संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू विवाह को घृणित बोलने वाले DMK नेता स्टालिन ये नहीं समझ पाएंगे

Dr Madhusudan Upadhyay · 3 फ़रवरी 2019 · 6 मिनट का पठन

चेन्नई, पांच फरवरी, सोशल मीडिया पर डीएमके नेता स्टालिन का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें वह विवाह के वैदिक अनुष्ठानों की आलोचना कर रहे हैं। स्टालिन के इस विडियो में हिन्दू रीति-रिवाजों और खास तौर पर वेद का पाठ करने वाले ब्राह्मणों का अपमान किया है। सोशल मीडिया पर पिछले सप्ताह दिखे 1.28 मिनट के वीडियो में स्टालिन ने ‘वैदिका’ की आलोचना की। वैदिका के तहत ब्राह्मण पुरोहित हिन्दू विवाह संपन्न कराते हैं। वीडियो में स्टालिन कहते दिख रहे हैं, ‘‘यज्ञ (हवन) से निकलने वाले धुएं से न सिर्फ दुलहन और दूल्हा, बल्कि समारोह को देख रहे आस-पास में मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू छलक पड़ते हैं और गम का माहौल बन जाता है। ‘संस्कृत के श्लोकों को पुरोहित समेत कोई भी नहीं समझ सकता है और इसका ‘निहितार्थ’ ‘घृणित’ है।’’ स्टालिन ने कहा कि, "दूल्हा और दुलहन आराम से कुर्सी पर नहीं बैठ सकते और उन्हें जमीन पर बैठना पड़ता है।" वीडियो क्लिप को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का आक्रोश दिखा। देखिए स्टालिन का यह विडियो,

Stalin mocks Hindu wedding rituals
What a shame !!!! pic.twitter.com/hNMjU0hOTV

— Girish S ⛳⛳⛳🔥🔥 (@girishs2) February 2, 2019

इसी तरह हिन्दू विवाह पद्धति पर आपत्तिजनक बातें वामपंथी करते रहे हैं| पिछले साल एक वामपंथी वेब पोर्टल 'The Quint' की लेखिका ने भारतीय विवाह पद्धति के बारे में कहा था कि हिन्दू विवाह पितृसत्तात्मक और सेक्सिस्ट है। अपने कथन के समर्थन में वह पांच क्षेत्रीय परम्पराओं के बारे में बात करती हैं। आइये हिन्दू विवाह पर स्टालिन और इस लेखिका जैसे वामपंथियों की घटिया बातों का थोड़ा पोस्टमार्टम करें. लेखिका ने कहा था कि,

1) कन्यादान उनकी सेक्सिस्ट वाली लिस्ट में पहले पायदान पर है। वह कहती हैं कि हिन्दू अपनी बेटियों का दान कर देते हैं जैसे कि वह कोई दाल चावल या परोपकार का सामान हो और संभवतः यही कारण है कि कन्यादान से संबंधित सभी स्त्री गीतों में इतना सघन दुख व्याप्त है कि बिना रोए आप नहीं रह सकते।

2) दूसरे नम्बर पर उन्होंने कुछ दक्षिण भारतीय परिवारों में निभाए जाने वाले उस रिवाज पर कटाक्ष किया है जिसमें विवाह के बीच ही वर हठ करता है कि वह विद्या के लिए काशी जाना चाहता है और गृहस्थ धर्म के झंझटों में नहीं पड़ना चाहता। बाद इसके वधू के पिता वर को विवाह के लिए मनाते हैं।

3) तीसरे कटाक्ष के लिए उन्होंने हल्दी को चुना है। वह लिखती हैं कि वर को लगा हुआ हल्दी दुबारा वधू को लगाया जाए इसमें पर्सनल हाईजीन का कितना बड़ा खतरा है। यक्क! किसी स्त्री के लिए यह कितना शर्मनाक है। छीः, यक्क!

4) चौथा तीर भारतीय स्त्रियों की उस सोच पर है जिसमें वह पति को परमेश्वर मानती हैं और उसके पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। और तो और विवाह के समय वधू पक्ष के लोग वर के चरण पखारते हैं। इससे घृणित कर्म क्या होगा। छीः, यक्क, भक्क! क्या वधू आशीर्वाद नहीं दे सकती या वर को आशीर्वाद की आवश्यकता नहीं है।

5) पांचवा तीर विदाई पर दे मारा है। कि लड़की जब विदा होती है तो मुट्ठी भर चावल अपने माता पिता पर फेंकती है कि आप ऋण से उऋण हुए। और बेटियां पराया धन क्यों हैं?

बाद इसके वह नौजवानों से आग्रह करती हैं कि इन रस्मों, संस्कारों पर दुखी होने की बजाए गुस्सा दिखाइए और बदल डालिए इन सेक्सिस्ट मान्यताओं को जो कि औरत मर्द में फर्क करते हैं।

अब एक चीज स्पष्ट है कि विद्वान लेखिका साम्यवादी महिलावादी उस धारा से हैं जो भारत-विरोध में ही अपना भविष्य देखता है।अस्तु, एक चीज बताए जाने की आवश्यकता है कि हम सनातन धर्मावलम्बियों में यह परम्पराएं सार्वभौम नहीं हैं और दूसरी बात कि इन प्रतीकात्मक क्रियाओं पर इतिहास, देशकाल, भूगोल, शासन-सत्ता का प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष प्रभाव भी है। हर एक प्रतीकात्मक क्रिया अने आप में एक खंडकाव्य है जिस पर घंटों तक बोला या लिखा जाए फिर भी कम है। हम सनातन धर्मावलम्बियों में अधिकार और कर्तव्य का जो महीन संतुलन बुना हुआ है वह दुनिया के लिए उदाहरण है।

आक्षेप का प्रतिउत्तर देना अनावश्यक और हास्यास्पद होगा। फिर भी अगर गंभीरता से विचार करें तो हम पाएंगे कि अगर यह संस्कार और मर्यादाएं न हों तब शीघ्र ही स्त्री केवल भोग्या, वस्तु या मादा मानव या यूटिलिटी के रूप में म्लेच्छों के हस्तगत हो जाएगी। समय रहते इस तरह के  षड्यंत्रों से बचने की आवश्यकता है।

वैदिक विवाह मन्त्रों की अनर्गल निंदा करने वाले अलगाववादी वामपंथी नेता स्टालिन और "द क्विंट - The Quint" के कर्ता धर्ताओं के द्रष्टव्य, पांच आक्षेपों के प्रत्युत्तर में पांच वैदिक विवाह मन्त्र प्रस्तुत करते हैं..

1) इहेमाविन्द्र सं नुद चक्रवाकेव दम्पती . प्रजयौनौ स्वस्तकौ विस्वमायुर्व्यऽशनुताम् ॥

हे भगवान इंद्र ! आप इस नवविवाहित जोड़े को इस तरह साथ लाये जैसे चक्रवका पक्षियों की जोड़ी रहती है, वे वैवाहिक जीवन का आनंद लें, और ये संतान की प्राप्ति के साथ - साथ एक पूर्ण जीवन जिए।

2)धर्मेच अर्थेच कामेच इमां नातिचरामि. धर्मेच अर्थेच कामेच इमं नातिचरामि॥

मैं अपने कर्तव्य में, अपने धन संबंधी मामलो में, अपनी जरूरतों में, मैं हर बात पर जीवन साथी से सलाह लूंगा।

3) गृभ्णामि ते सुप्रजास्त्वाय हस्तं मया पत्या जरदष्टिर्यथासः. भगो अर्यमा सविता पुरन्धिर्मह्यांत्वादुःगार्हपत्याय देवाः ॥

मैं तुम्हारा हाथ पकडे रखूंगा ताकि हम योग्य बच्चों के माँ-बाप बन सके और हम कभी अलग न हो. मैं इंद्र, वरुण और सवितृ देवताओं से एक अच्छे गृहस्थ जीवन का आशीर्वाद मांगता हूं।

4)सखा सप्तपदा भव. सखायौ सप्तपदा बभूव. सख्यं ते गमेयम्. सख्यात् ते मायोषम्. सख्यान्मे मयोष्ठाः --

तुम मेरे साथ सात कदम चल चुके हो, अब हम मित्र बन गए हैं।

5)धैरहं पृथिवीत्वम् . रेतोऽहं रेतोभृत्त्वम् . मनोऽहमस्मि वाक्त्वम् . सामाहमस्मि ऋकृत्वम् . सा मां अनुव्रता भव

मैं आकाश हूँ और तुम पृथ्वी हो। मैं ऊर्जा देता हूँ और तुम ऊर्जा लो। मैं मन हूँ और तुम शब्द हो। मैं संगीत हूँ और तुम गीत हो। तुम और मैं एक दूसरे का पालन करें।

महाभारत' का एक प्रसंग अक्सर याद आता है। एक जगह महर्षि व्यास ने गांधारी को आशीर्वाद देते हुए कहा था - 'ईश्वर करे कि तुम सौ पुत्रों की माता बनो और अंत में तुम्हारा पति तुम्हारा एक सौ एकवा पुत्र हो जाय।' यह आशीष थोड़ा चौंकाता अवश्य है, लेकिन पति और पत्नी के रिश्ते की इससे बेहतर व्याख्या कुछ और नहीं हो सकती।

वामपंथी लोग जिस  मनुस्मृति को  दिन रात पानी पी पीकर गाली देते नहीं थकते जरा देखिए वहाँ-

शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्।
न शोचन्ति नु यत्रता वर्धते तद्धि सर्वदा ।।
(मनु स्मृति 3-57)

जिस कुल में बहू-बेटियां क्लेश भोगती हैं वह कुल शीघ्र नष्ट हो जाता है। किन्तु जहाँउन्हें किसी तरह का दुःख नहीं होता वह कुल सर्वदा बढ़ता ही रहता है।

डियर स्टालिन और 'द क्विंट', खुले हृदय और मस्तिष्क से सोचिए तो, यकीनंन आपकी आंखों में गुस्सा नहीं, कृतज्ञता के दो बूंद आंसू ही होंगे।

– डॉ. मधुसूदन उपाध्याय, लेखक भारतीय संस्कृति, इतिहास, कला, धर्म एवं आध्यात्म के गहन जानकार हैं।

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इस लेख को उद्धृत कीजिए

Dr Madhusudan Upadhyay. “हिन्दू विवाह को घृणित बोलने वाले DMK नेता स्टालिन ये नहीं समझ पाएंगे”. युगसंवाद, 3 फ़रवरी 2019. https://yugsamvad.com/articles/hindoo-vivaaha-ko-ghrinita-bolane-vaale-dmk-netaa-staalina

Dr Madhusudan Upadhyay

लेखक वरिष्ठ वैज्ञानिक व भारतीय संस्कृति, कला एवं धर्म के गहन जानकार हैं

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