है, इसलिए सनातन कहलाती है। जो तीनों कालों का परंपरा से चला आ रहा शाश्वत धर्म समय से परे है वह सनातन है। पर आधुनिक विज्ञानवाद से प्रभावित लोगों की बुद्धि भौतिक पैमानों पर ही जवाब दे जाती है। श्रीराम के जन्मकाल पर काफी विवाद किया जाता है। पर इस का निर

13 सितम्बर 2019 · 8 मिनट का पाठ

क्या रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने स्त्रीविरोधी बातें लिखी हैं?
धर्म · संस्कृति

क्या रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने स्त्रीविरोधी बातें लिखी हैं?

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी की कुछ चौपाइयों को लेकर आजकल जमीन से लेकर आसमान व भारत से लेकर विदेशों तक, अनपढ़ से लेकर बड़े बड़े बुद्धिजीवियों तक बहुत अधिक उहापोह, व दोषारोपण होता रहता है। इसका एकमात्र कारण है भारतीय शास्त्र पद्धति को न समझकर उपन्यास या कहानी अखबारी पद्धति

21 जनवरी 2019 · 8 मिनट का पाठ

क्यों और कब लगता है प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक में कुंभ?
ज्योतिष

क्यों और कब लगता है प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक में कुंभ?

मानव जीवन का परम एवं चरम लक्ष्य है अमृत्व की प्राप्ति। पुराण वर्णित देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से अमृत कलश प्रकट हुआ था| भगवान विष्णु ने स्वयं मोहिनी रूप धारण कर दैवी प्रकृति वाले देवताओं को अमृतपान कराया था। पर उससे पहले अमृत कलश पर अधिकार जमाने के लिए देव-दानवों में बारह द

3 जनवरी 2019 · 6 मिनट का पाठ

समाचार · मीडिया

पूरी दुनियां चेलों से पट गई..

पूरी दुनियां चेलों से पट गई। जिधर नजर दौड़़ाओ चेले ही चेले। श्यान मैजेंटा विबग्योर हर रंग के चेले हां इन्फ्रा रेड और यू वी रंग के भी चेले। दर्जन के भाव चेले किलो के भाव लेले। कांग्रेस के, भाजप के, अम्बेडकर के, महामद के, जीसस के, गौतम बुद्ध के, मार्क्स के, ओशो के, स्टालिन के, गांधी

9 जुलाई 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आखिर क्या है अघोरी पंथ का गुप्त रहस्य..

महादेव के पंचम मुख अघोर द्वारा उद्भूत मुक्ति का मार्ग तंत्र में अघोर के नाम से विख्यात है। (यद्यपि अज्ञानता और सनातन संस्कृति के खंडन के षड्यंत्रों के कारण अब यह कुख्यात अधिक है)। अघोर मार्ग के अनुयायी अघोरी कहलाते हैं। जो घोर(जगत प्रपंच की मधुर मोहिनी माया और भेद बुद्धि रुपी अवि

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

Was Buddha Anti-Vedism?

Rebuttal to those Neo-Buddhists anti-Hindu tree huggers who say That the Buddha was anti-varna (caste) and Anti-Vedism-Anti Ritual “The Buddha said, ‘What the noble ones say is the truth, what the others say is not true. And why is this? The noble ones understand things as they a

9 अगस्त 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्या आदि शंकराचार्य प्रच्छन्न बौद्ध हैं?

महामहिम आद्यगुरू भगवान शंकराचार्य जी के अद्वैतवाद में कई ऐसी अवधारणायें हैं जो बौद्ध दर्शन के महायानी संप्रदायों माध्यमिक शून्यवाद तथा योगाचार विज्ञानवाद से मिलती-जुलती हैं। यही कारण है कि विभिन्न दर्शनों के कई आचार्यों ने आक्षेप किया है कि शंकर का अद्वैतवाद बौद्ध दर्शन विशेषतः म

28 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

धर्मसम्राट करपात्रीजी महाराज कौन थे ? जानिए 8 पंक्तियों में

कुछ बुद्धिमान जन भगवान हरि(विष्णु) का भजन करते हैं, और कुछ दूसरे संसार तापहारी हर(शंकर) की सेवा करते हैं। किन्तु धर्म की हानि से खिन्न मनवाले हम लोगों की उपासना का पात्र तो हरि और हर का वह अनुपम अद्वैत है, जिसे हमने अपनी आंखों से देखा है। (श्रीस्वामी करपात्रीजी महाराज के संन्यास

26 जुलाई 2017 · 2 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

लाला हरदयाल: जिन्होंने अमेरिका से लड़ी भारत की आज़ादी की लड़ाई!

स्वतंत्रता संग्राम के प्रंमुख सेनानी लाला हरदयाल जी के बारे में लोग कम ही जानते है। उसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि उनकी वैचारिक एवं व्यवहारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र देश से बाहर विदेश में, खासकर अमेरिका में रहा। लाला जी में प्रचण्ड बौद्धिक क्षमता के साथ आत्म त्याग की और राष्

18 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

अमर बलिदानी महावीर सिंह

आइये परिचित होते हैं अमर बलिदानी महावीर सिंह से। उनका जन्म 16 सितम्बर 1904 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले के शाहपुर टहला नामक एक छोटे से गाँव में उस क्षेत्र के प्रसिद्द वैद्य कुंवर देवी सिंह और उनकी धर्मपरायण पत्नी श्रीमती शारदा देवी के पुत्र के रूप में हुआ था| प्रारंभिक शिक्षा गाँव

27 जून 2017 · 13 मिनट का पाठ