लेखक

Shri Vinay Jha

Shri Vinay Jha

आचार्य श्री विनय झा एक योगी, वेद-वेदांगादि शास्त्रों के ज्ञाता, सूर्यसिद्धान्तीय वैदिक ज्योतिष के विद्वान, सॉफ्टवेयर डेवलपर, भाषाविद्, मौसम वैज्ञानिक, प्रतिष्ठित पंचांगकार एवं इतिहास, संस्कृति, धर्म, अध्यात्म से लेकर अर्थशास्त्र, जीवविज्ञान, राजनीति आदि अनेक विषयों के गहन जानकार एवं प्रबुद्ध विचारक हैं

लेख

युधिष्ठिर का द्यूत - वैदिक रहस्यमयी अक्षविद्या
धर्म · संस्कृति

युधिष्ठिर का द्यूत - वैदिक रहस्यमयी अक्षविद्या

धर्मराज युधिष्ठिर को जुआरी कहना गलत है । धर्मराज युधिष्ठिर ने जीवन में कितनी बार द्यूत खेला?“व्यसनी” कहलाने के लिये कितनी बार खेलना पड़ता है? द्यूतविद्या को जुआ कहना भी गलत है । धर्मराज युधिष्ठिर को ऋषि से द्यूतविद्या क्यों सीखनी पड़ी?ऋषि के सिवा अन्य कोई शिक्षक क्यों नहीं मिला?शकु

1 सितम्बर 2021 · 1 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

ॐ का सही उच्चारण कैसे होता है?

अष्टाध्यायी (१⋅२⋅३४) का कथन है कि “जप,न्यूङ्ख तथा साम के सिवा यज्ञकर्म में एकश्रुति का पाठ किया जा सकता है” । किसी भी वेदमन्त्र में जब दीर्घ “ॐ” (वा ह्रस्व “उ” अथवा “ओ”) को जोड़ना पड़े तो उस “ॐ” को “न्यूङ्ख” कहते हैं । एकश्रुति का अर्थ है सारे स्वरों को एक ही स्वर मानकर पाठ करना ।

1 सितम्बर 2021 · 2 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

मेधा, कौतूहल, जिज्ञासा का अर्थ और झुण्ड प्रवृत्ति

मेधा और झुण्ड “जो धर्म की रक्षा करता है,धर्म उसकी रक्षा करता है ।” धर्म का अर्थ है वैदिक यज्ञ,अर्थात् वैदिक कर्म का काण्ड । धर्म के दस लक्षण हैं — धृति क्षमा दम अस्तेय शौच इन्द्रियनिग्रह धी विद्या सत्य अक्रोध । किन्तु ये सब तो केवल लक्षण हैं जिनके आधार पर हम पहचान सकते हैं कि अमु

1 सितम्बर 2021 · 8 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

पूर्णावतार भगवान् श्रीकृष्ण - धर्म और रासलीला

कृष्णपक्ष!उसपर अष्टमी!वह भी दक्षिणायन वाली!केवल पूर्णावतार ही इसे झेल सकते हैं,और इसे शुभ बना सकते हैं! एक महायुग में श्रीविष्णु के दस अवतार होते हैं जिनमें केवल तीन ही पूर्णावतार हैं । उन तीनों में से केवल कृष्णावतार ही दो युगों के लिये होते हैं — द्वापर और कलि,क्योंकि कलियुग मे

1 सितम्बर 2021 · 4 मिनट का पाठ

ज्योतिष

सूर्यसिद्धान्त सार्वकालिक और सार्वभौमिक है

विक्रमादित्य के नवरत्न वराहमिहिर की पञ्चसिद्वान्तिका−१⁄३ १ में सूर्यसिद्धान्त को “सौर” सिद्धान्त की संज्ञा दी गयी तथा पञ्चसिद्वान्तिका−१⁄४ २ में इसे “सावित्र” सिद्धान्त कहा गया। अतः वराहमिहिर के अनुसार गायत्री मन्त्र के वैदिक देवता सविता ही सूर्यसिद्धान्त के प्रतिपादक हैं, तथा उन

29 मई 2021 · 5 मिनट का पाठ

ज्योतिष

राक्षस संवत्सर है संवत् 2078, अ.भा.विद्वत्परिषद, काशी ने लगाई मुहर

◆संवत् २०७८ है राक्षस संवत्सर◆ ◆लुप्तसंवत्सर में विवाद क्यों ?◆ -- आचार्य श्री विनय झा , त्रिस्कन्ध ज्योतिर्विद्, सूर्यसिद्धान्तीय गणितज्ञ संरक्षक, अखिल भारतीय विद्वत्परिषद, वाराणसी गणितज्ञ, आदित्य पञ्चाङ्ग (काशी), श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग (जयपुर) आदि आदित्य पञ्चाङ्ग के सम

20 अप्रैल 2021 · 8 मिनट का पाठ

माइक्रोसॉफ्ट का मिथिलाक्षर व भारतीय लिपियों से सौतेला व्यवहार
राजनीति · इतिहास

माइक्रोसॉफ्ट का मिथिलाक्षर व भारतीय लिपियों से सौतेला व्यवहार

माइक्रोसॉफ्ट अपने मंगल फॉण्ट में तो (देवनागरी) टाइप करने देता है किन्तु SMP प्लेन के मिथिलाक्षर में न तो टाइपिंग सम्भव है और न ही कॉपी-पेस्ट, क्योंकि उसके Word में LOOKUP को प्रतिबन्धित किया गया है जिसके बिना किसी भी भारतीय लिपि में टाइपिंग असम्भव है क्योंकि भारतीय लिपियों में बह

25 सितम्बर 2020 · 10 मिनट का पाठ

क्या अभिजीत बनर्जी पर देश को गर्व है?
राजनीति · इतिहास

क्या अभिजीत बनर्जी पर देश को गर्व है?

पाश्चात्य संस्कृति के प्रसार−प्रचार में नोबेल पुरस्कार जैसे हथकण्डों का खुलकर प्रयोग होता रहा है। रूस के ज़ार को बुरा न लगे इस कारण तॉल्स्तॉय को नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया,हालाँकि पश्चिम में भी हर कोई मानता आया है कि उनसे श्रेष्ठ साहित्यकार विश्व में कोई नहीं था। नोबेल पुरस्कार

23 दिसम्बर 2019 · 10 मिनट का पाठ

कोर्ट में भी जीती कभी न हारने वाली “अयोध्या”
संस्कृत · शास्त्र

कोर्ट में भी जीती कभी न हारने वाली “अयोध्या”

“अयोध्या” का अर्थ है जिसे युद्ध द्वारा जीता न जा सके। बाबर ने आक्रमण करके मन्दिर तोड़ा,मस्जिद बनाया,तीन दूसरे प्राचीन मन्दिर वहाँ औरंगजेब ने तोड़े,किन्तु 1858 तक वहाँ हथियारबन्द साधुओं का कब्जा रहा जिन्होंने कभी किसी मुसलमान को रामलला की जन्मभूमि में नमाज नहीं पढ़ने दिया। रानी विक्ट

23 दिसम्बर 2019 · 8 मिनट का पाठ

व्यायाम नहीं योग और प्राणायाम हैं उत्कर्ष का रास्ता
संस्कृत · शास्त्र

व्यायाम नहीं योग और प्राणायाम हैं उत्कर्ष का रास्ता

“ क्या प्राणायाम और आसन के अलावा strength exercises जैसे push ups, squats इत्यादि करना चाहिये आज कल के युवाओं को शारीरिक शक्ति को maintain करने के लिए ?” उत्तर — strength exercises जैसे push ups और दण्ड−बैठक या भार उठाने वाले व्यायाम से दवाब बढ़ता है जिससे मांसपेशियों का बल तो बढ़त

23 दिसम्बर 2019 · 6 मिनट का पाठ

मदरसा : जिहाद का ऐतिहासिक उद्योग
धर्म · संस्कृति

मदरसा : जिहाद का ऐतिहासिक उद्योग

भारत या किसी भी देश में जबतक मदरसे रहेंगे तबतक जिहादी मानसिकता और आतंकवाद रहेंगे। मदरसा शब्द की व्युत्पत्ति सेमेटिक भाषाओं में “द् र् स्” धातु से मद्रसः शब्द की व्युत्पत्ति अरबी में हुई जिसे उर्दू में मदरसा कहते हैं। बिना स्वर के कोई शब्द या धातु बन ही नहीं सकता,सेमेटिक धातु की अ

23 दिसम्बर 2019 · 4 मिनट का पाठ

दो सूफियों ने लिया था बाबर से श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर तोड़ने का वचन
धर्म · संस्कृति

दो सूफियों ने लिया था बाबर से श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर तोड़ने का वचन

भारत पर आक्रमण करने से पहले बाबर एक सूफी कलन्दर के छद्म वेष में भारत आया था । कलन्दर बनकर उसने दिल्ली के सुल्तान सिकन्दर लोदी से भी भेंट की । अयोध्या भी गया,जहाँ के दो फकीरों (सूफियों) ने उससे वचन लिया कि वह श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर को तोड़कर वहाँ मस्जिद बनवायेगा तो उसे फकीरों की दु

19 अक्टूबर 2019 · 4 मिनट का पाठ

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की आसुरी सभ्यता की वास्तविकता
संस्कृत · शास्त्र

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की आसुरी सभ्यता की वास्तविकता

यूरोप के तथाकथित 'विद्वानों' ने मोहनजोदड़ो और हड़प्पा 'सभ्यता' को भारतीय सभ्यता की प्राचीनतम आधारशिला बताया और उसे वैदिक पशुपालक लोगों की तुलना में विकसित तथा पुरातन घोषित कर दिया, जिसे आजतक हमारे नीति-निर्धारक और तथाकथित बुद्धिजीवी स्वीकारते आ रहे हैं, खासकर वामपन्थी इतिहासकार। इत

18 अक्टूबर 2019 · 25 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

मूर्तिपूजा - सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण अंग

यह शत-प्रतिशत झूठा प्रचार है कि सनातन धर्म में मूर्तिपूजा नहीं थी। भारत की प्राचीनतम मूर्तियाँ जैनियों या बौद्धों की नहीं हैं। सबसे पहले यह प्रचार अंग्रेजों ने आरम्भ किया कि भारत में ग्रीक राजाओं ने मूर्तिपूजा आरम्भ की, और बाद में ब्रह्म-समाज के छद्म-ईसाईयों तथा आर्यसमाजियों जैसे

17 अक्टूबर 2019 · 6 मिनट का पाठ

'मन्त्र' का अर्थ, प्रयोग और उसके फल
धर्म · संस्कृति

'मन्त्र' का अर्थ, प्रयोग और उसके फल

मन्त्र :- मन के साधन को "मन्त्र" कहते हैं | अर्थात मन जो "संकल्प" ले उसे सत्य बनाने के साधन को मन्त्र कहते हैं | किसी भी वैदिक संहिता में "मन्त्र" नहीं होते | ऋग्वेद में ऋचाएं हैं जिनका प्रयोग यज्ञ में स्तुति हेतु होता है, सामवेद के साम का गान होता है, यजुर्वेद के यजुः से हवि दी

15 अक्टूबर 2019 · 8 मिनट का पाठ