Sanskrit Language

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संस्कृत भाषा

संस्कृत भारतीय शास्त्र, साहित्य और चिंतन की मूल भाषा रही है। इसके व्याकरण, इतिहास और वर्तमान प्रासंगिकता पर लेख यहाँ संकलित हैं।

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श्रेष्ठ आलेख

धर्म · संस्कृति

सर्वधर्मसमभाव के प्रतिकार में आत्मघाती कमियां

विगत ९० वर्षों में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति बढ़ जाने से भारतीय संस्कृति को बहुत क्षति पहुंची है। अली मौला अल्लाह को ईश्वर के समतुल्य दिखा कर छद्म धर्मनिरपेक्षता ने हमारी मूल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को पंगु बना दिया है। परिभाषिक दृष्टि से भी रिलीजन और मजहब धर्म से भिन्न

प्रतिज्ञ · 18 सितम्बर 2021 · 8 मिनट

राजनीति · इतिहास

साहित्य क्षेत्र में गुण्डागर्दी की कभी न भूलने वाली दास्तान..

साहित्य भारतीय इतिहास एवं संस्कृति के प्रकाण्ड विद्वान् और ओजस्वी वक्ता तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरवंशलाल ओबराय (1925-1983) को जाननेवाले और बतानेवाले अब कम ही लोग जीवित हैं। आज डॉ. ओबराय जी की न तो जन्मतिथि है और न ही पुण्यतिथि। किन्तु आज स

28 जुलाई 2021 · 20 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

डॉ. हरवंशलाल ओबराय - हिन्दू संस्कृति के प्रखर संरक्षक

महान् कर्मयोगी डॉ. हरवंशलाल ओबराय का जन्म दिनांक 21 अक्टूबर, 1925 को रावलपिण्डी के एक पंजाबी खत्री दम्पति श्री धर्मचन्द्र एवं रामकौर ओबराय के घर में हुआ था। सन् 1947 में देश-विभाजन के पश्चात् उनको सपरिवार भारत आना पड़ा। हरवंशलाल ओबराय जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता थे। ब

28 जुलाई 2021 · 5 मिनट का पाठ

ज्योतिष

'श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पंचांग' केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में विमोचित

चैत्र अमावस्या, २०७७, 12 अप्रैल, 2021 को केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के डॉ. हिन्दकेसरी सभागार में राजस्थान के एकमात्र सूर्यसिद्धान्त गणना पर आधारित पञ्चाङ्ग श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पञ्चाङ्ग का विमोचन विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. अर्कनाथ चौधरी तथा श्रीनिम्बार्क परिषद् क

13 अप्रैल 2021 · 5 मिनट का पाठ

ज्योतिष

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में पंचांग सम्पादन कार्यशाला आयोजित

आगामी संवत् 2078 से श्रीनिम्बार्क परिषद् , जयपुर द्वारा केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , जयपुर परिसर के सहयोग से राजस्थान का एकमात्र सूर्यसिद्धान्तीय पंचांग ' श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पंचांग ' प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है। इस हेतु पंचांग में व्रतपर्वोत्सवों-मुहूर्त्तादि के

27 मार्च 2021 · 4 मिनट का पाठ

पाकिस्तान का संविधान - एक विश्वस्तरीय मज़ाक
राजनीति · इतिहास

पाकिस्तान का संविधान - एक विश्वस्तरीय मज़ाक

पाकिस्तान का निर्माण मजहबी कट्टरता के उस सिद्धान्त के आधार पर हुआ जो यह मानता है कि इस्लाम किसी अन्य संस्कृति के साथ सह अस्तित्व से नही रह सकता। उसके संविधान का मुख्य प्रेरक तत्त्व भी यही सिद्धान्त रहा। मार काट हत्या बलात्कार के बीच हो रहे बँटवारे के बीच नवोदित इस्लामिक राज्य पाक

31 अगस्त 2020 · 5 मिनट का पाठ

क्या अभिजीत बनर्जी पर देश को गर्व है?
राजनीति · इतिहास

क्या अभिजीत बनर्जी पर देश को गर्व है?

पाश्चात्य संस्कृति के प्रसार−प्रचार में नोबेल पुरस्कार जैसे हथकण्डों का खुलकर प्रयोग होता रहा है। रूस के ज़ार को बुरा न लगे इस कारण तॉल्स्तॉय को नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया,हालाँकि पश्चिम में भी हर कोई मानता आया है कि उनसे श्रेष्ठ साहित्यकार विश्व में कोई नहीं था। नोबेल पुरस्कार

23 दिसम्बर 2019 · 10 मिनट का पाठ

Buddha was a Hindu.
धर्म · संस्कृति

Buddha was a Hindu.

Some years ago, I met an American from Seattle, who studied Sanskrit at the university there. He had come to India to meet his guru and had even taken an Indian name. He told me that westerners, including professors, at his university who had accepted Buddhism had no hesitation t

22 अक्टूबर 2019 · 6 मिनट का पाठ

इतने साल पहले हुआ था भगवान श्रीराम का जन्म
संस्कृत · शास्त्र

इतने साल पहले हुआ था भगवान श्रीराम का जन्म

सनातन संस्कृति कालसापेक्ष नहीं है, इसलिए सनातन कहलाती है। जो तीनों कालों का परंपरा से चला आ रहा शाश्वत धर्म समय से परे है वह सनातन है। पर आधुनिक विज्ञानवाद से प्रभावित लोगों की बुद्धि भौतिक पैमानों पर ही जवाब दे जाती है। श्रीराम के जन्मकाल पर काफी विवाद किया जाता है। पर इस का निर

13 सितम्बर 2019 · 8 मिनट का पाठ

What Signifies the Triveni in Prayagraj?
धर्म · संस्कृति

What Signifies the Triveni in Prayagraj?

Prayaga, the site of the ongoing Ardha Kumbha Mela, is the place of what is called the ‘triveni’ (‘triveṇī’,त्रिवेणी). Where does this word come from? Let us first see what two ‘authentic’ foreign dictionaries say on this word. Wilson Sanskrit-English dictionary (1832): त्रि thre

18 जनवरी 2019 · 2 मिनट का पाठ

गोकुला जाट- भारतीय इतिहास के एक भूले हुए नायक
राजनीति · इतिहास

गोकुला जाट- भारतीय इतिहास के एक भूले हुए नायक

विश्व की सभ्यताओं तथा संस्कृतियों के सृजन तथा विकास में भारत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्राचीनतम देशों में होने के कारण यह देश विश्व की अनेक घुमक्कड़ जातियों, कबीलों तथा काफिलों की शरणस्थली रहा है। यूनानी, ईरानी, शक, हूण, पठान तथा मुगल समय-समय पर भारत में घुसपैठ करते रहे हैं,

6 जनवरी 2019 · 17 मिनट का पाठ

सज गया प्रयागराज. तस्वीरों में देखिए कुम्भ मेला
धर्म · संस्कृति

सज गया प्रयागराज. तस्वीरों में देखिए कुम्भ मेला

प्रयागराज में आगामी मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक अर्धकुम्भ का आयोजन हो रहा है जो हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति का एक अद्भुत और महत्वपूर्ण अंग है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुम्भ की तैयारियों में जोरशोर से जुटे हुए हैं। प्रयाग कुम्भ को पूरे विश्व में पहचान दिला

5 जनवरी 2019 · 1 मिनट का पाठ

समाचार · मीडिया

संस्कृत प्रोफेसरों ने दिया जंतर मंतर पर धरना. कब आएंगे अच्छे दिन?

दिल्ली. लम्बे समय से अपने नियमितीकरण की मांग कर रहे राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के अस्थाई व्याख्याता गुरुवार को जंतर मंतर पर धरना देने को एकजुट हुए। और सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन देश में दस से अधिक परिसरों वाले संस्कृत के सबसे बड़े

27 दिसम्बर 2018 · 4 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

योगी सरकार ने ऐसे दूर की कुम्भ को लेकर पुरी शंकराचार्य की शिकायत..

प्रयागराज में आगामी मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक अर्धकुम्भ का आयोजन हो रहा है जो हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति का एक अद्भुत और महत्वपूर्ण अंग है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुम्भ की तैयारियों में जोरशोर से जुटे हुए हैं। प्रयागराज कुम्भ को पूरे विश्व में पहचान द

19 दिसम्बर 2018 · 5 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

सच्चे प्रेम की मिसाल है जनकनंदिनी और रघुनंदन का प्रेम

भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी की कई आदर्श जोड़ियां मौजूद है पर उनमें सबसे आदर्श जिस जोड़ी को माना जाता है वो रघुनंदन श्री राम और जनकनंदिनी सीता जी की जोड़ी है। ये सबसे आदर्श जोड़ी इसलिये मानी जाती है क्योंकि पति और पत्नी के प्रेम संबंधों की जितनी श्रेष्ठता इस जोड़ी में मिलती है व

6 अक्टूबर 2018 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

तमिल को संस्कृत से प्राचीन बताना अंग्रेजों का षड्यंत्र

प्रधानमंत्री हुए भारत विरोधी दुष्प्रचार का शिकार तमिल भाषा एक बार फिर से चर्चा में है। कारण पीएम मोदी द्वारा 'मन की बात' में तमिल को संस्कृत से प्राचीन बताया गया। इससे पहले भी छात्रों से वार्तालाप के समय फरवरी में भी पीएम मोदी द्वारा यही कहा गया था। प्रधानमंत्री ने जाने या अनजाने

29 अगस्त 2018 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

सोमरस के बारे में वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

प्राच्य संस्कृतियों के अधिकतर विरोधियों की मान्यता रही है कि वैदिक ऋषि जो सोमरस पीते थे वह शराब थी। बच्चन के बाउजी बड़के बच्चन साहब ने तो पूरी कविता ही झोंक रखी है इसी कुत्सित सोच के आस पास। सोम सुरा पुरखे पीते थे, हम कहते उसको हाला, द्रोणकलश जिसको कहते थे, आज वही मधुघट आला, वेदिव

2 फ़रवरी 2018 · 7 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

केन्द्रीय विद्यालयों में संस्कृत प्रार्थना पर बैन क्यों?

केन्द्रीय विद्यालयों में संस्कृत प्रार्थना पर बैन क्यों? असतो मा सदगमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥ मृत्योर्मामृतम् गमय ॥ हमें असत्य से सत्य की ओर ले चलो ॥ अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो ॥ मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो ॥ Lead me from falsehood to truth, Lead me from darkness to light, L

11 जनवरी 2018 · 5 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

स्वामी श्रद्धानंद आज और भी प्रासंगिक हैं

वैदिक धर्म, वैदिक संस्कृति, और आर्य जाति की रक्षा के लिए, मरणासन्न अवस्था से उसे पुनः प्राणवान एवं गतिवान बनाने के लिए और उसे सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाने के लिये आर्य समाज ने सैंकड़ों बलिदान दिए हैं । और उसमें प्रथम पंक्ति के प्रथम पुष्प हैं स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती । जिनका 23 दिस

23 दिसम्बर 2017 · 11 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

महर्षि वेदव्यास कौन हैं? आइये जानें

पुराणों की गाथा, भाग-2 हिन्दूओं में एक बहुत बड़ा दुष्प्रचार फैलाया गया है कि वेदव्यास कृत पुराण नवीन ग्रन्थ हैं। पुराण नाम से स्पष्ट है कि इसका सम्बन्ध पुराना से है। किसी संस्कृति को खत्म करने के लिए उसके इतिहास को मिटाना पुरानी परम्परा रही है, पुराणों का अपमान करना उसी रीति का अन

20 दिसम्बर 2017 · 3 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

आद्य शंकराचार्य का अद्भुत मंगलाचरण...

संस्कृत साहित्य में ग्रन्थ के प्रारम्भ में मंगलाचरण की सुदीर्घ परम्परा है। सभी उपनिषदों का अपना मंगलाचरण है। मंगलाचरण के बिना कोई कार्य प्रारंभ करें तो उसमें विघ्न पड़ने की आशंका रहती है। पुस्तक के ऊपर श्रीगणेशाय नमः लिखना भी मंगलाचरण ही है। परन्तु भाष्यकार भगवान शंकराचार्य के ब्र

18 दिसम्बर 2017 · 2 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

वेदमूर्ति पण्डित श्रीपाद दामोदर सातवलेकर का पुण्य स्मरण

वेदविद्या का अनुशीलन करने के पक्षपाती लोगों में पण्डितजी का नाम ही पर्याप्त परिचय है। वैदिक साहित्य और संस्कृत को जनसामान्य की पहुंच में लाने का ऐसा महनीय कार्य उन्होंने किया था। जैसा करने की इच्छा कभी दयानन्द स्वामी ने की थी। स्वामी दयानन्द ने हिन्दी को वेदभाष्य की भाषा बनाकर वे

19 सितम्बर 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आखिर क्या है अघोरी पंथ का गुप्त रहस्य..

महादेव के पंचम मुख अघोर द्वारा उद्भूत मुक्ति का मार्ग तंत्र में अघोर के नाम से विख्यात है। (यद्यपि अज्ञानता और सनातन संस्कृति के खंडन के षड्यंत्रों के कारण अब यह कुख्यात अधिक है)। अघोर मार्ग के अनुयायी अघोरी कहलाते हैं। जो घोर(जगत प्रपंच की मधुर मोहिनी माया और भेद बुद्धि रुपी अवि

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

सती प्रथा एक काल्पनिक प्रथा थी और कभी भी हिंदुओं में चलन में नहीं थी

सती प्रथा एक काल्पनिक प्रथा थी और कभी भी हिंदुओं में चलन में नहीं थी इसे साबित करने में 30 सेकंड से अधिक का समय नहीं लगेगा। कैसे ????? देखिये सती शब्द संस्कृत के सत से बना है मतलब सत्य या सच्चा। महिलाओं के संदर्भ में सती का अर्थ हुआ सच्ची पत्नी या वफादार पत्नी। सती अनुसुइया की कह

29 जुलाई 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आधुनिक विज्ञान की नजर में मटकों से सौ कौरवों का जन्म

हमारे भारतीय ग्रन्थों में बहुत से ऐसे प्रसंग हैं जिनमें गहरी वैज्ञानिक बातें छिपी हुई हैं पर हम लोगों के उनपर शोध न करने के कारण वे सामने नहीं आ पातीं। हमारे मन का एक कोना जानता तो है कि भारत ने प्राचीन काल में ही एक बेहद समृद्ध संस्कृति का सृजन किया था जिसमें विज्ञान भी विकास के

23 जुलाई 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

जब सूत जाति के रोमहर्षण और उग्रश्रवा ब्राह्मण बन गए

पुराणों की गाथा, भाग-3, जब सूत जाति के रोमहर्षण और उग्रश्रवा ब्राह्मण बन गए ब्रेकिंग इंडिया पावर्स को भारत को तोड़ने के लिए हिन्दू संस्कृति पर प्रहार करती हैं, आखिर हिन्दू संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है। उसी षड्यंत्र का हिस्सा है मध्यकाल में उपजे जातिवाद को प्राचीन सिद्ध करके तथाक

16 जुलाई 2017 · 6 मिनट का पाठ