लेखक

Dr Madhusudan Upadhyay

Dr Madhusudan Upadhyay

लेखक वरिष्ठ वैज्ञानिक व भारतीय संस्कृति, कला एवं धर्म के गहन जानकार हैं

लेख

श्रीकृष्णजन्मभूमि और अकबर की कुटिलता
संस्कृत · शास्त्र

श्रीकृष्णजन्मभूमि और अकबर की कुटिलता

बहुत कम लोगों को जानकारी है कि अकबर अपने राज्य में मंदिर तुड़वाता तो था किंतु मंदिर बनवाने की इजाजत नहीं देता था। संत तुलसीदासजी को भी हनुमान मंदिर बनाने की इजाजत नहीं मिली थी। जब तुलसीदासजी ने वाराणसी के महल की परिधि में हनुमान मंदिर बना लिया तो उसे भी तोड़े जाने के आदेश अकबर ने

8 अगस्त 2020 · 14 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू विवाह को घृणित बोलने वाले DMK नेता स्टालिन ये नहीं समझ पाएंगे

चेन्नई, पांच फरवरी, सोशल मीडिया पर डीएमके नेता स्टालिन का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें वह विवाह के वैदिक अनुष्ठानों की आलोचना कर रहे हैं। स्टालिन के इस विडियो में हिन्दू रीति-रिवाजों और खास तौर पर वेद का पाठ करने वाले ब्राह्मणों का अपमान किया है। सोशल मीडिया पर पिछले सप्त

3 फ़रवरी 2019 · 6 मिनट का पाठ

भारत रत्न प्रणब मुखर्जी: एक शानदार प्रधानमंत्री जो मिल न सका
राजनीति · इतिहास

भारत रत्न प्रणब मुखर्जी: एक शानदार प्रधानमंत्री जो मिल न सका

दीनदयाल उपाध्याय, माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट की श्रेणी में रखे जाने के लिए आवश्यक नहीं कि आपकी हत्या ही की जाए बल्कि आपको राष्ट्रपति भी बनाया जा सकता है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उनकी जिन्हें पूरा देश दादा कहता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 'पोल्टू दा' एक बेहतरीन

25 जनवरी 2019 · 4 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

तुलसीदास द्वारा कबीर की फ़ज़ीहत

लोक में कबीर और तुलसीदास के सत्संग (एनकाउंटर) की अनेक कथाऐं व्याप्त हैं वामदृष्टि मसिजीवी चाहे जो भी कहें। मसलन, एक कथा सबने सुनी है कि भूजा भूजने वाली भरभूज से कबीर भूजा मांगते हैं कि ‘ऐ मेरे बाप की मेहर’ भूजा दे और स्त्री उनको चइला ले के दौड़ा लेती है दूसरी तरफ तुलसीदास कहते हैं

9 जुलाई 2018 · 4 मिनट का पाठ

समाचार · मीडिया

पूरी दुनियां चेलों से पट गई..

पूरी दुनियां चेलों से पट गई। जिधर नजर दौड़़ाओ चेले ही चेले। श्यान मैजेंटा विबग्योर हर रंग के चेले हां इन्फ्रा रेड और यू वी रंग के भी चेले। दर्जन के भाव चेले किलो के भाव लेले। कांग्रेस के, भाजप के, अम्बेडकर के, महामद के, जीसस के, गौतम बुद्ध के, मार्क्स के, ओशो के, स्टालिन के, गांधी

9 जुलाई 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

सोमरस के बारे में वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

प्राच्य संस्कृतियों के अधिकतर विरोधियों की मान्यता रही है कि वैदिक ऋषि जो सोमरस पीते थे वह शराब थी। बच्चन के बाउजी बड़के बच्चन साहब ने तो पूरी कविता ही झोंक रखी है इसी कुत्सित सोच के आस पास। सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला, द्रोणकलश जिसको कहते थे, आज वही मधुघट आला, वेदिव

2 फ़रवरी 2018 · 7 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

न्याय का असली देवता कौन? अंधी देवी या शनि देव?

अगर आप भाग्य या दुर्भाग्य से कभी भारतीय न्याय-नक्कारखानों में जिन्हें हम भ्रमवश कई बार न्याय के मंदिर कह देते हैं, गये हों, तो वहाँ बहुधा आपको आंखों पर पट्टी बांधे न्याय की देवी के दर्शन हुए होंगे। भाग्य से तब जबकि आप एक स्थापित वकील या जज हों और दुर्भाग्य तब जबकि आप परेशान मुवक्

2 फ़रवरी 2018 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्षमा कीजिएगा, आपका फिल्मी डांस कला नहीं काला है

आदरणीय शिव कुमार जी ने फिल्मों में बढ़ती अश्लीलता को लेकर कल उचित चिन्ता व्यक्त की है। एक और विधा की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है। टीवी पर तो विशेषकर रियलिटी डांस शोज की भरमार आ गई है। नंगा नाचने वाले ये लोग खुद को कलाकार कहते हैं और अपने देहसटाओ प्रतियोगिता को नृत्य। क्या dance

31 दिसम्बर 2017 · 5 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

आद्य शंकराचार्य का अद्भुत मंगलाचरण...

संस्कृत साहित्य में ग्रन्थ के प्रारम्भ में मंगलाचरण की सुदीर्घ परम्परा है। सभी उपनिषदों का अपना मंगलाचरण है। मंगलाचरण के बिना कोई कार्य प्रारंभ करें तो उसमें विघ्न पड़ने की आशंका रहती है। पुस्तक के ऊपर श्रीगणेशाय नमः लिखना भी मंगलाचरण ही है। परन्तु भाष्यकार भगवान शंकराचार्य के ब्र

18 दिसम्बर 2017 · 2 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

एड्स के आंकड़े एवं भयदोहन का व्यापार

ये उस समय की बात है जब खाना घर में और पाखाना खेत में हुआ करता था, शीला की जवानी और मुन्नी की बदनामी तो दूर की बात दोनों अभी पैदा भी नहीं हुई थीं। ऐसे समय में ही एक दिन दो भाई बब्बन और दद्दन सायकिल पर हरड़ की बोरी लेकर बेचने निकले। पूरा दिन बीत गया एक पसेरी हरड़ भी नहीं बिका। रात हो

2 दिसम्बर 2017 · 8 मिनट का पाठ

सौन्दर्य प्रतियोगिताओं के सामाजिक एवं आर्थिक निहितार्थ
राजनीति · इतिहास

सौन्दर्य प्रतियोगिताओं के सामाजिक एवं आर्थिक निहितार्थ

तो मानुषी छिल्लर को मिल गया सौन्दर्य ताज और आप लहालोट हो उछलने लगे। छिल्लर ने कह दिया कि मां को मातृत्व और उसकी ममता का मूल्य सैलरी में मिलना चाहिए और आपको यह बड़ी अच्छी बात लगी। कसम से आपकी क्यूटनेस को नमन रहेगा। अब जरा पिछले पंद्रह दिनों के घटनाओं पर नजर डालिए। मूडीस(टाम मूडी नह

22 नवम्बर 2017 · 8 मिनट का पाठ