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Mudit Agrawal

Mudit Agrawal

लेख

"द सिटी ऑफ गॉड" - ऑगस्टीन का पैगन पर हमला
राजनीति · इतिहास

"द सिटी ऑफ गॉड" - ऑगस्टीन का पैगन पर हमला

"द सिटी ऑफ गॉड" A.D. 410 में, पश्चिमी इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था, जब वंडल्स ने अपने राजा, अलारिक के नेतृत्व में, रोम शहर पर कब्जा कर लिया। रोम को सनातन शहर के रूप में जाना जाता था क्योंकि रोमियों ने सोचा था कि यह सचमुच कभी नहीं गिरेगा, और वर्ष 410 ने इस विश्वास को अपनी नींव

3 सितम्बर 2021 · 6 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

युधिष्ठिर - सार्वभौम दिग्विजयी हिन्दूराष्ट्र निर्माता सम्राट

जैसा कि युधिष्ठिर जी आदि पर विवाद देखने को मिलता है तो हमें महाभारत में ही देखना चाहिए कि युधिष्ठिर आदि पाण्डव स्वयं से भी शक्तिशाली या धर्मपुंज थे अथवा नवयुगी दुष्प्रचार अनुसार मात्र श्रीकृष्ण की दया पर ही लंबित थे क्योंकि ऋषि बार बार उनको धर्मराज कह रहे तब उनका वचन मिथ्या नहीं

1 सितम्बर 2021 · 13 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

शतभिषा नक्षत्र के स्वामी वरुण देव के मन्त्र

चन्द्रप्रभं पंकजसन्निषण्णं पाशांकुशाभीतिवरं दधानम्। मुक्ताविभूषांचितसर्वगात्रं ध्यायेत् प्रसन्नं वरुणं विभूत्यै। जिनके शरीर की कांति चंद्रमा के समान है, जो पंकज पर आसीन हैं, जो अपने हाथों में पाश, अंकुश, अभय तथा वरमुद्रा धारण किए हुए हैं। जिनका समस्त शरीर मोतियों के आभूषणों से भू

1 सितम्बर 2021 · 2 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

रामजन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय कौन हैं ?

क्या ऐसे ही किसी ऐरे गैरे को विहिप का सर्वेसर्वा बना दिया जाएगा ? या फिर रामजन्मभूमि ट्रस्ट का महासचिव ? आज जानिए कौन हैं चम्पत राय जी... जन्मभूमि ट्रस्ट के सचिव श्री चम्पत राय। 1975 इँदिरा गाँधी द्वारा थोपे आपातकाल के समय बिजनौर के धामपुर स्थित आर एस एम कॉलेज में एक युवा प्रोफेस

10 जुलाई 2021 · 4 मिनट का पाठ

भीलनी शबरी के झूठे बेर श्रीराम द्वारा खाना वाल्मीकि रामायण से सिद्ध है
धर्म · संस्कृति

भीलनी शबरी के झूठे बेर श्रीराम द्वारा खाना वाल्मीकि रामायण से सिद्ध है

आजकल कुछ अति विद्वान समाज में यह भ्रम प्रचारित कर रहे हैं कि शबरी के "झूठे बेर" की कथा रामायण में नहीं है, व शबरी निम्न जाति की भक्त नहीं बल्कि उच्च वर्ण की स्त्री है। यह न केवल शास्त्र के परम तात्पर्य के प्रतिकूल है वरन सामाजिक समरसता हेतु भी अत्यन्त हानिप्रद एवं अहंकार-द्वेष का

3 जुलाई 2021 · 13 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

श्रीगुरुजी गोलवलकर का पुण्य स्मरण

पुण्य स्मरण है उन परमपूजनीय श्रीगुरुजी माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर का जिन्हें माधव कहकर याद किया जाता है। सम्भवतया इसलिए रखा होगा उनके माता पिता ने 'माधव' नाम कि उनकी 9वीं व एकमात्र जीवित सन्तान बच पाए थे वे, माधव की तरह ही, पर क्या पता था कि यही सन्तान आगे चलकर महाभारतनायक गीताप्र

30 जून 2021 · 7 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

हिन्दू धर्म में विदेश यात्रा : इतिहास और शास्त्र

सनातन धर्म के सभी शास्त्रों में भारतभूमि को साक्षात देवभूमि माना गया है, जहाँ ईश्वर के अवतार हुए, असंख्य ऋषि मुनि, तपस्वी हुए। समस्त शास्त्र जहाँ प्रकट हुए। इस भारतभूमि पर जन्म अनेक पुण्यों के फलस्वरूप कहा गया है जहाँ देवता भी आने को लालायित रहते हैं। इसका कारण है कि भारत की पवित

3 जून 2021 · 7 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

"Inside The Hindu Mall" - Abhijeet Singh

Abhijeet Singh जी द्वारा लिखित "Inside The Hindu Mall" पुस्तक उन युवाओं के लिए एक रौशनी है जो हिन्दुत्व से दूर वामपंथ के अँधेरे कमरे में बन्द हो गए हैं। हर छोटे बड़े मुद्दे को एड्रेस करती यह पुस्तक कोई निर्णय नहीं सुना देती, बल्कि फिर एक बार सोचने को मजबूर कर देती है, प्राकृतिक और

30 मई 2021 · 5 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

नरेन्द्र मोदी इजरायल पर क्या सोचते हैं?

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी इजरायल पर, अपनी पुस्तक 'सेतुबन्ध' में लिखते हैं, "दो हजार वर्ष पूर्व आक्रमणकारियों ने इजराइल को तहस-नहस कर डाला। वहाँ के कुछ लोग विश्व में भिन्न-भिन्न स्थानों में बिखर चुके थे, फिर भी अपने आत्मगौरव से भरे पहले और दूसरे विश्वयुद्ध की परिस्थिति का लाभ उठ

21 मई 2021 · 3 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

येरुशलम की अल अक्सा मस्जिद और 1969 के गुजरात दंगे

येरुशलम की जो अल अक्सा मस्जिद चर्चा में बनी हुई है उसका 1969 के गुजरात दंगों से क्या सम्बन्ध है? 21 अगस्त 1969 का दिन था, जब ऑस्ट्रेलिया के डेनिस माइकल रोहन नाम के एक ईसाई मिशनरी ने अल अक्सा मस्जिद में आग लगा दी थी। रोहन का मानना था कि अल-अक्सा मस्जिद को जलाने से Second Coming of

21 मई 2021 · 4 मिनट का पाठ

कम्युनिज्म (वामपंथ) के खोखलेपन पर श्री गुरुजी गोलवलकर के विचार
राजनीति · इतिहास

कम्युनिज्म (वामपंथ) के खोखलेपन पर श्री गुरुजी गोलवलकर के विचार

"हमारे देश में जनतंत्र की गम्भीर असफलताओं में कम्युनिज्म की बढ़ती हुई विभीषिका है, जो जनतान्त्रिक विधान की मानी हुई शत्रु है। जनता के समक्ष की गई अपनी आर्थिक अपील में कम्युनिस्टों से कही पिछड़ न जायें, इस प्रयास से हमारे नेतागण कम्युनिस्टों की ही भाषा तथा कार्यक्रमों को स्वयं भी

15 अक्टूबर 2020 · 5 मिनट का पाठ

खतरनाक ईसाई चरित्र पर श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार
धर्म · संस्कृति

खतरनाक ईसाई चरित्र पर श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार

"जहाँ तक ईसाइयों का सम्बन्ध है, ऊपरी तौर से देखने वाले को तो वे नितान्त निरूपद्रवी ही नहीं वरन् मानवता के लिए प्रेम एवं सहानुभूति के मूर्तिमान स्वरूप प्रतीत होते है। उनकी वक्तृतायें 'सेवा' एवं 'मानवोद्धार' जैसे शब्दों से परिपूर्ण रहती है। और उनसे ऐसा प्रतीत होता है मानो उस सर्वशक

14 अक्टूबर 2020 · 4 मिनट का पाठ

विभाजन के बाद मुसलमान संकट पर श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार
धर्म · संस्कृति

विभाजन के बाद मुसलमान संकट पर श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार

मुसलमानों की स्वाभाविक प्रवृत्ति व तद्जनित आसन्न राष्ट्रीय संकट के बारे में श्रीगुरुजी की स्पष्ट धारणा उनकी पुस्तक "विचार नवनीत" (Bunch of Thoughts) से मिलती है, श्रीगुरुजी कहते हैं, "विभाजन के बाद यह कहने वाले अनेकों लोग मौजूद हैं कि अब मुसलमान समस्या बिल्कुल नहीं रही। पाकिस्तान

13 अक्टूबर 2020 · 4 मिनट का पाठ

जब गुरु वशिष्ठ जी ने कहा सीता जी ही करेंगी अयोध्या का शासन.
धर्म · संस्कृति

जब गुरु वशिष्ठ जी ने कहा सीता जी ही करेंगी अयोध्या का शासन.

जब सीताजी व लक्ष्मणजी सहित श्रीराम वन जाने की आज्ञा लेने दशरथ जी व महर्षि वशिष्ठ के पास आए तो क्रूर कैकेयी उन तीनों के लिए तुरन्त वल्कल वस्त्र ले आई। श्रीराम व लक्ष्मण जी ने तो चीर के वस्त्र पहन लिए पर जब सीताजी वह वस्त्र पहनने लगीं तो सारी स्त्रियाँ विलाप करने लगीं व श्रीराम से

26 सितम्बर 2020 · 2 मिनट का पाठ

जब भगवान् श्रीकृष्ण ने की भीष्म पितामह की स्तुति!
धर्म · संस्कृति

जब भगवान् श्रीकृष्ण ने की भीष्म पितामह की स्तुति!

युधिष्ठिर जी ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा - हे पुरुषोत्तम! आप यह किसका ध्यान कर रहे हैं? यह तो बड़े आश्चर्य की बात है। इस त्रिलोकी का कुशल तो है न? आपके शरीर में रहने वाली प्राणवायु रुक गई है। आपके रोंगटे खड़े हो गये हैं। जरा भी हिलते नहीं हैं। माधव! आप लकड़ी, दीवार और पत्थर की तरह

26 सितम्बर 2020 · 3 मिनट का पाठ

नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के वीरोचित निर्णय
धर्म · संस्कृति

नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के वीरोचित निर्णय

हिन्दूराष्ट्र के निर्मम शून्य आकाश में एकाएक अनेक वर्ण के मेघ परिधावी संवत्सर में उभरे हैं। एक विकट महापरिवर्तन आरम्भ हो चुका है। सर्वराज सम्राट परमभट्टारक श्री नरेन्द्र मोदी और सर्वाध्यक्ष महादण्डनायक श्री अमित शाह द्वारा पहले 370 नाम की दुर्धारा का उन्मूलन, फिर श्रीरामजन्मभूमि

4 जनवरी 2020 · 3 मिनट का पाठ

ऐसा हो अयोध्या में श्री राम मन्दिर का भव्य नवनिर्माण...
धर्म · संस्कृति

ऐसा हो अयोध्या में श्री राम मन्दिर का भव्य नवनिर्माण...

आज भी कभी श्री राम मन्दिर के बारे में सोचता हूँ तो अयोध्या का सच एक सपने जैसा लगता है। और जब यह सच होने वाला है तो और भी ज्यादा सपने मन में कोलाहल मचाए हुए हैं। जन्मभूमि की 67 एकड़ भूमि ही नहीं, समूची अयोध्या ही देवशिल्पी विश्वकर्मा का इंतज़ार कर रही है। इक्ष्वाकु वंश की यह अजेय भू

20 दिसम्बर 2019 · 11 मिनट का पाठ

26 दिन उपवास कर ऐसे वीर सावरकर ने बुलाया मृत्यु को..
राजनीति · इतिहास

26 दिन उपवास कर ऐसे वीर सावरकर ने बुलाया मृत्यु को..

"आ मृत्यु...आ...तू आ" 83 वर्ष की आयु में वीर सावरकर ने हिन्दू साधुओं की प्राचीन परंपरा अपनाकर, 1 फरवरी, तिथि माघ शुक्ल एकादशी को अन्न, जल और दवाइयों का त्याग कर दिया। उनका कहना था, "जब जीवन मिशन पूरा हो जाए, और समाज की सेवा करने लायक ताकत न बचे, तब मृत्यु का स्वयं वरण कर लेना चाह

20 दिसम्बर 2019 · 3 मिनट का पाठ

आंग सान सू की - म्यांमार की माँ को हर भारतीय का नमन
राजनीति · इतिहास

आंग सान सू की - म्यांमार की माँ को हर भारतीय का नमन

नमन है म्यांमार की नोबल विजेता माँ आंग सान सू की को, जो अंतराष्ट्रीय दबाव को दरकिनार कर अपने देश के साथ अडिगता से खड़ी रहीं। अनेक अवार्ड पहले ही छीन लिए जाने और वैश्विक वामपंथी शक्तियों द्वारा नोबल छीनने की धमकियों को धता बताकर उन्होंने अपने देश का साथ दिया। आज ब्रह्मदेश का जन जन

14 दिसम्बर 2019 · 3 मिनट का पाठ

श्रीमद्भागवत व अन्य पुराणों की ऐतिहासिकता और प्रामाणिकता
धर्म · संस्कृति

श्रीमद्भागवत व अन्य पुराणों की ऐतिहासिकता और प्रामाणिकता

कुछ भ्रमित व सांप्रदायिक द्वेषभाव वाले लोग पुराणों में शिरोमणि 'श्रीमद्भागवत' को महर्षि वेदव्यास रचित नहीं मानते और कहते हैं कि श्रीमद्भागवत को 13वीं शताब्दी में बोपदेव नामके एक पंडित ने लिखा था। हालाँकि ये कई जन्मों में भी इसका प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते। किन्तु व्यर्थ के शब्द

15 अक्टूबर 2019 · 4 मिनट का पाठ

सर्वसम्मति से राम मंदिर बनना हिंदुत्व की आत्महत्या
धर्म · संस्कृति

सर्वसम्मति से राम मंदिर बनना हिंदुत्व की आत्महत्या

आज मैं जो लिखने जा रहा हूँ इससे कुछ लोगों को कष्ट हो सकता है। पर बहुत सोच विचारकर लिख रहा हूँ कि कोर्ट के फैसले या मुसलमानों की सहमति से राम मंदिर बनना हिंदुत्व के लिए आत्मघातक साबित होगा। पहले से ही धर्मनिरपेक्षता की नींद सोया हुआ हिन्दू समाज यदि मुस्लिमों की सहमति से मन्दिर बन

15 अक्टूबर 2019 · 4 मिनट का पाठ

इतने साल पहले हुआ था भगवान श्रीराम का जन्म
संस्कृत · शास्त्र

इतने साल पहले हुआ था भगवान श्रीराम का जन्म

सनातन संस्कृति कालसापेक्ष नहीं है, इसलिए सनातन कहलाती है। जो तीनों कालों का परंपरा से चला आ रहा शाश्वत धर्म समय से परे है वह सनातन है। पर आधुनिक विज्ञानवाद से प्रभावित लोगों की बुद्धि भौतिक पैमानों पर ही जवाब दे जाती है। श्रीराम के जन्मकाल पर काफी विवाद किया जाता है। पर इस का निर

13 सितम्बर 2019 · 8 मिनट का पाठ

क्या कपिल मिश्रा की एक कविता से डर गए आतंकियों के पैरोकार?
राजनीति · इतिहास

क्या कपिल मिश्रा की एक कविता से डर गए आतंकियों के पैरोकार?

पुलवामा हमले के बाद चालीस से अधिक जवानों के बलिदान के बाद हर देशवासी गमजदा है, पर इस मौके पर भी भारत में बैठे कुछ पाकिस्तान समर्थक गंदी राजनीती से बाज नहीं आ रहे हैं| बार बार देशद्रोह के काम कर चुका ये टुकड़े टुकड़े गैंग कभी सेना को बलात्कारी बता रहा है, कभी कश्मीरी पत्थरबाजों को म

25 फ़रवरी 2019 · 6 मिनट का पाठ

मोदी सरकार के ये 15 कदम भारतीय सेना को बना देंगे अत्याधुनिक
राजनीति · इतिहास

मोदी सरकार के ये 15 कदम भारतीय सेना को बना देंगे अत्याधुनिक

2014 में जबसे मोदी सरकार केंद्र में आई है, तब से भारतीय सेना की सुदृढ़ता सरकार के सबसे महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल रही है। बीते 5 सालों में भारतीय सेना को अत्याधुनिक और सबसे मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गये हैं, जिससे भारतीय सेना विश्व की सबसे शक

6 फ़रवरी 2019 · 11 मिनट का पाठ

हिन्दू धर्म को समझने के लिए पढ़नी होंगी ये पुस्तकें
संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म को समझने के लिए पढ़नी होंगी ये पुस्तकें

ऐसे अनेक हिन्दू हैं जो वास्तविक व सत्य रूप में सनातन धर्म या जिसे हम हिन्दू धर्म कहते हैं, उसे जानना व समझना चाहते हैं, परन्तु मार्गदर्शन के आभाव में ठीक मंजिल तक नहीं पहुंच पाते। हिन्दू धर्म की यह खासियत भी है और कठिनाई भी कि अन्य मतों की तरह जैसे इस्लाम में कुरान, व ईसाईयत में

13 जनवरी 2019 · 5 मिनट का पाठ

हिन्दूराष्ट्र का स्वर्णिम संकल्प
धर्म · संस्कृति

हिन्दूराष्ट्र का स्वर्णिम संकल्प

भारत केवल हिंदुओं का, केवल हिंदुओं के लिए और केवल हिंदुओं के द्वारा है यह हमारा अटल विचार है। और यह हमारे हिन्दूराष्ट्र की संकल्पना भी है। जब यह विचार हम व्यक्त करते हैं तो बहुत से हिंदू भी सदियों से पैठी हुई भीरुता के वशीभूत होकर इस संकल्प को हास्यास्पद कह बैठते हैं। वे यह कहने

13 जनवरी 2019 · 4 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

योगी सरकार ने ऐसे दूर की कुम्भ को लेकर पुरी शंकराचार्य की शिकायत..

प्रयागराज में आगामी मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक अर्धकुम्भ का आयोजन हो रहा है जो हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति का एक अद्भुत और महत्वपूर्ण अंग है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुम्भ की तैयारियों में जोरशोर से जुटे हुए हैं। प्रयागराज कुम्भ को पूरे विश्व में पहचान द

19 दिसम्बर 2018 · 5 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

जाति व्यवस्था का प्राचीन आधार और विशिष्टता

हम संसार में जहाँ भी देखते हैं प्रकृति प्रदत्त विभिन्नता, वैशिष्ट्य, अधिकार अनधिकार भेद और उनका सामंजस्य सहज ही दिखाई देता है। सभी पशु, पक्षी, वृक्ष, पाषाण-धातु आदि जड़ चेतन वस्तुओं में भी भिन्नता की एक वैशिष्ट्य जनित श्रृंखला दिखाई देती है। प्रकृति की यह वैशिष्ट्यपरिपूर्ण विभिन्न

11 दिसम्बर 2018 · 7 मिनट का पाठ

समाचार · मीडिया

द्रव्यवती - जयपुर में जिंदा हुई एक मृत नदी

देश की सांस्कृतिक राजधानी जयपुर के नाहरगढ़ अरण्य की दुर्गम पहाड़ियों में से बहती थी एक नदी। इसपर बना आथुनिया बांध जब छलकता था तो सुरम्य आमेर पहाड़ियों के झरने फूट पड़ते थे। जयपुर बसाते समय हरमाड़ा की पहाड़ी तोड़कर बांडी नदी से द्रव्यवती में पानी लाए थे महाराजा सवाई जयसिंह। नाहरगढ

23 नवम्बर 2018 · 4 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

क्या मनुस्मृति महिलाओं का विरोध करती है ??

आजकल कई वामपंथी और नारीवादी हिन्दू धर्म का विरोध करने के लिए हिन्दू धर्मग्रंथ मनुस्मृति पर स्त्रीविरोधी और पितृसत्तात्मक होने का आरोप लगाते हैं जबकि सत्य कुछ और ही है। आश्चर्य तब होता है जब यही लोग कुरान को स्त्री की हितैषी बताते हैं। मनुस्मृति में स्त्रियों के बारे में अनेक ऐसे

18 जुलाई 2018 · 3 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

विवेकानन्द रॉक मेमोरियल - कन्याकुमारी, ऐतिहासिक संघर्ष का प्रतीक

विवेकानन्द रॉक मेमोरियल - कन्याकुमारी, एक एतिहासिक संघर्ष का प्रतीक सम्पूर्ण देश में घूमता हुआ भ्रमणशील संन्यासी भारत के दक्षिणी अंतिम छोर पर पहुंचा जहाँ पर प्राचीनकाल से भगवती कन्याकुमारी का मंदिर स्थित है। संन्यासी माँ भगवती के चरणों में गिर पड़ा। वहीं समुद्र में दो चट्टानें हैं

17 जुलाई 2018 · 8 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म के सम्प्रदाय व उनके प्रमुख 'मठ' और 'आचार्य'

हिन्दू धर्म में वेदान्त विचार के आधार पर पांच प्रमुख वैदिक-सम्प्रदाय हैं। 1) श्रीमदाद्य शंकराचार्य के " अद्वैत " मत पर आधारित " शांकर-सम्प्रदाय "। 2) श्रीमद् रामानुजाचार्य के " विशिष्टाद्वैत " मत पर आधारित " श्रीसम्प्रदाय "। श्रीसम्प्रदाय में ही श्रीमद् रामानंदाचार्य हुए व श्रीसम

11 जुलाई 2018 · 7 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

महर्षि वेदव्यास कौन हैं? आइये जानें

पुराणों की गाथा, भाग-2 हिन्दूओं में एक बहुत बड़ा दुष्प्रचार फैलाया गया है कि वेदव्यास कृत पुराण नवीन ग्रन्थ हैं। पुराण नाम से स्पष्ट है कि इसका सम्बन्ध पुराना से है। किसी संस्कृति को खत्म करने के लिए उसके इतिहास को मिटाना पुरानी परम्परा रही है, पुराणों का अपमान करना उसी रीति का अन

20 दिसम्बर 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

दुष्ट राक्षसियों के प्रति कैसा था हनुमान जी का व्यवहार? हनुमान जी का फेमिनिज़्म!!

कुछ लोगों द्वारा यह कहा जाता है कि स्त्री कितनी भी दुष्ट हो उसका सम्मान करना ही चाहिए फिर चाहे वह वैश्या ही हो। इसके लिए वे हिन्दू ग्रन्थों से कुछ तर्क भी देते हैं। एक तर्क है कि हनुमान जी ने सुरसा और त्रिजटा जो कि राक्षसियाँ थीं उन्हें माता कहकर सम्मान दिया था फिर बॉलीवुड अभिनेत

25 नवम्बर 2017 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म में वैश्य समाज का महत्व और योगदान

पद्मावती फ़िल्म का सर्व हिन्दू समाज ने विरोध किया जो कि बहुत ही प्रसन्नता का विषय है। फ़िल्म के प्रखर विरोध के लिए श्री राजपूत करणी सेना व राजपूत संगठनों के साथ बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, अन्य हिन्दू संगठन अग्रवाल महासभा, ब्राह्मण महासभा, वैश्य महासभा व अन्य 36 कौम एक साथ आई हैं।

19 नवम्बर 2017 · 5 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

इन 6 जानवरों से की थी माता सीता ने रावण की तुलना

आजकल हिन्दुओं में बड़ी चतुराई से रावण का महिमामंडन किया जा रहा है और यह झूठ फैलाया गया है कि रावण ने किसी स्त्री का स्पर्श नहीं किया था, उसमें वासना थी तो संयम भी था, आदि आदि जिससे रावण को चरित्रवान साबित किया जा सके और लोगों को श्रीराम से दूर करके राक्षस रावण के समीप ले जाया जा स

24 अक्टूबर 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

मुझे रावण जैसा भाई चाहिए!

आजकल हिन्दुओं में बड़ी चतुराई से यह तथ्य फैलाया गया है कि रावण ने किसी स्त्री का स्पर्श नहीं किया था, उसमें वासना थी तो संयम भी था, आदि आदि जिससे रावण को चरित्रवान साबित किया जा सके और लोगों को श्रीराम से दूर करके राक्षस रावण के समीप ले जाया जा सके। पर क्या ये वास्तव में सत्य है क

22 सितम्बर 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

वेदमूर्ति पण्डित श्रीपाद दामोदर सातवलेकर का पुण्य स्मरण

वेदविद्या का अनुशीलन करने के पक्षपाती लोगों में पण्डितजी का नाम ही पर्याप्त परिचय है। वैदिक साहित्य और संस्कृत को जनसामान्य की पहुंच में लाने का ऐसा महनीय कार्य उन्होंने किया था। जैसा करने की इच्छा कभी दयानन्द स्वामी ने की थी। स्वामी दयानन्द ने हिन्दी को वेदभाष्य की भाषा बनाकर वे

19 सितम्बर 2017 · 4 मिनट का पाठ

ज्योतिष

दक्षिणा देने से ही क्यों मिलता है धार्मिक कर्मों का फल.

यजुर्वेद में एक बहुत सुंदर मन्त्र(१) है, वह कहता है ब्रह्मचर्य आदि व्रतों से ही दीक्षा प्राप्त होती है अर्थात् ब्रह्मविद्या या किसी अन्य विद्या में प्रवेश मिलता है। फिर दीक्षा से दक्षिणा अर्थात् धन समृद्धि आदि प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। यहाँ दक्षिणा मिलने का अर्थ है दक्षिणा देना,

18 सितम्बर 2017 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्या ऋग्वेद का पुरुष सूक्त शूद्रों का अपमान करता है?

पुरुष सूक्त वेद सनातन संस्कृति का वह मानसरोवर है जिसके अवगाहन से हमारे पूर्वजों ने श्रेष्ठ से श्रेष्ठ मणिरत्नों का आहरण किया है। वेद सारी मानवजाति का हित साधने के लिए ही धरा पर प्रवृत्त हुए हैं। यदि धर्म के मूलभूत इन वेद, उपनिषद, स्मृति, पुराणों को ही निकालकर भारत को देखा जाएगा त

10 अगस्त 2017 · 6 मिनट का पाठ

कैसे बचाया था गोस्वामी तुलसीदास जी ने हिन्दूओं को मुसलमान बनने से?
संस्कृत · शास्त्र

कैसे बचाया था गोस्वामी तुलसीदास जी ने हिन्दूओं को मुसलमान बनने से?

गोस्वामी तुलसीदास जी के नाम से हमें सबसे पहले रामचरितमानस की याद आती है। वह अलौकिक काव्य जिसे गाकर कई सदियों से समूचे उत्तर पूर्वी भारत के करोड़ों लोग अपने इष्ट श्रीराम को याद करते आये हैं। हिंदुओं के करोड़ों घरों में एक भी घर ऐसा नहीं मिल सकता जिसमें यह ग्रन्थ न हो। श्री राम और हन

30 जुलाई 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

कोर्ट के भी पहले से हिन्दू क्यों मानते हैं गंगा - यमुना को जीवित

कुछ महीने पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी थीऔर गंगा -यमुना को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का फैसला किया था। इस फैसले के बाद भारत की दोनों महत्वपूर्ण नदियों गंगा और यमुना को संविधान की ओर से नागरिकों को मुहैया कराए गए सभी अधिक

30 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

धर्मसम्राट करपात्रीजी महाराज कौन थे ? जानिए 8 पंक्तियों में

कुछ बुद्धिमान जन भगवान हरि(विष्णु) का भजन करते हैं, और कुछ दूसरे संसार तापहारी हर(शंकर) की सेवा करते हैं। किन्तु धर्म की हानि से खिन्न मनवाले हम लोगों की उपासना का पात्र तो हरि और हर का वह अनुपम अद्वैत है, जिसे हमने अपनी आंखों से देखा है। (श्रीस्वामी करपात्रीजी महाराज के संन्यास

26 जुलाई 2017 · 2 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आधुनिक विज्ञान की नजर में मटकों से सौ कौरवों का जन्म

हमारे भारतीय ग्रन्थों में बहुत से ऐसे प्रसंग हैं जिनमें गहरी वैज्ञानिक बातें छिपी हुई हैं पर हम लोगों के उनपर शोध न करने के कारण वे सामने नहीं आ पातीं। हमारे मन का एक कोना जानता तो है कि भारत ने प्राचीन काल में ही एक बेहद समृद्ध संस्कृति का सृजन किया था जिसमें विज्ञान भी विकास के

23 जुलाई 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आधुनिक विज्ञान से भी सिद्ध है पितर श्राद्ध की वैज्ञानिकता

मरने के बाद यह मृतात्मा कहाँ जाती है? इसका विवरण सामवेद के ताण्ड्यमहाब्राह्मण के छान्दोग्य उपनिषद में विस्तार से मिलता है। वहाँ जीव की तीन गति बताई गईं हैं जिसमें से हम चन्द्रलोक गति की बात करेंगे जिसमें पितर का श्राद्ध आवश्यक होता है। हमारे सरे पूर्वज पितर कहलाते हैं। यह सामान्य

23 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

जब सूत जाति के रोमहर्षण और उग्रश्रवा ब्राह्मण बन गए

पुराणों की गाथा, भाग-3, जब सूत जाति के रोमहर्षण और उग्रश्रवा ब्राह्मण बन गए ब्रेकिंग इंडिया पावर्स को भारत को तोड़ने के लिए हिन्दू संस्कृति पर प्रहार करती हैं, आखिर हिन्दू संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है। उसी षड्यंत्र का हिस्सा है मध्यकाल में उपजे जातिवाद को प्राचीन सिद्ध करके तथाक

16 जुलाई 2017 · 6 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

जानिए क्या है कैलाश मानसरोवर और राम जन्मभूमि में रिश्ता?

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार बनने के कुछ दिन बाद ही घोषणा की थी कि कैलाश मानसरोवर जाने वाले हिन्दू तीर्थयात्रियों को 1 लाख रूपए सरकार की ओर से दिए जाएँगे, इस फैसले के प्रति हिन्दू समाज में काफी उत्साह देखा गया था। हिन्दूओं में वर्तमान योगी सरकार से राम मन्दि

16 जुलाई 2017 · 3 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

भगवान वेदव्यास की वेदना...

"मैं दोनों हाथ उठाकर पुकार पुकार कर कह रहा हूँ परन्तु मेरी बात कोई नहीं सुनता। धर्म पालन के मार्ग पर मोक्ष तो मिलता ही है, अर्थ और काम भी सिद्ध होते हैं, फिर भी लोग उसका सेवन क्यों नहीं करते?" - महर्षि वेदव्यास, महाभारत, स्वर्गारोहण पर्व, 5/62 ऋग्, यजु, साम और अथर्ववेद के रूप में

13 जुलाई 2017 · 3 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

प्रश्नोपनिषद के गुरु और शिष्य की बातें

प्रश्नोपनिषद का प्रारम्भ इस प्रकार होता है कि सुकेशा, शिविकुमार, सत्यकाम, सौर्यायणि, कौसल्य, भार्गव और कबन्धी, यह ब्रह्मनिष्ठ ऋषि परब्रह्म की खोज करते हुए कि, "वह ब्रह्म क्या है?" इत्यादि जिज्ञासा लेकर उसकी खोज में आचार्य पिप्पलाद के पास हाथों में समिधा लेकर इस भावना से जाते हैं

13 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू धर्म में क्यों महत्वपूर्ण हैं पुराण?

पुराणों की गाथा, भाग-1 फूलपत्तियों और फलों से लदी हुई बहुत सी टहनियों वाला हिन्दू धर्म का वटवृक्ष वेदों की गहराई तक फैली जड़ों पर टिका हुआ है, पर उसका तना क्या है? उसका तना है पुराण। अगर हिन्दू धर्म को एक बहुमंजिला भव्य इमारत कहा जाए तो वेद उसकी नींव कहा जाएगा और 'पुराण' उसके खम्भ

5 जुलाई 2017 · 4 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

महारानी पद्मिनी और उनके जौहर की गाथा...

पद्मिनी स्कूल की बात है, स्कूल में जब कोई टीचर नहीं आते थे तो उनकी जगह टेम्परेरी टीचर कुछ दिन के लिए पढ़ाने आते थे। तब मैं सातवीं क्लास में था और हमारी हिन्दी की मैम एक दो महीने के लिए बाहर गयीं थीं। उनकी जगह एक नीरज सर पढ़ाने आने लगे। टेम्परेरी टीचर्स अक्सर मस्त होते हैं, मज़े में

28 जनवरी 2017 · 6 मिनट का पाठ