Varna & Caste

विषय

वर्ण · जाति

वर्ण-व्यवस्था और जाति भारतीय सामाजिक इतिहास के सबसे विवादित विषयों में हैं — शास्त्रीय अवधारणा से लेकर आधुनिक जातिवाद तक। इस विषय पर विश्लेषण और बहस यहाँ संकलित है।

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श्रेष्ठ आलेख

संत रविदास और तत्कालीन समाज
धर्म · संस्कृति

संत रविदास और तत्कालीन समाज

संत रविदास निम्न लेख प्रतिज्ञ @RamaInExile द्वारा लिखित है । संत रविदास संत शिरोमणि वैष्णवाचार्य संत रविदास जी रामानंदी संप्रदाय के एक महान आचार्य थे। श्री आद्य गुरु रामानंदाचार्य द्वारा दीक्षित संत रविदास तथाकथित निम्न जाति से थे। उनसे संबंधित साहित्यिक इतिहास और उनके स्वयं रचित

प्रतिज्ञ · 3 सितम्बर 2021 · 8 मिनट

राजनीति · इतिहास

करपात्ररत्नसमुच्चय एवं ट्रैड-वाद | 'कुतर्ककूटनाशक' सहित

ट्रैड निम्न लेख प्रतिज्ञ @RamaInExile द्वारा लिखित है । ट्रैड मेरे साथ विगत कुछ महीनों में जो घटनाएं हुई उसने मुझे झकझोर कर रख दिया। घटनाओं में घटकों के वास्तविक रूप से मैं अनभिज्ञ था। मेढक के बच्चे के भांति मेरा भी लौकिक दृष्टिकोण कायान्तरित होने लगा। ट्रैड वाद के नाम पर धर्म के

31 अगस्त 2021 · 63 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

श्रीरामभक्ता शबरी का जातिनिर्णय - आचार्य गङ्गाधर पाठक | डाउनलोड करें

'श्रीरामभक्ता शबरी भीलनी नहीं ब्राह्मणी थी' लेखक:- पण्डित गङ्गाधर पाठक ‘वेदाद्याचार्य’ मुख्याचार्य- श्रीरामजन्मभूमिशिलापूजन, अयोध्या मार्गदर्शक:- श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्गम् , जयपुर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर का शिलान्यास करवाते म

31 जुलाई 2021 · 1 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

हिन्दू संगठन व जातिवाद पर सावरकर और गोलवलकर

जाति और हिन्दू संगठन पर दोनों वाक्यों को ध्यान से पढिये और अंतर समझिए। 1. "जब तक हिन्दू में जातिभाव समाप्त नहीं होता, हिन्दू संगठन और हिन्दू जागरण असम्भव है।" - वीर सावरकर 2. "यदि हिन्दू जागृत हो गया तो वह स्वतः संगठित हो जाएगा और जातिभेद की चुनौती को बहुत अच्छे से प्रत्युत्तर दे

11 जुलाई 2021 · 1 मिनट का पाठ

श्रीराम का वनगमन और वेदज्ञ ब्राह्मणों की प्रार्थना
धर्म · संस्कृति

श्रीराम का वनगमन और वेदज्ञ ब्राह्मणों की प्रार्थना

जब भगवान श्रीराम वनगमन कर रहे थे तो उनके पीछे नगर के सब लोग चलने लगे। उन लोगों में तीन प्रकार के ब्राह्मण थे। कोई वयोवृद्ध थे, कोई ज्ञानवृद्ध थे तो कोई तपोवृद्ध थे। वयोवृद्धों में कुछ तो इतने वृद्ध थे जिनकी गर्दन पर उनके सिर काँप रहे थे। वे ब्राह्मण दूर से पुकार रहे थे- हे वेगवान

8 अगस्त 2020 · 3 मिनट का पाठ

How Brahmins welcomed Alexander
राजनीति · इतिहास

How Brahmins welcomed Alexander

Brahmins of Malav Republic: When the republics of Malvas and Kshudrakas made a confederacy to face Alexander, 5000 Brahmins from Malav republic left the pen for sword and died fighting. Only a few were captured. Brahmins of Musicanus (Mushika) and Oxycanus: When the two kings Mus

3 जुलाई 2020 · 3 मिनट का पाठ

'मन्त्र' का अर्थ, प्रयोग और उसके फल
धर्म · संस्कृति

'मन्त्र' का अर्थ, प्रयोग और उसके फल

मन्त्र :- मन के साधन को "मन्त्र" कहते हैं | अर्थात मन जो "संकल्प" ले उसे सत्य बनाने के साधन को मन्त्र कहते हैं | किसी भी वैदिक संहिता में "मन्त्र" नहीं होते | ऋग्वेद में ऋचाएं हैं जिनका प्रयोग यज्ञ में स्तुति हेतु होता है, सामवेद के साम का गान होता है, यजुर्वेद के यजुः से हवि दी

15 अक्टूबर 2019 · 8 मिनट का पाठ

The Science Behind Shraddh
संस्कृत · शास्त्र

The Science Behind Shraddh

Where does this soul go after death? Its description is found in detail in the Chandogya Upanishad of the Tandya Mahabrahman of Samaveda . There are three movements of the Jeeva described there, out of which we will talk about the movement towards the chandraloka (चंद्रलोक) in wh

12 सितम्बर 2019 · 8 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू विवाह को घृणित बोलने वाले DMK नेता स्टालिन ये नहीं समझ पाएंगे

चेन्नई, पांच फरवरी, सोशल मीडिया पर डीएमके नेता स्टालिन का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें वह विवाह के वैदिक अनुष्ठानों की आलोचना कर रहे हैं। स्टालिन के इस विडियो में हिन्दू रीति-रिवाजों और खास तौर पर वेद का पाठ करने वाले ब्राह्मणों का अपमान किया है। सोशल मीडिया पर पिछले सप्त

3 फ़रवरी 2019 · 6 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

जाति व्यवस्था का प्राचीन आधार और विशिष्टता

हम संसार में जहाँ भी देखते हैं प्रकृति प्रदत्त विभिन्नता, वैशिष्ट्य, अधिकार अनधिकार भेद और उनका सामंजस्य सहज ही दिखाई देता है। सभी पशु, पक्षी, वृक्ष, पाषाण-धातु आदि जड़ चेतन वस्तुओं में भी भिन्नता की एक वैशिष्ट्य जनित श्रृंखला दिखाई देती है। प्रकृति की यह वैशिष्ट्यपरिपूर्ण विभिन्न

11 दिसम्बर 2018 · 7 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

जातिवादी दलों के समर्थक गरीब और अशिक्षित ही क्यों होते हैं?

पिछले दिनों राजा भैया की लखनऊ में रैली हुई थी। इसलिए मेरे मन में विचार आया कि सोशल मीडिया के माध्यम से सर्वे किया जाए कि रैली में जो लोग शामिल हुए थे वह किस पृष्ठभूमि से आते हैं। कल से लेकर आज तक यानि दो दिनों के कठिन परिश्रम के बाद इसी फेसबुक पर सौ लोग मिले जो राजा भैया के लखनऊ

4 दिसम्बर 2018 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

Brahminism, and Brahminical Patriarchy

CEO of Twitter was recently found posing with a placard saying 'Smash Brahminical Patriarchy', which later generated the criticism from Hindus, and an apology will be the logical culmination of the entire episode, but how the CEO of Twitter posed with such a placard is the produc

23 नवम्बर 2018 · 3 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

धार्मिकता से इतर छठ का महत्त्व

जब चित्रकूट में श्रीराम भरत को राज-काज की शिक्षा दे रहे थे तो उन्होंनें उनसे पूछा था कि तुम्हारे राज्य में पुरोहित और ब्राह्मण सुख से तो हैं न? भरत को कौतूहल हुआ तो पूछ बैठे कि भैया ! आपने ब्राह्मणों का पूछा, ये तो मेरी समझ में आ गया पर आपने पुरोहितों का क्यों पूछा? तो इस पर राम

11 नवम्बर 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

ब्राह्मण और क्षत्रिय के बीच का अन्योन्याश्रय संबध

सोशल मीडिया पर एक गैंग तैयार हो गया है जो ब्राह्मण और राजपूतों के मध्य मतभेद तैयार कर रहा है।आज कई ग्रंथो से खोज-खबर करने के बाद उनकों उत्तर देना चाहूँगा। ऐसे तो खोज-खबर करने के बाद 25-30 श्लोक और कई प्रसंग मिले जो ब्राह्मण और क्षत्रिय का अन्योन्याश्रय संबध बताते हैं। लेकिन लेख क

2 जनवरी 2018 · 7 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

वर्ण क्या हैं? हिन्दू धर्म के चार वर्णों में श्रेष्ठ कौन है?

वर्ण क्या हैं? चार वर्णों में श्रेष्ठ कौन है? शूद्र वर्तमान समय मे शूद्र वर्ण खराब कपड़े पहनने वाले, गरीब लोग समझे जाते होंगे, तभी शूद्र वर्ण कहलाने में कई जातियों को समस्या होती है। आगे का मैं अपना मत दूँ, इससे पहले में एक बात स्पष्ट कर दूं, कल को मुझे कोई मेरा सही इतिहास बताकर य

21 दिसम्बर 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

दुष्ट राक्षसियों के प्रति कैसा था हनुमान जी का व्यवहार? हनुमान जी का फेमिनिज़्म!!

कुछ लोगों द्वारा यह कहा जाता है कि स्त्री कितनी भी दुष्ट हो उसका सम्मान करना ही चाहिए फिर चाहे वह वैश्या ही हो। इसके लिए वे हिन्दू ग्रन्थों से कुछ तर्क भी देते हैं। एक तर्क है कि हनुमान जी ने सुरसा और त्रिजटा जो कि राक्षसियाँ थीं उन्हें माता कहकर सम्मान दिया था फिर बॉलीवुड अभिनेत

25 नवम्बर 2017 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म में वैश्य समाज का महत्व और योगदान

पद्मावती फ़िल्म का सर्व हिन्दू समाज ने विरोध किया जो कि बहुत ही प्रसन्नता का विषय है। फ़िल्म के प्रखर विरोध के लिए श्री राजपूत करणी सेना व राजपूत संगठनों के साथ बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, अन्य हिन्दू संगठन अग्रवाल महासभा, ब्राह्मण महासभा, वैश्य महासभा व अन्य 36 कौम एक साथ आई हैं।

19 नवम्बर 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्या ऋग्वेद का पुरुष सूक्त शूद्रों का अपमान करता है?

पुरुष सूक्त वेद सनातन संस्कृति का वह मानसरोवर है जिसके अवगाहन से हमारे पूर्वजों ने श्रेष्ठ से श्रेष्ठ मणिरत्नों का आहरण किया है। वेद सारी मानवजाति का हित साधने के लिए ही धरा पर प्रवृत्त हुए हैं। यदि धर्म के मूलभूत इन वेद, उपनिषद, स्मृति, पुराणों को ही निकालकर भारत को देखा जाएगा त

10 अगस्त 2017 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

शूद्र कौन थे? क्या करते थे शूद्र?

शूद्र गाँव के बाहर रहकर गाँव की रक्षा करते थे। किसानों की ज़मीन पर काम, गाँव की सीमा बताना, व्यापारियों को एक जगह से दूसरी जगह जाते वक़्त सुरक्षा देना, खेत से होने वाली फसल और राज्य के खजाने की रक्षा करने वाला और उसे एक जगह से दूसरे जगह सुरक्षित ले जाना यह सब काम शूद्रों के थे। श

10 अगस्त 2017 · 10 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

कौनसे आठ प्रकार के होते हैं ब्राह्मण ?

यूं तो ब्राह्मणों का वर्णन अनेक ग्रन्थों में मिलता है पर सबसे उत्तम तो वेद और स्मृतियों में ही मिलता है। ब्राह्मण होने का अधिकार सभी को है चाहे वह किसी भी जाति, प्रांत या संप्रदाय से हो। लेकिन ब्राह्मण होने के लिए कुछ नियमों का पालन करना होता है। उन्हीं नियमों के पालन से आठ ब्राह

9 अगस्त 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार कौन होता है ब्राह्मण ?

सामान्य तौर पर हम जाति के आधार पर ही किसी को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र मानते हैं परन्तु हिन्दू धर्मग्रन्थों के अनुसार किसी के जन्म से अधिक महत्व उसके कर्मों का है। कर्मों के आधार पर ही उसे वास्तविक रूप में ब्राह्मण या अन्य कुछ कहा जा सकता है। यहाँ हम देखेंगे कि हिन्दू शा

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

क्या होता है गुरु, आचार्य, पण्डित और पुजारी का अर्थ?
संस्कृत · शास्त्र

क्या होता है गुरु, आचार्य, पण्डित और पुजारी का अर्थ?

हम सभी ब्राह्मणों को अक्सर पण्डित जी, गुरु जी, आचार्य जी, ब्राह्मण देवता आदि तरह तरह के नामों से संबोधित करते हैं। पर क्या आपने कभी इन नामों के पीछे जो अर्थ है उसको जानने की कोशिश की है? नहीं की होगी क्योंकि नाम में क्या रखा है यही सबकी सोच है। लेकिन मैंने एक छोटा सा प्रयास किया

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

Was Buddha Anti-Vedism?

Rebuttal to those Neo-Buddhists anti-Hindu tree huggers who say That the Buddha was anti-varna (caste) and Anti-Vedism-Anti Ritual “The Buddha said, ‘What the noble ones say is the truth, what the others say is not true. And why is this? The noble ones understand things as they a

9 अगस्त 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आधुनिक विज्ञान से भी सिद्ध है पितर श्राद्ध की वैज्ञानिकता

मरने के बाद यह मृतात्मा कहाँ जाती है? इसका विवरण सामवेद के ताण्ड्यमहाब्राह्मण के छान्दोग्य उपनिषद में विस्तार से मिलता है। वहाँ जीव की तीन गति बताई गईं हैं जिसमें से हम चन्द्रलोक गति की बात करेंगे जिसमें पितर का श्राद्ध आवश्यक होता है। हमारे सरे पूर्वज पितर कहलाते हैं। यह सामान्य

23 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

तीन सगे चाफेकर भाई जो देश के लिए फांसी पर चढ़ गये

उनका जन्म पेशवाओं की राजधानी रही पूना के पास चिंचवाड़ नामक गाँव में हरि विनायक चाफेकर और द्वारका चाफेकर के घर में एक चित्तपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जो मूलतः कोंकण के वेलानेश्वर से संबध रखता था। एक समय में यह परिवार धनाढ्य था पर परिस्थितयोंवश निर्धनता के भंवर में फंस गया था

17 जुलाई 2017 · 11 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

जब सूत जाति के रोमहर्षण और उग्रश्रवा ब्राह्मण बन गए

पुराणों की गाथा, भाग-3, जब सूत जाति के रोमहर्षण और उग्रश्रवा ब्राह्मण बन गए ब्रेकिंग इंडिया पावर्स को भारत को तोड़ने के लिए हिन्दू संस्कृति पर प्रहार करती हैं, आखिर हिन्दू संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है। उसी षड्यंत्र का हिस्सा है मध्यकाल में उपजे जातिवाद को प्राचीन सिद्ध करके तथाक

16 जुलाई 2017 · 6 मिनट का पाठ