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हिन्दी भाषा के इतिहास, वर्तमान स्थिति और भविष्य पर लेख यहाँ संकलित हैं।

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कम्युनिज्म (वामपंथ) के खोखलेपन पर श्री गुरुजी गोलवलकर के विचार
राजनीति · इतिहास

कम्युनिज्म (वामपंथ) के खोखलेपन पर श्री गुरुजी गोलवलकर के विचार

"हमारे देश में जनतंत्र की गम्भीर असफलताओं में कम्युनिज्म की बढ़ती हुई विभीषिका है, जो जनतान्त्रिक विधान की मानी हुई शत्रु है। जनता के समक्ष की गई अपनी आर्थिक अपील में कम्युनिस्टों से कही पिछड़ न जायें, इस प्रयास से हमारे नेतागण कम्युनिस्टों की ही भाषा तथा कार्यक्रमों को स्वयं भी

Mudit Agrawal · 15 अक्टूबर 2020 · 5 मिनट

मदरसा : जिहाद का ऐतिहासिक उद्योग
धर्म · संस्कृति

मदरसा : जिहाद का ऐतिहासिक उद्योग

भारत या किसी भी देश में जबतक मदरसे रहेंगे तबतक जिहादी मानसिकता और आतंकवाद रहेंगे। मदरसा शब्द की व्युत्पत्ति सेमेटिक भाषाओं में “द् र् स्” धातु से मद्रसः शब्द की व्युत्पत्ति अरबी में हुई जिसे उर्दू में मदरसा कहते हैं। बिना स्वर के कोई शब्द या धातु बन ही नहीं सकता,सेमेटिक धातु की अ

23 दिसम्बर 2019 · 4 मिनट का पाठ

1984 और एनिमल फार्म, लेनिनवादी मूक बधिर समाज का नमूना
संस्कृत · शास्त्र

1984 और एनिमल फार्म, लेनिनवादी मूक बधिर समाज का नमूना

जॉर्ज ऑर्वेल की दो महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं- Animal farm तथा 1984 . Animal farm को तो मैंने बहुत पहले पढ़ा था, लेकिन 1984 को अभी जल्दी ही समाप्त किया हूँ। यह किताब 1949 में प्रकाशित हुई थी, और Time magazine ने अंग्रेजी भाषा की 1923 से 2005 तक 100 बेहतरीन किताबों में शामिल किया था।

19 सितम्बर 2019 · 7 मिनट का पाठ

सुब्रमण्यम भारती - दक्षिण के क्रांतिकारी कवि
राजनीति · इतिहास

सुब्रमण्यम भारती - दक्षिण के क्रांतिकारी कवि

11 दिसंबर तमिल भाषा के महाकवि सुब्रमण्यम भारती का जन्मदिवस है , एक ऐसे साहित्यकार जो सक्रिय रूप से स्वतंत्रता आंदोलन में स्वयं तो शामिल रहे ही, उनकी रचनाओं से प्रेरित होकर दक्षिण भारत में बड़ी तादाद में आम लोग भी आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। 11 दिसंबर 1882 को तत्कालीन मद्रास प्रे

6 मई 2019 · 2 मिनट का पाठ

भारतेंदु हरिश्चंद्र: आधुनिक हिंदी के पितामह जिनकी जिंदगी लंबी नहीं बड़ी थी
राजनीति · इतिहास

भारतेंदु हरिश्चंद्र: आधुनिक हिंदी के पितामह जिनकी जिंदगी लंबी नहीं बड़ी थी

भारतेंदु हरिश्चंद्र को केवल 35 वर्ष की आयु मिली, लेकिन इतने ही समय में उन्होंने गद्य से लेकर कविता, नाटक और पत्रकारिता तक हिंदी का पूरा स्वरूप बदलकर रख दिया। हिन्दी साहित्य के माध्यम से नवजागरण का शंखनाद करने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म काशी में 9 सितम्बर, 1850 को हुआ था। इन

6 जनवरी 2019 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

तमिल को संस्कृत से प्राचीन बताना अंग्रेजों का षड्यंत्र

प्रधानमंत्री हुए भारत विरोधी दुष्प्रचार का शिकार तमिल भाषा एक बार फिर से चर्चा में है। कारण पीएम मोदी द्वारा 'मन की बात' में तमिल को संस्कृत से प्राचीन बताया गया। इससे पहले भी छात्रों से वार्तालाप के समय फरवरी में भी पीएम मोदी द्वारा यही कहा गया था। प्रधानमंत्री ने जाने या अनजाने

29 अगस्त 2018 · 4 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

हिंदुओं को सेकुलरिज्म की गलत परिभाषा सिखाई गई है, जानें सही परिभाषा

2 नवम्बर 1976 को संविधान के 42वें संशोधन के अंतर्गत भारत एक सेकुलर अर्थात पंथनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित हो गया था। और तभी से स्पष्ट रूप से सेकुलरिज्म के नाम पर राजनीति आरंभ हो गई थी। राजनैतिक दलों के नेताओं ने अपने हिसाब से जनता को लुभाने के लिए सेकुलरिज्म के अर्थ समझाये किन्तु वह सब

11 जुलाई 2018 · 3 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

तुलसीदास द्वारा कबीर की फ़ज़ीहत

लोक में कबीर और तुलसीदास के सत्संग (एनकाउंटर) की अनेक कथाऐं व्याप्त हैं वामदृष्टि मसिजीवी चाहे जो भी कहें। मसलन, एक कथा सबने सुनी है कि भूजा भूजने वाली भरभूज से कबीर भूजा मांगते हैं कि ‘ऐ मेरे बाप की मेहर’ भूजा दे और स्त्री उनको चइला ले के दौड़ा लेती है दूसरी तरफ तुलसीदास कहते हैं

9 जुलाई 2018 · 4 मिनट का पाठ

समाचार · मीडिया

पूरी दुनियां चेलों से पट गई..

पूरी दुनियां चेलों से पट गई। जिधर नजर दौड़़ाओ चेले ही चेले। श्यान मैजेंटा विबग्योर हर रंग के चेले हां इन्फ्रा रेड और यू वी रंग के भी चेले। दर्जन के भाव चेले किलो के भाव लेले। कांग्रेस के, भाजप के, अम्बेडकर के, महामद के, जीसस के, गौतम बुद्ध के, मार्क्स के, ओशो के, स्टालिन के, गांधी

9 जुलाई 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

सोमरस के बारे में वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

प्राच्य संस्कृतियों के अधिकतर विरोधियों की मान्यता रही है कि वैदिक ऋषि जो सोमरस पीते थे वह शराब थी। बच्चन के बाउजी बड़के बच्चन साहब ने तो पूरी कविता ही झोंक रखी है इसी कुत्सित सोच के आस पास। सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला, द्रोणकलश जिसको कहते थे, आज वही मधुघट आला, वेदिव

2 फ़रवरी 2018 · 7 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

न्याय का असली देवता कौन? अंधी देवी या शनि देव?

अगर आप भाग्य या दुर्भाग्य से कभी भारतीय न्याय-नक्कारखानों में जिन्हें हम भ्रमवश कई बार न्याय के मंदिर कह देते हैं, गये हों, तो वहाँ बहुधा आपको आंखों पर पट्टी बांधे न्याय की देवी के दर्शन हुए होंगे। भाग्य से तब जबकि आप एक स्थापित वकील या जज हों और दुर्भाग्य तब जबकि आप परेशान मुवक्

2 फ़रवरी 2018 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

ब्राह्मण और क्षत्रिय के बीच का अन्योन्याश्रय संबध

सोशल मीडिया पर एक गैंग तैयार हो गया है जो ब्राह्मण और राजपूतों के मध्य मतभेद तैयार कर रहा है।आज कई ग्रंथो से खोज-खबर करने के बाद उनकों उत्तर देना चाहूँगा। ऐसे तो खोज-खबर करने के बाद 25-30 श्लोक और कई प्रसंग मिले जो ब्राह्मण और क्षत्रिय का अन्योन्याश्रय संबध बताते हैं। लेकिन लेख क

2 जनवरी 2018 · 7 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

पैसे कमाना बनाम परिवार पालना

फेमिनिस्टों का कहना है कि चूँकि अब महिलाएँ पैसे कमाने में सक्षम हो गयी हैं, उन्हें पुरुषों से कम ना समझा जाए और यह उनकी परिभाषा है Gender Equality की| लेकिन वोह लोग कुछ बातें या तो भूल रहे हैं या भूले ही रहना चाहते हैं| सबसे पहली बात, केवल मात्र पैसे कमाना और पैसे कमाके परिवार पा

28 नवम्बर 2017 · 2 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

ये क्रिप्टो क्रिश्चियन क्या है?

ग्रीक भाषा मे क्रिप्टो शब्द का अर्थ हुआ छुपा हुआ या गुप्त। क्रिप्टो क्रिश्चियन * का अर्थ हुआ गुप्त-ईसाई। इसमें महत्वपूर्ण बात ये है कि क्रिप्टो-क्रिश्चियन कोई गाली या नकारात्मक शब्द नहीं हैं। क्रिप्टो-क्रिश्चियनिटी ईसाई धर्म की एक संस्थागत प्रैक्टिस है। क्रिप्टो-क्रिश्चियनिटी के

24 अक्टूबर 2017 · 7 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

वेदमूर्ति पण्डित श्रीपाद दामोदर सातवलेकर का पुण्य स्मरण

वेदविद्या का अनुशीलन करने के पक्षपाती लोगों में पण्डितजी का नाम ही पर्याप्त परिचय है। वैदिक साहित्य और संस्कृत को जनसामान्य की पहुंच में लाने का ऐसा महनीय कार्य उन्होंने किया था। जैसा करने की इच्छा कभी दयानन्द स्वामी ने की थी। स्वामी दयानन्द ने हिन्दी को वेदभाष्य की भाषा बनाकर वे

19 सितम्बर 2017 · 4 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

महारानी पद्मिनी और उनके जौहर की गाथा...

पद्मिनी स्कूल की बात है, स्कूल में जब कोई टीचर नहीं आते थे तो उनकी जगह टेम्परेरी टीचर कुछ दिन के लिए पढ़ाने आते थे। तब मैं सातवीं क्लास में था और हमारी हिन्दी की मैम एक दो महीने के लिए बाहर गयीं थीं। उनकी जगह एक नीरज सर पढ़ाने आने लगे। टेम्परेरी टीचर्स अक्सर मस्त होते हैं, मज़े में

28 जनवरी 2017 · 6 मिनट का पाठ