युगसंवाद · धर्म · संस्कृति
धर्म · संस्कृतिपैसे कमाना बनाम परिवार पालना
Virag Dhulia · 28 नवम्बर 2017 · 2 मिनट का पठन
फेमिनिस्टों का कहना है कि चूँकि अब महिलाएँ पैसे कमाने में सक्षम हो गयी हैं, उन्हें पुरुषों से कम ना समझा जाए और यह उनकी परिभाषा है Gender Equality की|
लेकिन वोह लोग कुछ बातें या तो भूल रहे हैं या भूले ही रहना चाहते हैं| सबसे पहली बात, केवल मात्र पैसे कमाना और पैसे कमाके परिवार पालना - इन दोनों में ज़मीन आसमान का फर्क है |
जब आप का ध्यान सिर्फ पैसे कमाने पर होता है तो आप सिर्फ वही करते हो, कुछ काम कर लिया जिससे थोड़े बहुत पैसे मिल गए और उसको लाली-लिपस्टिक में उड़ा दिया, लेकिन जब आप एक परिवार पालने के लिए पैसे कमाते हो तो आप पर उस परिवार के सभी सदस्यों की सारी मनोकामनों एवं अभिलाषाओं का भार होता है |
आप सिर्फ उनके रहने खाने का इंतज़ाम नहीं करते बल्कि उनकी हर ज़रुरत को पूरा करते हो | केवल यही नहीं, इस पहाड़ जैसे लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु आप बहुधा वो काम करते हो जो आपकी पसंद का नहीं होता मगर इतने पैसे देता है जिससे की आपकी और आप के परिवार की ज़रूरतें पूरी हो सकें |
आप कार्यस्थल पर प्रायः अपमानित होकर के खून का घूँट भी पीते हो क्यूंकि काम और काम से आने वाला पैसा अनिवार्य है | और आप इस बात का भी ध्यान रखते हो कि कल को यदि कोई ऊंच-नीच हो जाए और पैसा आना बंद हो जाए, तब भी अल्प समय तक घर चलता रहे, जब तक कि आय के अन्य स्त्रोत का प्रबंध नहीं हो जाता |
संक्षेप में आप अपने स्वयं के अस्तित्व, महत्वाकांक्षाओं, इच्छाओं इत्यादि, इन सब का गला घोट कर, अपने आप को एक परिवार के, जिसमे आपके बूढ़े माँ-बाप, पत्नी, बच्चे होते हैं, उनके भरण पोषण में न्योछावर कर देते हो और यह काम आप निरंतर पीढ़ी दर पीढ़ी करते रहते हो| कार्यस्थल पर कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों ना हो, आप काम नहीं छोड़ सकते क्यूंकि आपको एक पूरा परीवार पालना है ना केवल अपने लिए पैसा कमाना है |
और आपको यह सब करने के लिए श्रेय तो दूर, यह ताना तक कसा जाता है कि - नया क्या कर लिया तुमने, सारे तो यही करते हैं और तुमसे बेहतर करते हैं, यह तो तुम्हारा कर्त्तव्य है |
अब ज़रा इतिहास पर ध्यान दीजिये और comments में बताइये की आदिकाल से कौन परिवार चलाता आ रहा है, कुर्बानियाँ देता आ रहा है? महिला या पुरुष?
यह भी पढ़ें,
क्या सम्बन्ध है हिन्दू विरोधी एजेंडे और फेमिनिज्म में!
लड़के विवाह से पहले रखें इन बातों का ध्यान
फेमिनिज्म- घृणा पर आधारित विघटनकारी मानसिकता
क्यों बिगड़ रहे हैं युवा? क्या सुधारने का कोई रास्ता है?
इस लेख को उद्धृत कीजिए
Virag Dhulia. “पैसे कमाना बनाम परिवार पालना”. युगसंवाद, 28 नवम्बर 2017. https://yugsamvad.com/articles/paise-kamaanaa-banaama-parivaara-paalanaa
https://yugsamvad.com/articles/paise-kamaanaa-banaama-parivaara-paalanaa · देखा गया
Filmmaker, Writer, Entrepreneur. Author of famous novel ‘ Chess without a Queen ’
- Feminism
- Men's right
- Feminism in India
संबंधित आलेख

कन्यादान हो या वरदान! अब आप ही बताईये क्या बुराई है?
क्या कन्यादान सिर्फ खैरात है? क्यों होता है कन्यादान और क्या यह स्त्री का अपमान है? जानिए हिन्दू विवाह संस्कार में कन्यादान का सही अर्थ, उसका सांस्कृतिक और वैदिक महत्व। पढ़ें वरदान बनाम कन्यादान की सच्ची व्याख्या, ब्रह्म विवाह का रहस्य और उन कुतर्कों का उत्तर जो हिन्दू परम्पराओं को गलत साबित करते हैं।
22 सितम्बर 2021 · 5 मिनट का पाठ

भीलनी शबरी के झूठे बेर श्रीराम द्वारा खाना वाल्मीकि रामायण से सिद्ध है
आजकल कुछ अति विद्वान समाज में यह भ्रम प्रचारित कर रहे हैं कि शबरी के "झूठे बेर" की कथा रामायण में नहीं है, व शबरी निम्न जाति की भक्त नहीं बल्कि उच्च वर्ण की स्त्री है। यह न केवल शास्त्र के परम तात्पर्य के प्रतिकूल है वरन सामाजिक समरसता हेतु भी अत्यन्त हानिप्रद एवं अहंकार-द्वेष का
3 जुलाई 2021 · 13 मिनट का पाठ
Is Feminism A Movement Against Physically Desirable Women?
Feminism: I know feminist amidst us would like to quote the dictionary meaning of feminism to prove me wrong. The fact of the matter is that Taliban means Student. Shall we start respecting the Taliban? Here is the truth, Feminism is a movement against physically desirable women.
23 मई 2021 · 3 मिनट का पाठ