धर्म · संस्कृति

ॐ का सही उच्चारण कैसे होता है?

Shri Vinay Jha · 1 सितम्बर 2021 · 2 मिनट का पठन

अष्टाध्यायी (१⋅२⋅३४) का कथन है कि “जप,न्यूङ्ख तथा साम के सिवा यज्ञकर्म में एकश्रुति का पाठ किया जा सकता है” । किसी भी वेदमन्त्र में जब दीर्घ “ॐ” (वा ह्रस्व “उ” अथवा “ओ”) को जोड़ना पड़े तो उस “ॐ” को “न्यूङ्ख” कहते हैं । एकश्रुति का अर्थ है सारे स्वरों को एक ही स्वर मानकर पाठ करना । जप,न्यूङ्ख तथा साम में एकश्रुति वर्जित है । किन्तु उत्तर भारत के सारे वैदिक तथा अन्य पण्डित अब केवल एकश्रुति ही जानते हैं,सस्वर वेदपाठ की परम्परा केवल सामवेदियों में बची है जिनकी संख्या अल्प है । पाणिनी के अष्टाध्यायी के अनुसार “ॐ” का सदैव सस्वर उच्चारण ही करना चाहिये । इसका अर्थ यह हुआ कि अपनी शाखा के वेद के नियमों के अनुसार ही पाठ करना है । शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिनों को अपने प्रातिशाख्य के नियमानुसार त्रिस्वर पाठ करना चाहिये — जो अब कोई नहीं करता । अतः गलत पाठ से बेहतर है कि मौन पाठ करें । जप भी सस्वर न कर सकें तो मौन जप ही श्रेष्ठ है । किन्तु सामगान कभी भी मौन नहीं करना चाहिये,जिस कारण सामवेद का सस्वर पाठ बचा हुआ है ।
उदाहरणार्थ,गायत्री तीनों वेदों की सभी शाखाओं में है,उसमें ओंकार जोड़ने पर गायत्री मन्त्र बनता है । ओंकार के कारण गायत्री मन्त्र का मौन पाठ ही करना चाहिये वरना गलत पाठ का दोष लगेगा ।
वेद की सहस्रों शाखायें हैं,जिनमें अधिकांश लुप्त हैं किन्तु दर्जनों बची हैं । अपनी वेदशाखा के नियमानुसार ओंकार का पाठ करना चाहिये,किन्तु शुक्ल यजुर्वेद वाले भूल चुके हैं । ऋग्वेद और सामवेद वालों में सस्वर पाठ बचा है किन्तु उनकी अनेक शाखायें हैं,सबमें सस्वर पाठ के अलग−अलग नियम हैं ।अतः शुक्ल यजुर्वेद वालों को मौन पाठ ही करना चाहिये ।
“ओंकार” में “कार” हटाने पर जो बचता है वही उच्चारण है = ओम् ।
ॐ = अ+उ+म् ॥ किन्तु “अउम्” पाठ गलत है ।

ओम्” में ह्रस्व,दीर्घ अथवा प्लुत कुछ भी हो सकता है,यह मन्त्र एवं प्रयोग पर निर्भर करेगा । सामान्यतः आजकल लोग ओऽम् पढ़ते हैं,किन्तु प्राणायाम काल की सावित्री में अतिह्रस्व ॐ पढ़ने पर ही प्राणायाम कर सकेंगे,ओऽम् पढ़ने पर साँस टूट जायगी ।

‘मन्त्र’ का अर्थ, प्रयोग और उसके फल

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Shri Vinay Jha. “ॐ का सही उच्चारण कैसे होता है?”. युगसंवाद, 1 सितम्बर 2021. https://yugsamvad.com/articles/kaa-sahee-uchchaarana-kaise-hotaa-hai

Shri Vinay Jha

आचार्य श्री विनय झा एक योगी, वेद-वेदांगादि शास्त्रों के ज्ञाता, सूर्यसिद्धान्तीय वैदिक ज्योतिष के विद्वान, सॉफ्टवेयर डेवलपर, भाषाविद्, मौसम वैज्ञानिक, प्रतिष्ठित पंचांगकार एवं इतिहास, संस्कृति, धर्म, अध्यात्म से लेकर अर्थशास्त्र, जीवविज्ञान, राजनीति आदि अनेक विषयों के गहन जानकार एवं प्रबुद्ध विचारक हैं

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