Vrata & Sanskara

विषय

व्रत · संस्कार

व्रत और संस्कार भारतीय जीवन-चक्र की वे रीतियाँ हैं जो शास्त्र, लोकाचार और पारिवारिक परंपरा के संगम पर टिकी हैं। श्राद्ध, पितृपक्ष और अन्य संस्कारों पर सामग्री यहाँ है।

Best Articles

श्रेष्ठ आलेख

कन्यादान हो या वरदान! अब आप ही बताईये क्या बुराई है?
धर्म · संस्कृति

कन्यादान हो या वरदान! अब आप ही बताईये क्या बुराई है?

क्या कन्यादान सिर्फ खैरात है? क्यों होता है कन्यादान और क्या यह स्त्री का अपमान है? जानिए हिन्दू विवाह संस्कार में कन्यादान का सही अर्थ, उसका सांस्कृतिक और वैदिक महत्व। पढ़ें वरदान बनाम कन्यादान की सच्ची व्याख्या, ब्रह्म विवाह का रहस्य और उन कुतर्कों का उत्तर जो हिन्दू परम्पराओं को गलत साबित करते हैं।

अमित शर्मा · 22 सितम्बर 2021 · 5 मिनट

ज्योतिष

शास्त्रानुसार व्रतोपवासादि में सूर्यसिद्धान्तीय पञ्चाङ्ग ही ग्राह्य

लेखक:- पण्डित गङ्गाधर पाठक ‘वेदाद्याचार्य’ (मुख्याचार्य- श्रीरामजन्मभूमिशिलापूजन, अयोध्या) प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी से अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर का शिलान्यास करवाते मुख्य पुरोहित आचार्य श्री गंगाधर पाठक साङ्गोपाङ्गाय वेदाय ज्योतिषां ज्योतिषे नमः । सूर्याय सूर्यसि

29 मई 2021 · 6 मिनट का पाठ

ज्योतिष

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में पंचांग सम्पादन कार्यशाला आयोजित

आगामी संवत् 2078 से श्रीनिम्बार्क परिषद् , जयपुर द्वारा केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , जयपुर परिसर के सहयोग से राजस्थान का एकमात्र सूर्यसिद्धान्तीय पंचांग ' श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पंचांग ' प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है। इस हेतु पंचांग में व्रतपर्वोत्सवों-मुहूर्त्तादि के

27 मार्च 2021 · 4 मिनट का पाठ

राजनीति · इतिहास

क्या है 21 तोपों की सलामी का इतिहास

यदि आप कभी भी एक सैन्य अंतिम संस्कार या स्मारक समारोह में भाग लेते हैं, तो आप सैनिकों के समूह को गर्व से राइफल पकड़े हुए देख सकते हैं। फिर, एक विशिष्ट समय में, वे अपने हथियारों को आकाश को निशाना बनाते हैं और फायर करते हैं। यह प्रथा दुनिया भर में काफी आम है और कई परंपराओं के साथ,

6 मार्च 2021 · 2 मिनट का पाठ

26 दिन उपवास कर ऐसे वीर सावरकर ने बुलाया मृत्यु को..
राजनीति · इतिहास

26 दिन उपवास कर ऐसे वीर सावरकर ने बुलाया मृत्यु को..

"आ मृत्यु...आ...तू आ" 83 वर्ष की आयु में वीर सावरकर ने हिन्दू साधुओं की प्राचीन परंपरा अपनाकर, 1 फरवरी, तिथि माघ शुक्ल एकादशी को अन्न, जल और दवाइयों का त्याग कर दिया। उनका कहना था, "जब जीवन मिशन पूरा हो जाए, और समाज की सेवा करने लायक ताकत न बचे, तब मृत्यु का स्वयं वरण कर लेना चाह

20 दिसम्बर 2019 · 3 मिनट का पाठ

The Science Behind Shraddh
संस्कृत · शास्त्र

The Science Behind Shraddh

Where does this soul go after death? Its description is found in detail in the Chandogya Upanishad of the Tandya Mahabrahman of Samaveda . There are three movements of the Jeeva described there, out of which we will talk about the movement towards the chandraloka (चंद्रलोक) in wh

12 सितम्बर 2019 · 8 मिनट का पाठ

The Truth Behind The Worship of Shiva Linga
धर्म · संस्कृति

The Truth Behind The Worship of Shiva Linga

On the day of Mahashivratri, you must have observed your parents or grandparents worship the Shiva Linga in the morning. They might have even asked you to come to the temple with them to bathe the linga with water or milk and you may or may not have accompanied them for various r

2 मार्च 2019 · 6 मिनट का पाठ

नायपॉल - नोबेल पुरस्कार विजेता प्रखर हिन्दू विचारक
संस्कृत · शास्त्र

नायपॉल - नोबेल पुरस्कार विजेता प्रखर हिन्दू विचारक

विद्याधर नायपॉल - नोबेल पुरस्कार विजेता प्रखर हिन्दू विचारक कहते हैं कि जब घर में आग लग जाए तो उसे बुझाने के लिये घर से बाहर निकलना पड़ता है। घर में लगी आग की तीव्रता कितनी है इसे देखने के लिये बाहर निकलना ही पड़ता है क्योंकि घर के अंदर रहकर आप घर में लगी आग की तीव्रता नहीं देख स

13 जनवरी 2019 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्यों बिगड़ रहे हैं युवा ? क्या सुधारने का कोई रास्ता है?

योगसूत्र के अनुसार कुसंस्कार बनते हैं पूर्व जन्म और इस जन्म के लगातार किए जा रहे बुरे कर्मों से। यह कुसंस्कार ही हैं वह कचरा जो कि चित्त पर इकट्ठा होता रहता है। इसलिए आजकल चित्त क्या बन गया है? डस्टबिन या डंपयार्ड!! कई बार न्यूज़ आती है कि कचरे का पहाड़ ढहने से इतने लोगों की मौत हो

4 नवम्बर 2017 · 5 मिनट का पाठ

ज्योतिष

दक्षिणा देने से ही क्यों मिलता है धार्मिक कर्मों का फल.

यजुर्वेद में एक बहुत सुंदर मन्त्र(१) है, वह कहता है ब्रह्मचर्य आदि व्रतों से ही दीक्षा प्राप्त होती है अर्थात् ब्रह्मविद्या या किसी अन्य विद्या में प्रवेश मिलता है। फिर दीक्षा से दक्षिणा अर्थात् धन समृद्धि आदि प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। यहाँ दक्षिणा मिलने का अर्थ है दक्षिणा देना,

18 सितम्बर 2017 · 6 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

पितृपक्ष में क्यों है श्राद्ध का महत्व?

श्राद्ध पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है। पितरों के निमित्त विधिपूर्वक जो कर्म श्रद्धा से किया जाता है उसी को 'श्राद्ध' कहते हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार, प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारम्भ में माता-पिता, पूर्वजों को नमस्कार या प्रणाम करना हमारा कर्तव्य है । हमारे पूर्वजों

27 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आधुनिक विज्ञान से भी सिद्ध है पितर श्राद्ध की वैज्ञानिकता

मरने के बाद यह मृतात्मा कहाँ जाती है? इसका विवरण सामवेद के ताण्ड्यमहाब्राह्मण के छान्दोग्य उपनिषद में विस्तार से मिलता है। वहाँ जीव की तीन गति बताई गईं हैं जिसमें से हम चन्द्रलोक गति की बात करेंगे जिसमें पितर का श्राद्ध आवश्यक होता है। हमारे सरे पूर्वज पितर कहलाते हैं। यह सामान्य

23 जुलाई 2017 · 5 मिनट का पाठ