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वामपंथ

वामपंथी विचारधारा और भारतीय बौद्धिक जगत में उसकी भूमिका पर आलोचनात्मक लेख यहाँ संकलित हैं।

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संस्कृत · शास्त्र

"Inside The Hindu Mall" - Abhijeet Singh

Abhijeet Singh जी द्वारा लिखित "Inside The Hindu Mall" पुस्तक उन युवाओं के लिए एक रौशनी है जो हिन्दुत्व से दूर वामपंथ के अँधेरे कमरे में बन्द हो गए हैं। हर छोटे बड़े मुद्दे को एड्रेस करती यह पुस्तक कोई निर्णय नहीं सुना देती, बल्कि फिर एक बार सोचने को मजबूर कर देती है, प्राकृतिक और

Mudit Agrawal · 30 मई 2021 · 5 मिनट

कम्युनिज्म (वामपंथ) के खोखलेपन पर श्री गुरुजी गोलवलकर के विचार
राजनीति · इतिहास

कम्युनिज्म (वामपंथ) के खोखलेपन पर श्री गुरुजी गोलवलकर के विचार

"हमारे देश में जनतंत्र की गम्भीर असफलताओं में कम्युनिज्म की बढ़ती हुई विभीषिका है, जो जनतान्त्रिक विधान की मानी हुई शत्रु है। जनता के समक्ष की गई अपनी आर्थिक अपील में कम्युनिस्टों से कही पिछड़ न जायें, इस प्रयास से हमारे नेतागण कम्युनिस्टों की ही भाषा तथा कार्यक्रमों को स्वयं भी

15 अक्टूबर 2020 · 5 मिनट का पाठ

आंग सान सू की - म्यांमार की माँ को हर भारतीय का नमन
राजनीति · इतिहास

आंग सान सू की - म्यांमार की माँ को हर भारतीय का नमन

नमन है म्यांमार की नोबल विजेता माँ आंग सान सू की को, जो अंतराष्ट्रीय दबाव को दरकिनार कर अपने देश के साथ अडिगता से खड़ी रहीं। अनेक अवार्ड पहले ही छीन लिए जाने और वैश्विक वामपंथी शक्तियों द्वारा नोबल छीनने की धमकियों को धता बताकर उन्होंने अपने देश का साथ दिया। आज ब्रह्मदेश का जन जन

14 दिसम्बर 2019 · 3 मिनट का पाठ

किस प्रकार रूस  के कम्युनिस्ट शासन ने की दो करोड़ हत्याएं
संस्कृत · शास्त्र

किस प्रकार रूस के कम्युनिस्ट शासन ने की दो करोड़ हत्याएं

ब्रिटिश अमेरिकन इतिहासकार एवं कवि Robert Conquest (15 जुलाई 1917- 3 अगस्त 2015) ने 1968 में सोवियत यूनियन में स्टालिन द्वारा किये गये लगभग डेढ़ से दो करोड़ हत्याओं पर एक महत्वपूर्ण पुस्तक ' The Great Terror: A reassessment " लिखा है। यह पुस्तक 1968 में प्रकाशित हुई थी , जिसका पुन

12 अक्टूबर 2019 · 12 मिनट का पाठ

1984 और एनिमल फार्म, लेनिनवादी मूक बधिर समाज का नमूना
संस्कृत · शास्त्र

1984 और एनिमल फार्म, लेनिनवादी मूक बधिर समाज का नमूना

जॉर्ज ऑर्वेल की दो महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं- Animal farm तथा 1984 . Animal farm को तो मैंने बहुत पहले पढ़ा था, लेकिन 1984 को अभी जल्दी ही समाप्त किया हूँ। यह किताब 1949 में प्रकाशित हुई थी, और Time magazine ने अंग्रेजी भाषा की 1923 से 2005 तक 100 बेहतरीन किताबों में शामिल किया था।

19 सितम्बर 2019 · 7 मिनट का पाठ

जब एक कम्युनिस्ट ने कहा, "लोगों को खून का स्वाद लेने दो"!
संस्कृत · शास्त्र

जब एक कम्युनिस्ट ने कहा, "लोगों को खून का स्वाद लेने दो"!

अभी हाल ही में मैंने राज थापर की पुस्तक All these years पढ़ी। राज थापर (1926- 1987) के निधन के बाद उनके डायरी से संकलित करके यह संस्मरणात्मक पुस्तक 1991 में प्रकाशित की गयी। पुस्तक में कुल 24 चैप्टर हैं, और आखिरी चैप्टर अधूरा है, जो राज थापर की असमय कैंसर से मृत्यु हो जाने के कार

16 सितम्बर 2019 · 5 मिनट का पाठ

कम्युनिस्ट विचारधारा के अंधविश्वास
संस्कृत · शास्त्र

कम्युनिस्ट विचारधारा के अंधविश्वास

अभी कुछ दिन पहले ही हॉवर्ड फास्ट की पुस्तक The Naked God: The Writer and The Communist Party पढ़ा। फास्ट ने 17 वर्ष की उम्र से ही लिखना शुरू किया था और जीवन के अंत तक लिखते रहे। कुल मिलाकर 80 किताबें लिखी। वे 1943 से 1956 तक अमेरिका के कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे, परंतु

16 सितम्बर 2019 · 6 मिनट का पाठ

मार्क्सवादी विचारधारा की भारत के इतिहास और वर्तमान से गद्दारी
राजनीति · इतिहास

मार्क्सवादी विचारधारा की भारत के इतिहास और वर्तमान से गद्दारी

वर्ष 2004 में शंकर शरण की एक किताब "Marxism and Writing of Indian History" प्रकाशित हुई थी। पुस्तक में यह उल्लेख है कि मार्क्सवादियों द्वारा सायास तथ्यों को छुपाकर यह तर्क़ गढ़ा गया है कि अल्पसंख्यक होने के कारण मुसलमानों को असुरक्षा महसूस हुई। यथार्थ यह है कि वे इस 'असुरक्षा' भा

15 सितम्बर 2019 · 7 मिनट का पाठ

एक मुस्लिम कभी वामपंथी क्यों नहीं हो सकता?
राजनीति · इतिहास

एक मुस्लिम कभी वामपंथी क्यों नहीं हो सकता?

एक मुस्लिम कभी वामपंथी क्यों नहीं हो सकता? 2004 की सर्दियों में SFI के संसद मार्च में जाने का मौका मिला था। हुमायूँ के किले के पास के एक कैंप में दो दिन और दो रातें गुजारनी थी। बिहार, केरल और कर्नाटक के कॉमरेडों के रहने के लिये एक बड़ा हॉल आरक्षित था। जितने भी वामपंथी वहां बिहार

10 मार्च 2019 · 5 मिनट का पाठ

Sabarimala And The Lessons To Be Learnt
धर्म · संस्कृति

Sabarimala And The Lessons To Be Learnt

The communists have deceitfully succeeded in breaking the tradition of Sabarimala. As the protests over this issue continue in Kerala, let's try to have a look on the broader perspective and what lessons Hindus can learn from this whole episode. In the modern era as long as you d

7 जनवरी 2019 · 3 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

बुलंदशहर हिंसा में हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए माफ़ी मांगेगी मीडिया?

बुलंदशहर की घटना के बाद वामपंथी विचारधारा के अराष्ट्रीय तत्वों की बांछे खिल उठी हैं| दोनों की संयुक्त कोशिश है अखलाक प्रकरण के बाद एक बार फिर से हिंदूओं को बदनाम किया जाए| इस कोशिश में वामपंथी मीडिया का भी साथ मिल चुका है। हिंदूओं को बदनाम करने की यह खबर देश की सीमा के सात समंदर

8 दिसम्बर 2018 · 6 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

क्या मनुस्मृति महिलाओं का विरोध करती है ??

आजकल कई वामपंथी और नारीवादी हिन्दू धर्म का विरोध करने के लिए हिन्दू धर्मग्रंथ मनुस्मृति पर स्त्रीविरोधी और पितृसत्तात्मक होने का आरोप लगाते हैं जबकि सत्य कुछ और ही है। आश्चर्य तब होता है जब यही लोग कुरान को स्त्री की हितैषी बताते हैं। मनुस्मृति में स्त्रियों के बारे में अनेक ऐसे

18 जुलाई 2018 · 3 मिनट का पाठ