Vedas

विषय

वेद

वेद भारतीय स्मृति-परंपरा का सबसे प्राचीन स्तर हैं। ऋग्वेद से अथर्ववेद तक, उनकी रचना, संरक्षण और व्याख्या से जुड़े लेख और शोध यहाँ संकलित हैं।

Best Articles

श्रेष्ठ आलेख

कन्यादान हो या वरदान! अब आप ही बताईये क्या बुराई है?
धर्म · संस्कृति

कन्यादान हो या वरदान! अब आप ही बताईये क्या बुराई है?

क्या कन्यादान सिर्फ खैरात है? क्यों होता है कन्यादान और क्या यह स्त्री का अपमान है? जानिए हिन्दू विवाह संस्कार में कन्यादान का सही अर्थ, उसका सांस्कृतिक और वैदिक महत्व। पढ़ें वरदान बनाम कन्यादान की सच्ची व्याख्या, ब्रह्म विवाह का रहस्य और उन कुतर्कों का उत्तर जो हिन्दू परम्पराओं को गलत साबित करते हैं।

अमित शर्मा · 22 सितम्बर 2021 · 5 मिनट

युधिष्ठिर का द्यूत - वैदिक रहस्यमयी अक्षविद्या
धर्म · संस्कृति

युधिष्ठिर का द्यूत - वैदिक रहस्यमयी अक्षविद्या

धर्मराज युधिष्ठिर को जुआरी कहना गलत है । धर्मराज युधिष्ठिर ने जीवन में कितनी बार द्यूत खेला?“व्यसनी” कहलाने के लिये कितनी बार खेलना पड़ता है? द्यूतविद्या को जुआ कहना भी गलत है । धर्मराज युधिष्ठिर को ऋषि से द्यूतविद्या क्यों सीखनी पड़ी?ऋषि के सिवा अन्य कोई शिक्षक क्यों नहीं मिला?शकु

1 सितम्बर 2021 · 1 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

ॐ का सही उच्चारण कैसे होता है?

अष्टाध्यायी (१⋅२⋅३४) का कथन है कि “जप,न्यूङ्ख तथा साम के सिवा यज्ञकर्म में एकश्रुति का पाठ किया जा सकता है” । किसी भी वेदमन्त्र में जब दीर्घ “ॐ” (वा ह्रस्व “उ” अथवा “ओ”) को जोड़ना पड़े तो उस “ॐ” को “न्यूङ्ख” कहते हैं । एकश्रुति का अर्थ है सारे स्वरों को एक ही स्वर मानकर पाठ करना ।

1 सितम्बर 2021 · 2 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

मेधा, कौतूहल, जिज्ञासा का अर्थ और झुण्ड प्रवृत्ति

मेधा और झुण्ड “जो धर्म की रक्षा करता है,धर्म उसकी रक्षा करता है ।” धर्म का अर्थ है वैदिक यज्ञ,अर्थात् वैदिक कर्म का काण्ड । धर्म के दस लक्षण हैं — धृति क्षमा दम अस्तेय शौच इन्द्रियनिग्रह धी विद्या सत्य अक्रोध । किन्तु ये सब तो केवल लक्षण हैं जिनके आधार पर हम पहचान सकते हैं कि अमु

1 सितम्बर 2021 · 8 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

युधिष्ठिर - सार्वभौम दिग्विजयी हिन्दूराष्ट्र निर्माता सम्राट

जैसा कि युधिष्ठिर जी आदि पर विवाद देखने को मिलता है तो हमें महाभारत में ही देखना चाहिए कि युधिष्ठिर आदि पाण्डव स्वयं से भी शक्तिशाली या धर्मपुंज थे अथवा नवयुगी दुष्प्रचार अनुसार मात्र श्रीकृष्ण की दया पर ही लंबित थे क्योंकि ऋषि बार बार उनको धर्मराज कह रहे तब उनका वचन मिथ्या नहीं

1 सितम्बर 2021 · 13 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

“श्रीसुरभ्यष्टोत्तरसहस्रनाममालिका” – आचार्य गङ्गाधर पाठक | डाउनलोड करें

श्रीसुरभ्यष्टोत्तरसहस्रनाममालिका लेखक:- पण्डित गङ्गाधर पाठक ‘वेदाद्याचार्य’ मुख्याचार्य- श्रीरामजन्मभूमिशिलापूजन, अयोध्या मार्गदर्शक:- श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्गम् , जयपुर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर का शिलान्यास करवाते मुख्य पुरोहि

26 जून 2021 · 1 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

"महर्षि वाल्मीकि परिचय" - आचार्य गङ्गाधर पाठक | डाउनलोड करें

'महर्षि वाल्मीकि परिचय' लेखक:- पण्डित गङ्गाधर पाठक ‘वेदाद्याचार्य’ मुख्याचार्य- श्रीरामजन्मभूमिशिलापूजन, अयोध्या मार्गदर्शक:- श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्गम् , जयपुर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर का शिलान्यास करवाते मुख्य पुरोहित आचार्य

25 जून 2021 · 1 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

आयुर्वेद – आयु का वेद – सम्पूर्ण रोगमुक्तपद्धति

लेखक:- आचार्य वासुदेव मिश्र वेद विज्ञाता यत्रौषधीः समम्मत राजानः समिताविव । विप्रः स उच्यते भिषग् रक्षोहामीवचातनः ॥ ऋग्वेदः १०-९७-६ ॥ राजा जिसप्रकार सङ्ग्राममें अपने सैनिकोंके साथ विराजते हैं, उसीप्रकार शल्यादि अष्टतन्त्रज्ञ नाडीविज्ञान विशारद जिस विद्वानपुरुष नाना प्रकारके औषधीग

11 जून 2021 · 15 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

"श्रीसुरभियागपद्धति" - आचार्य गंगाधर पाठक | डाउनलोड करें

'श्रीसुरभियागपद्धति:' लेखक:- पण्डित गङ्गाधर पाठक ‘वेदाद्याचार्य’ मुख्याचार्य- श्रीरामजन्मभूमिशिलापूजन, अयोध्या मार्गदर्शक:- श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्गम् , जयपुर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर का शिलान्यास करवाते मुख्य पुरोहित आचार्य श्

8 जून 2021 · 1 मिनट का पाठ

ज्योतिष

महामारी जनित उपसर्गों का शास्त्रोक्त विवरण एवं शमन

॥ नमः प्रकृत्यै ।। लेखक:- पण्डित गङ्गाधर पाठक ‘वेदाद्याचार्य’ मुख्याचार्य- श्रीरामजन्मभूमिशिलापूजन, अयोध्या मार्गदर्शक:- श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्गम् , जयपुर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर का शिलान्यास करवाते मुख्य पुरोहित आचार्य श्री

2 जून 2021 · 13 मिनट का पाठ

ज्योतिष

सूर्यसिद्धान्त सार्वकालिक और सार्वभौमिक है

विक्रमादित्य के नवरत्न वराहमिहिर की पञ्चसिद्वान्तिका−१⁄३ १ में सूर्यसिद्धान्त को “सौर” सिद्धान्त की संज्ञा दी गयी तथा पञ्चसिद्वान्तिका−१⁄४ २ में इसे “सावित्र” सिद्धान्त कहा गया। अतः वराहमिहिर के अनुसार गायत्री मन्त्र के वैदिक देवता सविता ही सूर्यसिद्धान्त के प्रतिपादक हैं, तथा उन

29 मई 2021 · 5 मिनट का पाठ

ज्योतिष

राजस्थान का एकमात्र सूर्यसिद्धान्तीय श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग प्रकाशित

नम्र निवेदन - श्रीनिम्बार्क परिषद् सादर सूचित किया जा रहा है कि आराध्यदेव ठाकुर श्रीगोविन्ददेवजी एवं ठाकुर श्रीसरसबिहारीजी की असीम अनुकम्पा से प्राचीन गणित श्रीसूर्यसिद्धान्त पर आधारित राजस्थान का एकमात्र पञ्चाङ्ग श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग जयपुर से श्रीनिम्बार्क परिषद् के द

13 अप्रैल 2021 · 6 मिनट का पाठ

2050 तक हर  चार  में से एक व्यक्ति होगा सुनने की समस्या से ग्रस्त
संस्कृत · शास्त्र

2050 तक हर चार में से एक व्यक्ति होगा सुनने की समस्या से ग्रस्त

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि 2050 तक विश्व की जनसँख्या में चार में से एक व्यक्ति सुनवाई की समस्याओं से पीड़ित होगा। सुनंने की क्षमता पर पहली वैश्विक रिपोर्ट में कहा गया है कि कई समस्याओं का कारण - जैसे संक्रमण, रोग, जन्म दोष, शोर और जीवन शैली में नकारात्म परिवर्तन के

4 मार्च 2021 · 2 मिनट का पाठ

श्रीराम का वनगमन और वेदज्ञ ब्राह्मणों की प्रार्थना
धर्म · संस्कृति

श्रीराम का वनगमन और वेदज्ञ ब्राह्मणों की प्रार्थना

जब भगवान श्रीराम वनगमन कर रहे थे तो उनके पीछे नगर के सब लोग चलने लगे। उन लोगों में तीन प्रकार के ब्राह्मण थे। कोई वयोवृद्ध थे, कोई ज्ञानवृद्ध थे तो कोई तपोवृद्ध थे। वयोवृद्धों में कुछ तो इतने वृद्ध थे जिनकी गर्दन पर उनके सिर काँप रहे थे। वे ब्राह्मण दूर से पुकार रहे थे- हे वेगवान

8 अगस्त 2020 · 3 मिनट का पाठ

व्यायाम नहीं योग और प्राणायाम हैं उत्कर्ष का रास्ता
संस्कृत · शास्त्र

व्यायाम नहीं योग और प्राणायाम हैं उत्कर्ष का रास्ता

“ क्या प्राणायाम और आसन के अलावा strength exercises जैसे push ups, squats इत्यादि करना चाहिये आज कल के युवाओं को शारीरिक शक्ति को maintain करने के लिए ?” उत्तर — strength exercises जैसे push ups और दण्ड−बैठक या भार उठाने वाले व्यायाम से दवाब बढ़ता है जिससे मांसपेशियों का बल तो बढ़त

23 दिसम्बर 2019 · 6 मिनट का पाठ

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की आसुरी सभ्यता की वास्तविकता
संस्कृत · शास्त्र

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की आसुरी सभ्यता की वास्तविकता

यूरोप के तथाकथित 'विद्वानों' ने मोहनजोदड़ो और हड़प्पा 'सभ्यता' को भारतीय सभ्यता की प्राचीनतम आधारशिला बताया और उसे वैदिक पशुपालक लोगों की तुलना में विकसित तथा पुरातन घोषित कर दिया, जिसे आजतक हमारे नीति-निर्धारक और तथाकथित बुद्धिजीवी स्वीकारते आ रहे हैं, खासकर वामपन्थी इतिहासकार। इत

18 अक्टूबर 2019 · 25 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

मूर्तिपूजा - सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण अंग

यह शत-प्रतिशत झूठा प्रचार है कि सनातन धर्म में मूर्तिपूजा नहीं थी। भारत की प्राचीनतम मूर्तियाँ जैनियों या बौद्धों की नहीं हैं। सबसे पहले यह प्रचार अंग्रेजों ने आरम्भ किया कि भारत में ग्रीक राजाओं ने मूर्तिपूजा आरम्भ की, और बाद में ब्रह्म-समाज के छद्म-ईसाईयों तथा आर्यसमाजियों जैसे

17 अक्टूबर 2019 · 6 मिनट का पाठ

'मन्त्र' का अर्थ, प्रयोग और उसके फल
धर्म · संस्कृति

'मन्त्र' का अर्थ, प्रयोग और उसके फल

मन्त्र :- मन के साधन को "मन्त्र" कहते हैं | अर्थात मन जो "संकल्प" ले उसे सत्य बनाने के साधन को मन्त्र कहते हैं | किसी भी वैदिक संहिता में "मन्त्र" नहीं होते | ऋग्वेद में ऋचाएं हैं जिनका प्रयोग यज्ञ में स्तुति हेतु होता है, सामवेद के साम का गान होता है, यजुर्वेद के यजुः से हवि दी

15 अक्टूबर 2019 · 8 मिनट का पाठ

श्रीमद्भागवत व अन्य पुराणों की ऐतिहासिकता और प्रामाणिकता
धर्म · संस्कृति

श्रीमद्भागवत व अन्य पुराणों की ऐतिहासिकता और प्रामाणिकता

कुछ भ्रमित व सांप्रदायिक द्वेषभाव वाले लोग पुराणों में शिरोमणि 'श्रीमद्भागवत' को महर्षि वेदव्यास रचित नहीं मानते और कहते हैं कि श्रीमद्भागवत को 13वीं शताब्दी में बोपदेव नामके एक पंडित ने लिखा था। हालाँकि ये कई जन्मों में भी इसका प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते। किन्तु व्यर्थ के शब्द

15 अक्टूबर 2019 · 4 मिनट का पाठ

The Science Behind Shraddh
संस्कृत · शास्त्र

The Science Behind Shraddh

Where does this soul go after death? Its description is found in detail in the Chandogya Upanishad of the Tandya Mahabrahman of Samaveda . There are three movements of the Jeeva described there, out of which we will talk about the movement towards the chandraloka (चंद्रलोक) in wh

12 सितम्बर 2019 · 8 मिनट का पाठ

सर्फ एक्सेल का एड क्यों विभाजनकारी मानसिकता का प्रतीक है?
राजनीति · इतिहास

सर्फ एक्सेल का एड क्यों विभाजनकारी मानसिकता का प्रतीक है?

'सर्फ एक्सेल' का विज्ञापन आज चर्चा में है पर उस विज्ञापन के बीच एक गंभीर विषय भी है जिसपर मानवीय संवेदना को समझने और गढ़ने वाले लोग चिंतित नहीं होते और इनका चिंतित न होना ही भारत में अलगाववाद, विखंडन और इनके जैसी दूसरी मानसिकताओं का पोषण करती है। दिनांक 27 फरवरी 2018 को सर्फ एक्स

10 मार्च 2019 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू विवाह को घृणित बोलने वाले DMK नेता स्टालिन ये नहीं समझ पाएंगे

चेन्नई, पांच फरवरी, सोशल मीडिया पर डीएमके नेता स्टालिन का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें वह विवाह के वैदिक अनुष्ठानों की आलोचना कर रहे हैं। स्टालिन के इस विडियो में हिन्दू रीति-रिवाजों और खास तौर पर वेद का पाठ करने वाले ब्राह्मणों का अपमान किया है। सोशल मीडिया पर पिछले सप्त

3 फ़रवरी 2019 · 6 मिनट का पाठ

स्वामी विवेकानन्द - जिनसे दुनिया भारत को पहचानती है
धर्म · संस्कृति

स्वामी विवेकानन्द - जिनसे दुनिया भारत को पहचानती है

आधुनिक समय में अगर किसी संत ने भारत के जनजीवन, विशेषकर युवा वर्ग पर सर्वाधिक प्रभाव डाला तो वे हैं स्वामी विवेकानन्द। शंकराचार्य के वेदान्त दर्शन को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में नव्य वेदांत के रूप में प्रस्तुत करने वाले स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में पाश्चात्य

12 जनवरी 2019 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

मदालसा की कहानी सिद्ध करती है हिन्दू संस्कृति में माँ का सर्वोच्च स्थान

माता गुरूतरो भूमेः महाभारत में जब यक्ष धर्मराज युधिष्ठिर से सवाल करते हैं कि 'भूमि से भारी कौन?' तब युधिष्ठर जवाब देते हैं, 'माता गुरूतरा भूमेः युधिष्ठिर द्वारा माँ के इस विशिष्टता को प्रतिपादित करना यूं ही नहीं है आप अगर वेद पढ़ेंगें तो वेद माँ की महिमा बताते हुए कहती है कि माँ क

2 अगस्त 2018 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

दतिया के स्वामीजी, जिनके यज्ञ से युद्ध से पीछे हट गया था चीन

भद्रं इच्छन्तः ऋषयः स्वर्विदः, तपो दीक्षां उपसेदु: अग्रे ! ततो राष्ट्रं बलं ओजश्च जातम्, तदस्मै देवा उपसं नमन्तु !! अर्थववेद के इस मन्त्र में कहा गया है, दतिया " आत्मज्ञानी ऋषियों ने जगत का कल्याण करने की इच्छा से सृष्टि के प्रारंभ में जो दीक्षा लेकर तप किया, उससे राष्ट्र निर्माण

20 जुलाई 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

सनातन धर्म के शैव सम्प्रदाय

" लयनात इति लिंगमुच्यते " जिसमे सर्व सृष्टि लय हो जाये वही लिंग है अर्थात सकल जगत लय होजाने के बाद शेष बचे वह अर्थात ब्रह्मपदार्थ। सकल शैव जगत मे परमात्मा शंकर की लिंग रूप मे उपासना की जाती है। पहले ये जाने की शैव होते क्या हैं मोटे मोटे शब्दो में, शैव मंजे शिव को ही पूर्ण परमात्

19 जुलाई 2018 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म के सम्प्रदाय व उनके प्रमुख 'मठ' और 'आचार्य'

हिन्दू धर्म में वेदान्त विचार के आधार पर पांच प्रमुख वैदिक-सम्प्रदाय हैं। 1) श्रीमदाद्य शंकराचार्य के " अद्वैत " मत पर आधारित " शांकर-सम्प्रदाय "। 2) श्रीमद् रामानुजाचार्य के " विशिष्टाद्वैत " मत पर आधारित " श्रीसम्प्रदाय "। श्रीसम्प्रदाय में ही श्रीमद् रामानंदाचार्य हुए व श्रीसम

11 जुलाई 2018 · 7 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

पहली और अंतिम बार जब एक मंच पर इकट्ठे हुए महानतम वैज्ञानिक

संयोग: जिसकी पुनरावृति कभी न हो पाई - कोई भी तस्वीर इंटरनेट पर एक बार आ जाने के बाद ‘rare photo’ नहीं कही जा सकती. Solvay Conference (सन 1927) की यह तस्वीर (दिए गए चित्र में ) भी उपरोक्त सन्दर्भ में दुर्लभ नहीं है, परंतु एक तथ्य ऐसा है जो इस तस्वीर को दुर्लभ से भी दुर्लभ बनाता है

1 जुलाई 2018 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

सोमरस के बारे में वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

प्राच्य संस्कृतियों के अधिकतर विरोधियों की मान्यता रही है कि वैदिक ऋषि जो सोमरस पीते थे वह शराब थी। बच्चन के बाउजी बड़के बच्चन साहब ने तो पूरी कविता ही झोंक रखी है इसी कुत्सित सोच के आस पास। सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला, द्रोणकलश जिसको कहते थे, आज वही मधुघट आला, वेदिव

2 फ़रवरी 2018 · 7 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

स्वामी श्रद्धानंद आज और भी प्रासंगिक हैं

वैदिक धर्म, वैदिक संस्कृति, और आर्य जाति की रक्षा के लिए, मरणासन्न अवस्था से उसे पुनः प्राणवान एवं गतिवान बनाने के लिए और उसे सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाने के लिये आर्य समाज ने सैंकड़ों बलिदान दिए हैं । और उसमें प्रथम पंक्ति के प्रथम पुष्प हैं स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती । जिनका 23 दिस

23 दिसम्बर 2017 · 11 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

अद्भुत है गंगा जी में अस्थि विसर्जन की दिव्य परंपरा!

बात 1999 की है मुझसे बड़े भईया को खुनी पाईल्स हुए। और हर स्तर का इलाज कराते हुए इस पाइल्स ने Hemorrhoids(गुदचीर) का रूप ले लिया। इसमें गुदा छिल जाती है। कल्पना जी जा सकती है ये कितनी कष्ट कर बीमारी है। दिल्ली के यूनानी तिब्बिया कॉलेज में गुदा सम्बन्धी तमाम बीमारियों का सॉलिड इलाज

21 दिसम्बर 2017 · 5 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

महर्षि वेदव्यास कौन हैं? आइये जानें

पुराणों की गाथा, भाग-2 हिन्दूओं में एक बहुत बड़ा दुष्प्रचार फैलाया गया है कि वेदव्यास कृत पुराण नवीन ग्रन्थ हैं। पुराण नाम से स्पष्ट है कि इसका सम्बन्ध पुराना से है। किसी संस्कृति को खत्म करने के लिए उसके इतिहास को मिटाना पुरानी परम्परा रही है, पुराणों का अपमान करना उसी रीति का अन

20 दिसम्बर 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

अनुपम मिश्र - तालाब, कुँओं और बावड़ियों के पिता

अनुपम मिश्र - तालाब, कुँओं और बावड़ियों के पिता अपनी नाभि में छिपी कस्तूरी को पाने के लिए हिरण इधर से उधर भागता रहता है. पर कभी उसे संतोष नहीं मिलता. ऐसे ही इंसान विकास के पीछे भागता रहता है. पर उसकी महत्वाकांक्षा पूरी नहीं होती. इस दौड़भाग में इंसान ने जिस नाभि में विकास छिपा था उ

19 दिसम्बर 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

एड्स के आंकड़े एवं भयदोहन का व्यापार

ये उस समय की बात है जब खाना घर में और पाखाना खेत में हुआ करता था, शीला की जवानी और मुन्नी की बदनामी तो दूर की बात दोनों अभी पैदा भी नहीं हुई थीं। ऐसे समय में ही एक दिन दो भाई बब्बन और दद्दन सायकिल पर हरड़ की बोरी लेकर बेचने निकले। पूरा दिन बीत गया एक पसेरी हरड़ भी नहीं बिका। रात हो

2 दिसम्बर 2017 · 8 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

वेदमूर्ति पण्डित श्रीपाद दामोदर सातवलेकर का पुण्य स्मरण

वेदविद्या का अनुशीलन करने के पक्षपाती लोगों में पण्डितजी का नाम ही पर्याप्त परिचय है। वैदिक साहित्य और संस्कृत को जनसामान्य की पहुंच में लाने का ऐसा महनीय कार्य उन्होंने किया था। जैसा करने की इच्छा कभी दयानन्द स्वामी ने की थी। स्वामी दयानन्द ने हिन्दी को वेदभाष्य की भाषा बनाकर वे

19 सितम्बर 2017 · 4 मिनट का पाठ

ज्योतिष

दक्षिणा देने से ही क्यों मिलता है धार्मिक कर्मों का फल.

यजुर्वेद में एक बहुत सुंदर मन्त्र(१) है, वह कहता है ब्रह्मचर्य आदि व्रतों से ही दीक्षा प्राप्त होती है अर्थात् ब्रह्मविद्या या किसी अन्य विद्या में प्रवेश मिलता है। फिर दीक्षा से दक्षिणा अर्थात् धन समृद्धि आदि प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। यहाँ दक्षिणा मिलने का अर्थ है दक्षिणा देना,

18 सितम्बर 2017 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्या ऋग्वेद का पुरुष सूक्त शूद्रों का अपमान करता है?

पुरुष सूक्त वेद सनातन संस्कृति का वह मानसरोवर है जिसके अवगाहन से हमारे पूर्वजों ने श्रेष्ठ से श्रेष्ठ मणिरत्नों का आहरण किया है। वेद सारी मानवजाति का हित साधने के लिए ही धरा पर प्रवृत्त हुए हैं। यदि धर्म के मूलभूत इन वेद, उपनिषद, स्मृति, पुराणों को ही निकालकर भारत को देखा जाएगा त

10 अगस्त 2017 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

कौनसे आठ प्रकार के होते हैं ब्राह्मण ?

यूं तो ब्राह्मणों का वर्णन अनेक ग्रन्थों में मिलता है पर सबसे उत्तम तो वेद और स्मृतियों में ही मिलता है। ब्राह्मण होने का अधिकार सभी को है चाहे वह किसी भी जाति, प्रांत या संप्रदाय से हो। लेकिन ब्राह्मण होने के लिए कुछ नियमों का पालन करना होता है। उन्हीं नियमों के पालन से आठ ब्राह

9 अगस्त 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार कौन होता है ब्राह्मण ?

सामान्य तौर पर हम जाति के आधार पर ही किसी को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र मानते हैं परन्तु हिन्दू धर्मग्रन्थों के अनुसार किसी के जन्म से अधिक महत्व उसके कर्मों का है। कर्मों के आधार पर ही उसे वास्तविक रूप में ब्राह्मण या अन्य कुछ कहा जा सकता है। यहाँ हम देखेंगे कि हिन्दू शा

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

कोर्ट के भी पहले से हिन्दू क्यों मानते हैं गंगा - यमुना को जीवित

कुछ महीने पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी थीऔर गंगा -यमुना को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का फैसला किया था। इस फैसले के बाद भारत की दोनों महत्वपूर्ण नदियों गंगा और यमुना को संविधान की ओर से नागरिकों को मुहैया कराए गए सभी अधिक

30 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आधुनिक विज्ञान से भी सिद्ध है पितर श्राद्ध की वैज्ञानिकता

मरने के बाद यह मृतात्मा कहाँ जाती है? इसका विवरण सामवेद के ताण्ड्यमहाब्राह्मण के छान्दोग्य उपनिषद में विस्तार से मिलता है। वहाँ जीव की तीन गति बताई गईं हैं जिसमें से हम चन्द्रलोक गति की बात करेंगे जिसमें पितर का श्राद्ध आवश्यक होता है। हमारे सरे पूर्वज पितर कहलाते हैं। यह सामान्य

23 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

श्री राम का सत्य सर्वप्रिय धर्म स्वरूप..

यदि वेदव्यास, आद्य शंकराचार्य, स्वामी दयानन्द आदि वेदज्ञ ऋषि ज्ञान की किसी परोक्ष संस्कृति के किनारे हैं, यदि भगवान श्रीकृष्णचन्द्र अथाह प्रेम और गहन आध्यात्म की किसी अपूर्व धवल जाह्नवी के तट पर हैं, तो श्री राम धर्म, कर्म और करुणा की त्रिवेणी के हृदयंगम प्रयाग-संगम पर खेल रहे है

13 जुलाई 2017 · 8 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

भगवान वेदव्यास की वेदना...

"मैं दोनों हाथ उठाकर पुकार पुकार कर कह रहा हूँ परन्तु मेरी बात कोई नहीं सुनता। धर्म पालन के मार्ग पर मोक्ष तो मिलता ही है, अर्थ और काम भी सिद्ध होते हैं, फिर भी लोग उसका सेवन क्यों नहीं करते?" - महर्षि वेदव्यास, महाभारत, स्वर्गारोहण पर्व, 5/62 ऋग्, यजु, साम और अथर्ववेद के रूप में

13 जुलाई 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म में क्यों महत्वपूर्ण हैं पुराण?

पुराणों की गाथा, भाग-1 फूलपत्तियों और फलों से लदी हुई बहुत सी टहनियों वाला हिन्दू धर्म का वटवृक्ष वेदों की गहराई तक फैली जड़ों पर टिका हुआ है, पर उसका तना क्या है? उसका तना है पुराण। अगर हिन्दू धर्म को एक बहुमंजिला भव्य इमारत कहा जाए तो वेद उसकी नींव कहा जाएगा और 'पुराण' उसके खम्भ

5 जुलाई 2017 · 4 मिनट का पाठ