Acharya Tradition

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आचार्य परम्परा

आचार्य-परंपरा शास्त्रीय ज्ञान के सतत हस्तांतरण की रीढ़ रही है। शंकराचार्य सहित प्रमुख आचार्यों और उनकी शिक्षा-परंपरा पर लेख यहाँ संकलित हैं।

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संत रविदास और तत्कालीन समाज
धर्म · संस्कृति

संत रविदास और तत्कालीन समाज

संत रविदास निम्न लेख प्रतिज्ञ @RamaInExile द्वारा लिखित है । संत रविदास संत शिरोमणि वैष्णवाचार्य संत रविदास जी रामानंदी संप्रदाय के एक महान आचार्य थे। श्री आद्य गुरु रामानंदाचार्य द्वारा दीक्षित संत रविदास तथाकथित निम्न जाति से थे। उनसे संबंधित साहित्यिक इतिहास और उनके स्वयं रचित

प्रतिज्ञ · 3 सितम्बर 2021 · 8 मिनट

युधिष्ठिर का द्यूत - वैदिक रहस्यमयी अक्षविद्या
धर्म · संस्कृति

युधिष्ठिर का द्यूत - वैदिक रहस्यमयी अक्षविद्या

धर्मराज युधिष्ठिर को जुआरी कहना गलत है । धर्मराज युधिष्ठिर ने जीवन में कितनी बार द्यूत खेला?“व्यसनी” कहलाने के लिये कितनी बार खेलना पड़ता है? द्यूतविद्या को जुआ कहना भी गलत है । धर्मराज युधिष्ठिर को ऋषि से द्यूतविद्या क्यों सीखनी पड़ी?ऋषि के सिवा अन्य कोई शिक्षक क्यों नहीं मिला?शकु

1 सितम्बर 2021 · 1 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

आयुर्वेद – आयु का वेद – सम्पूर्ण रोगमुक्तपद्धति

लेखक:- आचार्य वासुदेव मिश्र वेद विज्ञाता यत्रौषधीः समम्मत राजानः समिताविव । विप्रः स उच्यते भिषग् रक्षोहामीवचातनः ॥ ऋग्वेदः १०-९७-६ ॥ राजा जिसप्रकार सङ्ग्राममें अपने सैनिकोंके साथ विराजते हैं, उसीप्रकार शल्यादि अष्टतन्त्रज्ञ नाडीविज्ञान विशारद जिस विद्वानपुरुष नाना प्रकारके औषधीग

11 जून 2021 · 15 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

हिन्दू धर्म में विदेश यात्रा : इतिहास और शास्त्र

सनातन धर्म के सभी शास्त्रों में भारतभूमि को साक्षात देवभूमि माना गया है, जहाँ ईश्वर के अवतार हुए, असंख्य ऋषि मुनि, तपस्वी हुए। समस्त शास्त्र जहाँ प्रकट हुए। इस भारतभूमि पर जन्म अनेक पुण्यों के फलस्वरूप कहा गया है जहाँ देवता भी आने को लालायित रहते हैं। इसका कारण है कि भारत की पवित

3 जून 2021 · 7 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

बृहस्पति कवच

बृहस्पति कवच श्रीगणेशाय नमः । अस्य श्रीबृहस्पतिकवच स्तोत्रमन्त्रस्य ईश्वर ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, गुरुर्देवता, गं बीजं, श्रीशक्तिः, क्लीं कीलकं, गुरुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः । अभीष्टफलदं देवं सर्वज्ञं सुरपूजितम् । अक्षमालाधरं शान्तं प्रणमामि बृहस्पतिम् ॥ १॥ बृहस्पतिः शिरः पातु लला

22 मई 2021 · 1 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

बृहस्पति स्तोत्र

बृहस्पति स्तोत्र श्री गणेशाय नमः । अस्य श्रीबृहस्पतिस्तोत्रस्य गृत्समद ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, बृहस्पतिर्देवता, बृहस्पतिप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः । गुरुर्बृहस्पतिर्जीवः सुराचार्यो विदांवरः । वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्रुः पीताम्बरो युवा ॥ १॥ सुधादृष्टिर्ग्रहाधीशो ग्रहपीडापहारकः । दयाकर

22 मई 2021 · 1 मिनट का पाठ

ज्योतिष

राक्षस संवत्सर है संवत् 2078, अ.भा.विद्वत्परिषद, काशी ने लगाई मुहर

◆संवत् २०७८ है राक्षस संवत्सर◆ ◆लुप्तसंवत्सर में विवाद क्यों ?◆ -- आचार्य श्री विनय झा , त्रिस्कन्ध ज्योतिर्विद्, सूर्यसिद्धान्तीय गणितज्ञ संरक्षक, अखिल भारतीय विद्वत्परिषद, वाराणसी गणितज्ञ, आदित्य पञ्चाङ्ग (काशी), श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग (जयपुर) आदि आदित्य पञ्चाङ्ग के सम

20 अप्रैल 2021 · 8 मिनट का पाठ

ज्योतिष

2078 राक्षस नाम संवत्सर ही शास्त्रीय

◆वर्ष २०७८ राक्षस नाम संवत्सर ही शास्त्रीय◆ -- डॉ. पारसनाथ ओझा , प्रधान सम्पादक, श्रीआदित्य पञ्चाङ्ग वाराणसी ◆ प्रभवादि संवत्सर का आनयन- आचार्यों ने सौरमान, चान्द्रमान तथा मध्यम गुरूमान से प्रभवादि सवत्सरों की प्रवृत्ति माना है। ◆ प्रभवादि संवत्सर विवेचन- यथा महर्षि नारदमुनि, "गृ

14 अप्रैल 2021 · 7 मिनट का पाठ

'लड़का हुआ है'- दायित्वों और नारीवाद के बीच पिसते पुरुष का यथार्थ चित्रण
संस्कृत · शास्त्र

'लड़का हुआ है'- दायित्वों और नारीवाद के बीच पिसते पुरुष का यथार्थ चित्रण

आचार्य जगन्नाथ के साहित्य बोध 'रमणीयार्थ-प्रतिपादक: शब्द: काव्यं' को आधुनिकता की कसौटी पर कसते हुए कहा जा सकता है- 'सामाजिक पक्षों का यथार्थ चित्रण करने वाले लोककल्याण की भावनाओ को समेटे सुंदर अर्थ देने विचारों की श्रंखलाबद्ध प्रस्तुति ही साहित्य है।' इस दृष्टिकोण से देखें तो ज्य

11 मार्च 2021 · 3 मिनट का पाठ

जब गुरु वशिष्ठ जी ने कहा सीता जी ही करेंगी अयोध्या का शासन.
धर्म · संस्कृति

जब गुरु वशिष्ठ जी ने कहा सीता जी ही करेंगी अयोध्या का शासन.

जब सीताजी व लक्ष्मणजी सहित श्रीराम वन जाने की आज्ञा लेने दशरथ जी व महर्षि वशिष्ठ के पास आए तो क्रूर कैकेयी उन तीनों के लिए तुरन्त वल्कल वस्त्र ले आई। श्रीराम व लक्ष्मण जी ने तो चीर के वस्त्र पहन लिए पर जब सीताजी वह वस्त्र पहनने लगीं तो सारी स्त्रियाँ विलाप करने लगीं व श्रीराम से

26 सितम्बर 2020 · 2 मिनट का पाठ

श्रीमद्भागवत व अन्य पुराणों की ऐतिहासिकता और प्रामाणिकता
धर्म · संस्कृति

श्रीमद्भागवत व अन्य पुराणों की ऐतिहासिकता और प्रामाणिकता

कुछ भ्रमित व सांप्रदायिक द्वेषभाव वाले लोग पुराणों में शिरोमणि 'श्रीमद्भागवत' को महर्षि वेदव्यास रचित नहीं मानते और कहते हैं कि श्रीमद्भागवत को 13वीं शताब्दी में बोपदेव नामके एक पंडित ने लिखा था। हालाँकि ये कई जन्मों में भी इसका प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते। किन्तु व्यर्थ के शब्द

15 अक्टूबर 2019 · 4 मिनट का पाठ

स्वामी विवेकानन्द - जिनसे दुनिया भारत को पहचानती है
धर्म · संस्कृति

स्वामी विवेकानन्द - जिनसे दुनिया भारत को पहचानती है

आधुनिक समय में अगर किसी संत ने भारत के जनजीवन, विशेषकर युवा वर्ग पर सर्वाधिक प्रभाव डाला तो वे हैं स्वामी विवेकानन्द। शंकराचार्य के वेदान्त दर्शन को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में नव्य वेदांत के रूप में प्रस्तुत करने वाले स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में पाश्चात्य

12 जनवरी 2019 · 6 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

योगी सरकार ने ऐसे दूर की कुम्भ को लेकर पुरी शंकराचार्य की शिकायत..

प्रयागराज में आगामी मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक अर्धकुम्भ का आयोजन हो रहा है जो हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति का एक अद्भुत और महत्वपूर्ण अंग है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुम्भ की तैयारियों में जोरशोर से जुटे हुए हैं। प्रयागराज कुम्भ को पूरे विश्व में पहचान द

19 दिसम्बर 2018 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

जबाला, सत्यकाम और महर्षि गौतम ने सिखाया हिन्दू धर्म का मर्म

छान्दोग्योपनिषद् के चौथे अध्याय में जबाला, सत्यकाम और हरिद्रुमत के पुत्र महर्षि गौतम की कथा मिलती है। जबाला उस भारत का प्रतिनिधित्व करती है जहाँ नारी हर रूप में नारायणी है, सत्यकाम सत्य के उस प्रहरी के रूप में खड़े हैं जो कहता है कि जो धीर मनुष्य सत्य-पथ से कभी नहीं हटता, वही ब्रह

2 अगस्त 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

जबाला, सत्यकाम और महर्षि गौतम ने समझाया हिन्दू धर्म का मर्म

छान्दोग्योपनिषद् के चौथे अध्याय में जबाला, सत्यकाम और हरिद्रुमत के पुत्र महर्षि गौतम की कथा मिलती है। जबाला उस भारत का प्रतिनिधित्व करती है जहाँ नारी हर रूप में नारायणी है, सत्यकाम सत्य के उस प्रहरी के रूप में खड़े हैं जो कहता है कि जो धीर मनुष्य सत्य-पथ से कभी नहीं हटता, वही ब्रह

22 जुलाई 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

दतिया के स्वामीजी, जिनके यज्ञ से युद्ध से पीछे हट गया था चीन

भद्रं इच्छन्तः ऋषयः स्वर्विदः, तपो दीक्षां उपसेदु: अग्रे ! ततो राष्ट्रं बलं ओजश्च जातम्, तदस्मै देवा उपसं नमन्तु !! अर्थववेद के इस मन्त्र में कहा गया है, दतिया " आत्मज्ञानी ऋषियों ने जगत का कल्याण करने की इच्छा से सृष्टि के प्रारंभ में जो दीक्षा लेकर तप किया, उससे राष्ट्र निर्माण

20 जुलाई 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म के सम्प्रदाय व उनके प्रमुख 'मठ' और 'आचार्य'

हिन्दू धर्म में वेदान्त विचार के आधार पर पांच प्रमुख वैदिक-सम्प्रदाय हैं। 1) श्रीमदाद्य शंकराचार्य के " अद्वैत " मत पर आधारित " शांकर-सम्प्रदाय "। 2) श्रीमद् रामानुजाचार्य के " विशिष्टाद्वैत " मत पर आधारित " श्रीसम्प्रदाय "। श्रीसम्प्रदाय में ही श्रीमद् रामानंदाचार्य हुए व श्रीसम

11 जुलाई 2018 · 7 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

सोमरस के बारे में वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

प्राच्य संस्कृतियों के अधिकतर विरोधियों की मान्यता रही है कि वैदिक ऋषि जो सोमरस पीते थे वह शराब थी। बच्चन के बाउजी बड़के बच्चन साहब ने तो पूरी कविता ही झोंक रखी है इसी कुत्सित सोच के आस पास। सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला, द्रोणकलश जिसको कहते थे, आज वही मधुघट आला, वेदिव

2 फ़रवरी 2018 · 7 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

आद्य शंकराचार्य का अद्भुत मंगलाचरण...

संस्कृत साहित्य में ग्रन्थ के प्रारम्भ में मंगलाचरण की सुदीर्घ परम्परा है। सभी उपनिषदों का अपना मंगलाचरण है। मंगलाचरण के बिना कोई कार्य प्रारंभ करें तो उसमें विघ्न पड़ने की आशंका रहती है। पुस्तक के ऊपर श्रीगणेशाय नमः लिखना भी मंगलाचरण ही है। परन्तु भाष्यकार भगवान शंकराचार्य के ब्र

18 दिसम्बर 2017 · 2 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

कौनसे आठ प्रकार के होते हैं ब्राह्मण ?

यूं तो ब्राह्मणों का वर्णन अनेक ग्रन्थों में मिलता है पर सबसे उत्तम तो वेद और स्मृतियों में ही मिलता है। ब्राह्मण होने का अधिकार सभी को है चाहे वह किसी भी जाति, प्रांत या संप्रदाय से हो। लेकिन ब्राह्मण होने के लिए कुछ नियमों का पालन करना होता है। उन्हीं नियमों के पालन से आठ ब्राह

9 अगस्त 2017 · 3 मिनट का पाठ

क्या होता है गुरु, आचार्य, पण्डित और पुजारी का अर्थ?
संस्कृत · शास्त्र

क्या होता है गुरु, आचार्य, पण्डित और पुजारी का अर्थ?

हम सभी ब्राह्मणों को अक्सर पण्डित जी, गुरु जी, आचार्य जी, ब्राह्मण देवता आदि तरह तरह के नामों से संबोधित करते हैं। पर क्या आपने कभी इन नामों के पीछे जो अर्थ है उसको जानने की कोशिश की है? नहीं की होगी क्योंकि नाम में क्या रखा है यही सबकी सोच है। लेकिन मैंने एक छोटा सा प्रयास किया

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्या आदि शंकराचार्य प्रच्छन्न बौद्ध हैं?

महामहिम आद्यगुरू भगवान शंकराचार्य जी के अद्वैतवाद में कई ऐसी अवधारणायें हैं जो बौद्ध दर्शन के महायानी संप्रदायों माध्यमिक शून्यवाद तथा योगाचार विज्ञानवाद से मिलती-जुलती हैं। यही कारण है कि विभिन्न दर्शनों के कई आचार्यों ने आक्षेप किया है कि शंकर का अद्वैतवाद बौद्ध दर्शन विशेषतः म

28 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आधुनिक विज्ञान की नजर में मटकों से सौ कौरवों का जन्म

हमारे भारतीय ग्रन्थों में बहुत से ऐसे प्रसंग हैं जिनमें गहरी वैज्ञानिक बातें छिपी हुई हैं पर हम लोगों के उनपर शोध न करने के कारण वे सामने नहीं आ पातीं। हमारे मन का एक कोना जानता तो है कि भारत ने प्राचीन काल में ही एक बेहद समृद्ध संस्कृति का सृजन किया था जिसमें विज्ञान भी विकास के

23 जुलाई 2017 · 4 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

भगवान वेदव्यास की वेदना...

"मैं दोनों हाथ उठाकर पुकार पुकार कर कह रहा हूँ परन्तु मेरी बात कोई नहीं सुनता। धर्म पालन के मार्ग पर मोक्ष तो मिलता ही है, अर्थ और काम भी सिद्ध होते हैं, फिर भी लोग उसका सेवन क्यों नहीं करते?" - महर्षि वेदव्यास, महाभारत, स्वर्गारोहण पर्व, 5/62 ऋग्, यजु, साम और अथर्ववेद के रूप में

13 जुलाई 2017 · 3 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

प्रश्नोपनिषद के गुरु और शिष्य की बातें

प्रश्नोपनिषद का प्रारम्भ इस प्रकार होता है कि सुकेशा, शिविकुमार, सत्यकाम, सौर्यायणि, कौसल्य, भार्गव और कबन्धी, यह ब्रह्मनिष्ठ ऋषि परब्रह्म की खोज करते हुए कि, "वह ब्रह्म क्या है?" इत्यादि जिज्ञासा लेकर उसकी खोज में आचार्य पिप्पलाद के पास हाथों में समिधा लेकर इस भावना से जाते हैं

13 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ