RSS

विषय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आधुनिक भारतीय राजनीति और समाज-जीवन का एक प्रभावशाली संगठन रहा है। इसके इतिहास, विचारधारा और भूमिका पर लेख यहाँ संकलित हैं।

Best Articles

श्रेष्ठ आलेख

राजनीति · इतिहास

डॉ. हरवंशलाल ओबराय - हिन्दू संस्कृति के प्रखर संरक्षक

महान् कर्मयोगी डॉ. हरवंशलाल ओबराय का जन्म दिनांक 21 अक्टूबर, 1925 को रावलपिण्डी के एक पंजाबी खत्री दम्पति श्री धर्मचन्द्र एवं रामकौर ओबराय के घर में हुआ था। सन् 1947 में देश-विभाजन के पश्चात् उनको सपरिवार भारत आना पड़ा। हरवंशलाल ओबराय जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता थे। ब

Gunjan Aggrawala · 28 जुलाई 2021 · 5 मिनट

धर्म · संस्कृति

हिन्दू संगठन व जातिवाद पर सावरकर और गोलवलकर

जाति और हिन्दू संगठन पर दोनों वाक्यों को ध्यान से पढिये और अंतर समझिए। 1. "जब तक हिन्दू में जातिभाव समाप्त नहीं होता, हिन्दू संगठन और हिन्दू जागरण असम्भव है।" - वीर सावरकर 2. "यदि हिन्दू जागृत हो गया तो वह स्वतः संगठित हो जाएगा और जातिभेद की चुनौती को बहुत अच्छे से प्रत्युत्तर दे

11 जुलाई 2021 · 1 मिनट का पाठ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या करता और मानता है?
धर्म · संस्कृति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या करता और मानता है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या करता और मानता है? जब मैं छोटा था तब स्कूल में एक व्यक्ति ने धूम्रपान पर भाषण दिया था। वह भाषण इतना जबरदस्त था कि बाद में कई वर्ष तक मैं यही सोचता था कि दुनिया की सभी समस्याओं की जड़ धूम्रपान ही है। मेरा मानना था कि जिस दिन धूम्रपान समाप्त होगा, संसार स

8 जुलाई 2021 · 7 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

श्रीगुरुजी गोलवलकर का पुण्य स्मरण

पुण्य स्मरण है उन परमपूजनीय श्रीगुरुजी माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर का जिन्हें माधव कहकर याद किया जाता है। सम्भवतया इसलिए रखा होगा उनके माता पिता ने 'माधव' नाम कि उनकी 9वीं व एकमात्र जीवित सन्तान बच पाए थे वे, माधव की तरह ही, पर क्या पता था कि यही सन्तान आगे चलकर महाभारतनायक गीताप्र

30 जून 2021 · 7 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

क्या सौरव गांगुली बन सकते हैं बंगाल के मुख्यमंत्री !

2000 में कप्तान के रूप में भारतीय क्रिकेट टीम की बागडोर संभालने वाले गांगुली को कई चीजों की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है । टीम के खेलने के तरीके में प्रतिमान बदलाव लाने से लेकर टीम में अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को पूरी तरह से समर्थन देने के लिए, टीम में आक्रामकता पैदा करने के

4 मार्च 2021 · 2 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

अमेरिका द्वारा फिदेल कास्त्रो को मारने की विचित्र योजनाएँ

उसके पूर्व गुप्तचरसेवा प्रमुख के अनुसार, फिदेल कास्त्रो अपने जीवन जीवन में ह्त्या के कम से कम 634 प्रयासों से बचा था। वह आंकड़ा सही हो या नहीं पर क्यूबा के इस तानाशाह ने सीआईए द्वारा नियोजित अनेकों और विचित्र हत्या योजनाओं को असफल किया था। उन ह्त्या प्रयासों से हम यहाँ 6 प्रमुख व

3 मार्च 2021 · 3 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

कितनी पावरफुल है इजरायली लॉबी!

20 वीं सदी की शुरुआत से ही जातीय अल्पसंख्यक हित समूहों ने अमेरिका की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक गुट जो प्रभाव के संदर्भ में सबसे आगे खड़ा है, वह इजरायल समर्थक दबाव समूहों का गुट है। दशकों तक इजरायल के लिए अमेरिका का समर्थन एक निश्चित सत्य रहा है, लेकिन कभी-क

2 मार्च 2021 · 4 मिनट का पाठ

कम्युनिज्म (वामपंथ) के खोखलेपन पर श्री गुरुजी गोलवलकर के विचार
राजनीति · इतिहास

कम्युनिज्म (वामपंथ) के खोखलेपन पर श्री गुरुजी गोलवलकर के विचार

"हमारे देश में जनतंत्र की गम्भीर असफलताओं में कम्युनिज्म की बढ़ती हुई विभीषिका है, जो जनतान्त्रिक विधान की मानी हुई शत्रु है। जनता के समक्ष की गई अपनी आर्थिक अपील में कम्युनिस्टों से कही पिछड़ न जायें, इस प्रयास से हमारे नेतागण कम्युनिस्टों की ही भाषा तथा कार्यक्रमों को स्वयं भी

15 अक्टूबर 2020 · 5 मिनट का पाठ

खतरनाक ईसाई चरित्र पर श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार
धर्म · संस्कृति

खतरनाक ईसाई चरित्र पर श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार

"जहाँ तक ईसाइयों का सम्बन्ध है, ऊपरी तौर से देखने वाले को तो वे नितान्त निरूपद्रवी ही नहीं वरन् मानवता के लिए प्रेम एवं सहानुभूति के मूर्तिमान स्वरूप प्रतीत होते है। उनकी वक्तृतायें 'सेवा' एवं 'मानवोद्धार' जैसे शब्दों से परिपूर्ण रहती है। और उनसे ऐसा प्रतीत होता है मानो उस सर्वशक

14 अक्टूबर 2020 · 4 मिनट का पाठ

विभाजन के बाद मुसलमान संकट पर श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार
धर्म · संस्कृति

विभाजन के बाद मुसलमान संकट पर श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार

मुसलमानों की स्वाभाविक प्रवृत्ति व तद्जनित आसन्न राष्ट्रीय संकट के बारे में श्रीगुरुजी की स्पष्ट धारणा उनकी पुस्तक "विचार नवनीत" (Bunch of Thoughts) से मिलती है, श्रीगुरुजी कहते हैं, "विभाजन के बाद यह कहने वाले अनेकों लोग मौजूद हैं कि अब मुसलमान समस्या बिल्कुल नहीं रही। पाकिस्तान

13 अक्टूबर 2020 · 4 मिनट का पाठ

संघ प्रतिशोध क्यों नहीं लेता?
धर्म · संस्कृति

संघ प्रतिशोध क्यों नहीं लेता?

संघ के एक कार्यकर्ता की सपरिवार हत्या कर दी गई- मुर्शिदाबाद में। कुल 4 हत्याएं, अत्यंत वीभत्स और दर्दनाक। संघ प्रतिशोध क्यों नहीं लेता? यह कोई पहली घटना नहीं है। अनेक निर्दोष स्वयंसेवकों की हत्याएं हुईं हैं। जो दल सत्ता में है उसके संस्थापकों की भी हत्याएं हुईं थीं। दीनदयाल उपाध्

12 अक्टूबर 2019 · 5 मिनट का पाठ

गुरु गोविन्द सिंह - एक महान कर्मप्रणेता, अद्वितीय धर्मरक्षक
राजनीति · इतिहास

गुरु गोविन्द सिंह - एक महान कर्मप्रणेता, अद्वितीय धर्मरक्षक

सिखपंथ के दशम गुरू, गुरू गोविन्द सिंह एक महान कर्मप्रणेता, अद्वितीय धर्मरक्षक, ओजस्वी वीर रस के कवि के साथ ही संघर्षशील वीर योद्धा भी थे। उनमें भक्ति और शक्ति, ज्ञान और वैराग्य, मानव समाज का उत्थान और धर्म एवं राष्ट्र के नैतिक मूल्यों की रक्षा हेतु त्याग एवं बलिदान की भावना कूट क

6 मार्च 2019 · 6 मिनट का पाठ

जॉर्ज फर्नांडीस का जाना: राष्ट्रवाद के एक स्वर्णिम युग का अंत
राजनीति · इतिहास

जॉर्ज फर्नांडीस का जाना: राष्ट्रवाद के एक स्वर्णिम युग का अंत

जॉर्ज फर्नांडीस नहीं रहे| अल्जाइमर के चलते याददाश्त भुला देने से यादों से तो वो बहुत पहले ही ओझल हो गए, आज इस दुनिया से भी हमेशा के लिए ओझल हो गए| पीछे रह गयीं उनकी यादें जो उन्हें अवश्य भावुक करती रहेंगी जिनके लिए वो अनथक विद्रोही और गैर-कांग्रेसवाद के सबसे बड़े स्तम्भ थे| आपातक

30 जनवरी 2019 · 4 मिनट का पाठ

भारत रत्न प्रणब मुखर्जी: एक शानदार प्रधानमंत्री जो मिल न सका
राजनीति · इतिहास

भारत रत्न प्रणब मुखर्जी: एक शानदार प्रधानमंत्री जो मिल न सका

दीनदयाल उपाध्याय, माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट की श्रेणी में रखे जाने के लिए आवश्यक नहीं कि आपकी हत्या ही की जाए बल्कि आपको राष्ट्रपति भी बनाया जा सकता है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उनकी जिन्हें पूरा देश दादा कहता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 'पोल्टू दा' एक बेहतरीन

25 जनवरी 2019 · 4 मिनट का पाठ

देवेन्द्र स्वरूप नहीं रहे: एक प्रकाश स्तंभ का बुझ जाना
धर्म · संस्कृति

देवेन्द्र स्वरूप नहीं रहे: एक प्रकाश स्तंभ का बुझ जाना

बिहार में 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' कार्य प्रचार होने के बिलकुल शुरूआती दौर की बात है। एक प्रचारक को बिहार में संघ कार्य शुरू करने के लिये भेजा गया था। एक किसी बड़े प्रभावशाली व्यक्ति से जब वो सम्पर्क करने गये तो कई दिनों बाद उनसे उनका मिलना हो सका। जब मिले तो उस व्यक्ति ने इस प्

14 जनवरी 2019 · 4 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

विवेकानन्द रॉक मेमोरियल - कन्याकुमारी, ऐतिहासिक संघर्ष का प्रतीक

विवेकानन्द रॉक मेमोरियल - कन्याकुमारी, एक एतिहासिक संघर्ष का प्रतीक सम्पूर्ण देश में घूमता हुआ भ्रमणशील संन्यासी भारत के दक्षिणी अंतिम छोर पर पहुंचा जहाँ पर प्राचीनकाल से भगवती कन्याकुमारी का मंदिर स्थित है। संन्यासी माँ भगवती के चरणों में गिर पड़ा। वहीं समुद्र में दो चट्टानें हैं

17 जुलाई 2018 · 8 मिनट का पाठ

समाचार · मीडिया

The Three Mistakes of BJP

16 th May 2014 was a historic moment in Indian politics. The party that was always considered “destined to be sitting in the opposition”, the party that “didn’t have it to make it large” and the party that had stemmed from the “Communal Sangh” was victorious with an absolute majo

17 मई 2018 · 10 मिनट का पाठ

बालासाहब देवरस -  सरसंघचालक जिन्होंने संघ को देशव्यापी बनाया
राजनीति · इतिहास

बालासाहब देवरस - सरसंघचालक जिन्होंने संघ को देशव्यापी बनाया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक श्री मधुकर दत्तात्रेय देवरस उपाख्य बालासाहब देवरस ‘सामाजिक समरसता और सेवाकार्यों द्वारा सामाजिक उत्थान’ के पुरोधा के रूप में जाने जाते हैं। बाल्यकाल से जीवन के अंतिम क्षण समाज में फैले कुरीतियों, विषमताओं और अभावों को दूर करने के लिए उन्

23 मार्च 2018 · 5 मिनट का पाठ

सौन्दर्य प्रतियोगिताओं के सामाजिक एवं आर्थिक निहितार्थ
राजनीति · इतिहास

सौन्दर्य प्रतियोगिताओं के सामाजिक एवं आर्थिक निहितार्थ

तो मानुषी छिल्लर को मिल गया सौन्दर्य ताज और आप लहालोट हो उछलने लगे। छिल्लर ने कह दिया कि मां को मातृत्व और उसकी ममता का मूल्य सैलरी में मिलना चाहिए और आपको यह बड़ी अच्छी बात लगी। कसम से आपकी क्यूटनेस को नमन रहेगा। अब जरा पिछले पंद्रह दिनों के घटनाओं पर नजर डालिए। मूडीस(टाम मूडी नह

22 नवम्बर 2017 · 8 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

विनयकृष्ण बसु : दो-दो अंग्रेज आई.जी. अधिकारियों का वध करने वाले

कल भारतमाता को दासता की बेड़ियों से मुक्त कराने के संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर बलिदानी विनयकृष्ण बसु का जन्मदिवस है| उनका जन्म वर्तमान बंगलादेश के मुंशीगंज जिले के रोहितभोग में इंजीनियर रेबतीमोहन बसु के घर 11 सितम्बर 1908 में हुआ था| मैट्रिक की पढाई के बाद उन्ह

10 सितम्बर 2017 · 3 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

मदनलाल धींगरा : लन्दन में अंग्रेज अधिकारी को गोली मारने वाले

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन अनेक क्रांतिकारियों के संघर्षों, त्यागमय कार्यों तथा साहसिक गतिविधियों की अमर गाथा है, परन्तु देश की आजा़दी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले इन महान क्रां‍तिकारियों का उल्लेख करने में आधुनिक इतिहासकारों ने अत्यधिक कृपणता दिखाई है। हमें ये सिखाया

23 अगस्त 2017 · 29 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

चंद्रशेखर आज़ाद - आज़ाद था आज़ाद हूँ आज़ाद रहूँगा.

यों देखा जाए तो 1857 के महायुद्ध से बहुत पहले ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध देशवासियों का संघर्ष शुरू हो चुका था। सत्तावन का विप्लव बहुत संगठित रूप में सामने आया और इसीलिए दुनिया उसे जान पायी। यह महासंग्राम दबा दिया गया पर भारतीय समाज में इसकी अनुगूँज देर तक बनी रही। भले ही ऊपर

24 जुलाई 2017 · 29 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

हरगोपाल बल : 13 वर्ष की आयु में अंग्रेजों से युद्ध करके वीरगति पाने वाले

22 अप्रैल चटगाँव शस्त्रागार पर हमला करके अंग्रेजों को नाकों चने चबवा देने वाले क्रातिकारियों में से एक और इस हमले की अगुआई कर रहे मास्टर सूर्य सेन के प्रमुख साथी लोकनाथ बल के छोटे भाई हरगोपाल बल का निर्वाण दिवस है| वर्तमान बांग्लादेश के चटगाँव जिले के कानूनगोपारा नामक गाँव में अप

16 जुलाई 2017 · 4 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

रासबिहारी बोस : आजाद हिन्द फौज के संस्थापक, हार्डिंग पर बम फेंकने वाले

देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले क्रांतिकारियों का जब जब जिक्र होगा, 1911 से 1945 तक अनवरत अपने आपको भारत की आज़ादी की लड़ाई के लिए तिल तिल गलाने वाले महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस का नाम हमेशा आदर के साथ लिया जाता रहेगा, जिनका 25 मई को जन्मदिवस है। रासबिहा

27 जून 2017 · 16 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

करतार सिंह सराभा : उन्नीस वर्ष की आयु में फांसी पर चढ़ने वाले वीर

24 मई एक ऐसे अमर शहीद का जन्मदिवस है जिसका नाम भी हम में से बहुतों ने नहीं सुना होगा पर जिसने उस आयु में जब हम आप अपने परिवार के प्रति भी अपना उत्तरदायित्व नहीं समझते, खुद को देश पर बलिदान कर दिया| मात्र 19 वर्ष की आयु में मातृभूमि के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले इस हुत

27 जून 2017 · 7 मिनट का पाठ