Upanishads

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उपनिषद्

उपनिषद् वैदिक चिंतन की दार्शनिक परिणति हैं। ब्रह्म, आत्मा और उनके पारस्परिक संबंध पर उपनिषदों की चर्चा से जुड़ी सामग्री यहाँ है।

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The Science Behind Shraddh
संस्कृत · शास्त्र

The Science Behind Shraddh

Where does this soul go after death? Its description is found in detail in the Chandogya Upanishad of the Tandya Mahabrahman of Samaveda . There are three movements of the Jeeva described there, out of which we will talk about the movement towards the chandraloka (चंद्रलोक) in wh

Dr. Vineet Aggarwal · 12 सितम्बर 2019 · 8 मिनट

हिन्दू धर्म को समझने के लिए पढ़नी होंगी ये पुस्तकें
संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म को समझने के लिए पढ़नी होंगी ये पुस्तकें

ऐसे अनेक हिन्दू हैं जो वास्तविक व सत्य रूप में सनातन धर्म या जिसे हम हिन्दू धर्म कहते हैं, उसे जानना व समझना चाहते हैं, परन्तु मार्गदर्शन के आभाव में ठीक मंजिल तक नहीं पहुंच पाते। हिन्दू धर्म की यह खासियत भी है और कठिनाई भी कि अन्य मतों की तरह जैसे इस्लाम में कुरान, व ईसाईयत में

13 जनवरी 2019 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

जबाला, सत्यकाम और महर्षि गौतम ने सिखाया हिन्दू धर्म का मर्म

छान्दोग्योपनिषद् के चौथे अध्याय में जबाला, सत्यकाम और हरिद्रुमत के पुत्र महर्षि गौतम की कथा मिलती है। जबाला उस भारत का प्रतिनिधित्व करती है जहाँ नारी हर रूप में नारायणी है, सत्यकाम सत्य के उस प्रहरी के रूप में खड़े हैं जो कहता है कि जो धीर मनुष्य सत्य-पथ से कभी नहीं हटता, वही ब्रह

2 अगस्त 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

मदालसा की कहानी सिद्ध करती है हिन्दू संस्कृति में माँ का सर्वोच्च स्थान

माता गुरूतरो भूमेः महाभारत में जब यक्ष धर्मराज युधिष्ठिर से सवाल करते हैं कि 'भूमि से भारी कौन?' तब युधिष्ठर जवाब देते हैं, 'माता गुरूतरा भूमेः युधिष्ठिर द्वारा माँ के इस विशिष्टता को प्रतिपादित करना यूं ही नहीं है आप अगर वेद पढ़ेंगें तो वेद माँ की महिमा बताते हुए कहती है कि माँ क

2 अगस्त 2018 · 5 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

आद्य शंकराचार्य का अद्भुत मंगलाचरण...

संस्कृत साहित्य में ग्रन्थ के प्रारम्भ में मंगलाचरण की सुदीर्घ परम्परा है। सभी उपनिषदों का अपना मंगलाचरण है। मंगलाचरण के बिना कोई कार्य प्रारंभ करें तो उसमें विघ्न पड़ने की आशंका रहती है। पुस्तक के ऊपर श्रीगणेशाय नमः लिखना भी मंगलाचरण ही है। परन्तु भाष्यकार भगवान शंकराचार्य के ब्र

18 दिसम्बर 2017 · 2 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

प्रश्नोपनिषद के गुरु और शिष्य की बातें

प्रश्नोपनिषद का प्रारम्भ इस प्रकार होता है कि सुकेशा, शिविकुमार, सत्यकाम, सौर्यायणि, कौसल्य, भार्गव और कबन्धी, यह ब्रह्मनिष्ठ ऋषि परब्रह्म की खोज करते हुए कि, "वह ब्रह्म क्या है?" इत्यादि जिज्ञासा लेकर उसकी खोज में आचार्य पिप्पलाद के पास हाथों में समिधा लेकर इस भावना से जाते हैं

13 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ