संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म के सम्प्रदाय व उनके प्रमुख 'मठ' और 'आचार्य'

Mudit Agrawal · 11 जुलाई 2018 · 7 मिनट का पठन

हिन्दू धर्म में वेदान्त विचार के आधार पर पांच प्रमुख वैदिक-सम्प्रदाय हैं।

1) श्रीमदाद्य शंकराचार्य के "अद्वैत" मत पर आधारित "शांकर-सम्प्रदाय"।

2) श्रीमद् रामानुजाचार्य के "विशिष्टाद्वैत" मत पर आधारित "श्रीसम्प्रदाय"।

श्रीसम्प्रदाय में ही श्रीमद् रामानंदाचार्य हुए व श्रीसम्प्रदाय की एक शाखा "रामानंद-सम्प्रदाय" हुई।

3) श्रीमन्मध्वाचार्य के ''द्वैत'' मत पर आधारित "मध्व-सम्प्रदाय"।

इस सम्प्रदाय की एक शाखा "गौड़ीय-सम्प्रदाय" के रूप में उभरी।

4) श्रीमद्निम्बार्काचार्य के "द्वैताद्वैत" मत पर आधारित "निम्बार्क-सम्प्रदाय"।

5) श्री वल्लभाचार्य के "शुद्धाद्वैत" मत पर आधारित "वल्लभ-सम्प्रदाय"।

यह सनातन धर्म के पांच प्रमुख वैदिक-सम्प्रदाय हैं। इनमें से कई शाखा प्रशाखाएं भी निकलती हैं। इनमें से अंतिम चार वैष्णव-सम्प्रदाय हैं व प्रथम शांकर सम्प्रदाय में वैष्णव, शैव, शाक्त, गाणपत्य आदि सभी सम्मिलित हैं।

सनातन धर्म की विविध परंपरा है, इनमें रुद्र, ब्रह्म, शांकर, रामानुज श्रीवैष्णव, पुष्टिमार्ग, गौडीय-वैष्णव, निम्बार्क वैष्णव, रामानन्दी-वैष्णव, स्मार्त्त, हरिदास, तांत्रिक, सहजिया, सिद्धांत-शैव, काश्मीरी-शैव, कापालिक, नाथपन्थ, लकुलीश, सिद्ध, औघड़, वीरशैव, जंगम, लिङ्गायत्, तंत्रमार्गी, शाक्त, समयाचारी, जैन, त्रिक, कौलाचार, वामाचार, इत्यादि अनेकानेक मत संप्रदाय भारत धरा पर व्याप्त हैं। इनमें आपस में दार्शनिक और सैद्धांतिक धरातल पर बहुत भेद है। यहीं पर द्वैत, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, शुद्धाद्वैत, द्वैताद्वैत, शिवाद्वैत, शाक्ताद्वैत, योग, सांख्य, स्यादवाद, त्रैत आदि अनेक दर्शन परम्परा विद्यमान हैं।

यह तो हुआ सम्प्रदायों का अत्यधिक सामान्य परिचय। पर इस पोस्ट को लिखने का उद्देश्य है कि इन पांच प्रमुख सम्प्रदायों की वर्तमान प्रमुख पीठों/मठों व उनपर प्रतिष्ठित आचार्यों की एक सूचि बनाई जाए। ताकि सब सनातन धर्म के प्रामाणिक मौलिक शीर्ष धर्मगुरुओं से परिचित हो सकें। मठ परंपरा की सनातन धर्म की रक्षा में महती भूमिका रही है। इसलिए उसका ज्ञान हर हिन्दू होना चाहिए। सम्प्रदायों की निरंतर प्रवाहमान गुरु परंपरा का केंद्र पीठ कहलाता है, व जहाँ उस सम्प्रदाय में दीक्षित ब्रह्मचारी आदि छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं वह मठ कहलाता है। सम्प्रदायों के मूल आचार्यों द्वारा सम्प्रदाय(सम्यक रूप से प्रदान) की रक्षा व निरंतरता हेतु पीठ/ मठ स्थापित किए गए थे।  तो हम सम्प्रदायवार उनकी स्थिति जानते हैं।

शांकर सम्प्रदाय की प्रमुख पीठें और उनके आचार्य :-

शांकर सम्प्रदायकी चार प्रमुख पीठ हैं जिसपर प्रतिष्ठित आचार्य शंकराचार्य उपाधि विभूषित होते हैं। इसके अतिरिक्त श्रीकांचीकामकोटि पीठ भी बहुमान्य है।

1) पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धनपीठ, जगन्नाथपुरी

पुरी शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी 

2) दक्षिणाम्नाय श्रीशृंगेरी शारदापीठ, श्रृंगेरी

श्रृंगेरी शंकराचार्य श्री भारतीतीर्थ महास्वामी जी एवं श्री विधुशेखर भारती तीर्थ महास्वामी जी 

श्रृंगेरी शंकराचार्य श्री भारतीतीर्थ महास्वामी जी एवं श्री विधुशेखर भारती तीर्थ महास्वामी जी

3) पश्चिमाम्नाय श्रीद्वारिकापीठ, द्वारका

द्वारका शंकराचार्य स्वामी श्रीस्वरूपानंद सरस्वती जी

4) उत्तराम्नाय श्रीज्योतिर्मठ, जोशीमठ

ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी श्री वासुदेवानन्द सरस्वती जी 

शंकराचार्य स्वामी श्री वासुदेवानन्द सरस्वती जी

5) मूलाम्नाय श्रीकांची कामकोटिपीठ, कांची

श्रीकाँचीकामकोटि शंकराचार्य स्वामी श्री विजयेन्द्र सरस्वती जी

इसके साथ शांकर-सम्प्रदाय में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित 13 अखाड़े व उनके पीठाधीश्वर भी होते हैं। व अन्य अनेक मठ पीठ आदि मूलतः उपर्युक्त पांच पीठों व अखाड़ों से ही सम्बद्ध होकर चलते हैं। शांकर सम्प्रदाय का सबसे बड़ा अखाड़ा है पंचदशनाम श्रीजूना अखाड़ा।

6) श्री पंचदशनाम जूनाअखाड़ा, हरिद्वार

जूनापीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानन्दगिरि जी 

जूनापीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानन्दगिरि जी

रामानुज श्रीसम्प्रदाय की प्रमुख पीठें और उनके आचार्य :-

वानमामलै मठ, तिरुनेल्वेलि

श्री वानमामलै मधुरकवि श्रीरामानुज जीयर स्वामी

श्री वानमामलै मधुरकवि श्रीरामानुज जीयर स्वामी

श्रीयदुगिरि यतिराज मठ, मेलुकोटे

श्रीयदुगिरि यतिराज नारायण रामानुज जीयर स्वामी

श्रीयदुगिरि यतिराज नारायण रामानुज जीयर स्वामी

श्रीरंगनारायण श्रीवैष्णव जीर मठ, श्रीरंगम

श्रीरंगनारायण मुनि अय्यंगर जीयर (२०१८ में वैकुण्ठवास)

श्रीरंगनारायण मुनि अय्यंगर जीयर

कंडदै रामानुज मुनि अय्यंगर जीर मठ, श्रीरंगम

कंडदै नारायण रामानुजाचार्य मुनि जीयर

कंडदै नारायण रामानुजाचार्य मुनि जीयर

अहोबिलम्, तिरुपति

श्रीशतकोप श्रीरंगनाथ यतीन्द्र महादेसिकान

श्रीकौशलेश सदन, अयोध्या

रामानुजाचार्य विद्याभास्कर स्वामी श्री वासुदेवाचार्य जी महाराज

अशर्फी भवन, अयोध्या

रामानुजाचार्य स्वामी श्री श्रीधराचार्य जी महाराज

उपर्युक्त पीठें श्रीसम्प्रदाय की प्रमुख पीठें हैं, परन्तु इसके अतिरिक्त भी दक्षिण भारत में तिंगलै और वडगलै आदि उपशाखाओं के साथ श्रीसम्प्रदाय की मठ परंपरा विशेष रूप से बहुत विस्तृत है। जिसमें प्रमुख हैं देश विदेश में प्रख्यात श्रीचिन्ना जीयर स्वामीजी 

जीव रामानुज आश्रम, हैदराबाद

श्री त्रिदंडी चिन्ना श्रीमन्नारायण रामानुज जीयर स्वामी 

श्री त्रिदंडी चिन्ना श्रीमन्नारायण रामानुज जीयर स्वामी

श्रीसम्प्रदायान्तर्गत रामानंद श्रीसम्प्रदाय की प्रमुख पीठें और उनके आचार्य :-

श्री श्रीमठ, पंचगंगा घाट, काशी

रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामनरेशाचार्य जी महाराज

रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी

श्री तुलसी पीठ, चित्रकूट

रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज

रामानन्द सम्प्रदाय रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी Ramananda Sampradaya रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य जी

यह रामानंद श्रीसम्प्रदाय की प्रसिद्ध पीठ हैं, इसके साथ ही जयपुर स्थित श्रीत्रिवेणीधाम पीठ, जयपुर स्थित गलतापीठ, वृन्दावन स्थित मलूक पीठ व अयोध्या, चित्रकूट में रामानंदियों की बड़ी पीठें हैं, व 36 द्वारे हैं।

श्री मलूक पीठ, वृन्दावन

श्री रामानन्दी मलूकपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेन्द्रदास जी महाराज

श्री रामानन्दी मलूकपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेन्द्रदास जी महाराज

श्रीनिम्बार्क-सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ और उनके आचार्य :-

श्री निम्बार्काचार्यपीठ, परशुरामपुरी, सलेमाबाद

नित्यनिकुंजलीलाप्रविष्ठ निम्बार्काचार्य श्रीराधा सर्वेश्वरशरण श्री श्रीजी महाराज

श्रीमध्व-सम्प्रदाय की प्रमुख पीठें और उनके आचार्य :-

मध्व-सम्प्रदाय का केंद्र उडुपी है। श्रीमध्वाचार्य ने यहाँ ‘अष्टमठ’ यानि आठ मठों की स्थापना की थी। परंपरा के अनुसार उडुपी श्रीकृष्ण मन्दिर की पूजा सेवा बारी बारी दो वर्षों के लिए एक एक मठ के पास आती है। इस व्यवस्था को पर्याय कहते हैं। अष्टमठ और उनके विभूषित आचार्य निम्न हैं।

पालीमारू हृषिकेश मठ - मध्वाचार्य श्री विद्याधीश तीर्थ स्वामीजी

अडमारू नरसिम्हा मठ - मध्वाचार्य  श्री विश्वप्रिय तीर्थ स्वामीजी
                                    मध्वाचार्य  श्री ईशप्रिय तीर्थ स्वामीजी

कृष्णपुरा जनार्दन मठ - मध्वाचार्य  श्री विद्यासागर तीर्थ स्वामीजी  

पुट्टिग उपेंद्र मठ - मध्वाचार्य  श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी

शिरूर वामन मठ - मध्वाचार्य  श्री लक्ष्मीवर तीर्थ स्वामीजी

सोडे विष्णु मठ - मध्वाचार्य  श्री विश्ववल्लभ तीर्थ स्वामीजी

कनियूरू राम मठ - मध्वाचार्य  श्री विद्यावाल्ल्भ तीर्थ स्वामीजी

पेजावर अधोक्षज मठ - मध्वाचार्य  श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी

वर्तमान पर्याय मध्वाचार्य श्री अडमारु पीठाधीश श्री ईशतीर्थ जी के पास जनवरी 2020 से जनवरी 2022 तक रहेगा

गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के केंद्र :-

गौड़ीय सम्प्रदाय श्रीचैतन्य महाप्रभु जी से उद्भूत प्रसिद्ध है। वृन्दावन, बंगाल का नवद्वीप व जयपुर सम्प्रदायके प्रमुख केंद्र हैं। गौड़ीय परंपरा में चैतन्य महाप्रभु जी के शिष्य छः गोस्वामियों द्वारा स्थापित मंदिर इस प्रमुख हैं

  1. श्रीराधामदनमोहन जी मंदिर, वृन्दावन -- श्री सनातन गोस्वामी
  2. श्रीराधागोविंददेव जी मंदिर, जयपुर -- श्री रूप गोस्वामी
  3. श्रीराधागोपीनाथ जी मंदिर, वृन्दावन -- श्री मधुपण्डित गोस्वामी
  4. श्रीराधादामोदर जी मंदिर, वृन्दावन -- श्री जीव गोस्वामी
  5. श्रीराधाश्यामसुन्दर जी मंदिर, वृन्दावन -- श्री श्यामानन्द गोस्वामी
  6. श्रीराधारमण जी मंदिर, वृन्दावन -- श्री गोपाल भटट् गोस्वामी
  7. श्रीराधागोकुलानन्द जी मंदिर, वृन्दावन -- श्री लोकनाथ गोस्वामी

इसके अतिरिक्त श्रील भक्तिवेदांत प्रभुपाद जी द्वारा स्थापित इस्कॉन भी गौड़ीय-सम्प्रदाय का प्रमुख संगठन है, जिसके देश विदेश में अनेक मन्दिर हैं।

श्रीवल्लभ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठें और उनके आचार्य :-

श्रीवल्लभ-सम्प्रदाय या पुष्टिमार्गी वैष्णव परंपरा का केंद्र राजस्थान का नाथद्वारा है, जहाँ श्रीनाथजी का मन्दिर स्थित है। सम्प्रदायकी 7 प्रमुख पीठें हैं, 

  1. श्रीमथुरेशजी– कोटा,
  2. श्रीविट्ठलनाथजी– श्रीनाथद्वारा,
  3. श्रीद्वारकाधीशजी– कांकरोली,
  4. श्रीगोकुलनाथजी– गोकुल,
  5. श्रीगोकुलचन्द्रमाजी– कामावन,
  6. श्रीबालकृष्णजी– सूरत एवं
  7. श्रीमदनमोहनजी– कामावन

इसके अतिरिक्त महाप्रभु श्रीवल्लभाचार्य जी ने जिन 84 स्थानों पर श्रीमद्भागवत का पारायण किया, वे 84 स्थान भी बैठकजी नाम से सम्प्रदायके अनुयायियों में प्रसिद्ध हैं।

श्रीवल्लभाचार्य एवं श्रीनाथ जी नाथद्वारा

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इस लेख को उद्धृत कीजिए

Mudit Agrawal. “हिन्दू धर्म के सम्प्रदाय व उनके प्रमुख 'मठ' और 'आचार्य'”. युगसंवाद, 11 जुलाई 2018. https://yugsamvad.com/articles/hindoo-dharma-ke-sampradaaya-va-unake-pramukha-matha-aura

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