लेखक

अजेष्ठ त्रिपाठी

अजेष्ठ त्रिपाठी

ऑस्ट्रेलिया निवासी लेखक, हिन्दू धर्म, संस्कृति और इतिहास के गहन जानकार और शोधकर्ता हैं।

लेख

संस्कृत · शास्त्र

पहली और अंतिम बार जब एक मंच पर इकट्ठे हुए महानतम वैज्ञानिक

संयोग: जिसकी पुनरावृति कभी न हो पाई - कोई भी तस्वीर इंटरनेट पर एक बार आ जाने के बाद ‘rare photo’ नहीं कही जा सकती. Solvay Conference (सन 1927) की यह तस्वीर (दिए गए चित्र में ) भी उपरोक्त सन्दर्भ में दुर्लभ नहीं है, परंतु एक तथ्य ऐसा है जो इस तस्वीर को दुर्लभ से भी दुर्लभ बनाता है

1 जुलाई 2018 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

वर्ण क्या हैं? हिन्दू धर्म के चार वर्णों में श्रेष्ठ कौन है?

वर्ण क्या हैं? चार वर्णों में श्रेष्ठ कौन है? शूद्र वर्तमान समय मे शूद्र वर्ण खराब कपड़े पहनने वाले, गरीब लोग समझे जाते होंगे, तभी शूद्र वर्ण कहलाने में कई जातियों को समस्या होती है। आगे का मैं अपना मत दूँ, इससे पहले में एक बात स्पष्ट कर दूं, कल को मुझे कोई मेरा सही इतिहास बताकर य

21 दिसम्बर 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्यों बिगड़ रहे हैं युवा ? क्या सुधारने का कोई रास्ता है?

योगसूत्र के अनुसार कुसंस्कार बनते हैं पूर्व जन्म और इस जन्म के लगातार किए जा रहे बुरे कर्मों से। यह कुसंस्कार ही हैं वह कचरा जो कि चित्त पर इकट्ठा होता रहता है। इसलिए आजकल चित्त क्या बन गया है? डस्टबिन या डंपयार्ड!! कई बार न्यूज़ आती है कि कचरे का पहाड़ ढहने से इतने लोगों की मौत हो

4 नवम्बर 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

पितृपक्ष में क्यों है श्राद्ध का महत्व?

श्राद्ध पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है। पितरों के निमित्त विधिपूर्वक जो कर्म श्रद्धा से किया जाता है उसी को 'श्राद्ध' कहते हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार, प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारम्भ में माता-पिता, पूर्वजों को नमस्कार या प्रणाम करना हमारा कर्तव्य है । हमारे पूर्वजों

27 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्या दुनिया में सिर्फ एक ही जगह होती है जगत्पिता ब्रह्मा की पूजा?

संसार भर में जगत पिता ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर पुष्कर में स्थित है। लोगों के अनुसार इस श्राप के कारण परमपिता ब्रह्मा की केवल एक जगह पूजा होती है वो है पुष्कर और हम मान भी लेते हैं। पर क्या सच में ब्रह्माजी की पूजा सिर्फ पुष्कर में होती है? क्या उसके अलावा उनका कहीं कोई मंदिर नहीं

27 अगस्त 2017 · 5 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

क्या है महादेव द्वारा श्री गणेश के हाथी का सिर लगाने का वैज्ञानिक रहस्य?

कुछ लोगो का हमेशा ये कहना होता है कि गणेश बस एक कल्पना है किसी इंसान के सर की जगह किसी हाथी का सर कैसे हो सकता है? सर कटते ही किसी की मृत्यु हो जाती है फिर गणेश का सर कटने पे मृत्यु क्यों नही हुए सब कल्पना है। पर आज हम बताएँगे कि क्या यह सब सच में विज्ञान के विरुद्ध है? क्या सच म

27 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

शूद्र कौन थे? क्या करते थे शूद्र?

शूद्र गाँव के बाहर रहकर गाँव की रक्षा करते थे। किसानों की ज़मीन पर काम, गाँव की सीमा बताना, व्यापारियों को एक जगह से दूसरी जगह जाते वक़्त सुरक्षा देना, खेत से होने वाली फसल और राज्य के खजाने की रक्षा करने वाला और उसे एक जगह से दूसरे जगह सुरक्षित ले जाना यह सब काम शूद्रों के थे। श

10 अगस्त 2017 · 10 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

कौनसे आठ प्रकार के होते हैं ब्राह्मण ?

यूं तो ब्राह्मणों का वर्णन अनेक ग्रन्थों में मिलता है पर सबसे उत्तम तो वेद और स्मृतियों में ही मिलता है। ब्राह्मण होने का अधिकार सभी को है चाहे वह किसी भी जाति, प्रांत या संप्रदाय से हो। लेकिन ब्राह्मण होने के लिए कुछ नियमों का पालन करना होता है। उन्हीं नियमों के पालन से आठ ब्राह

9 अगस्त 2017 · 3 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार कौन होता है ब्राह्मण ?

सामान्य तौर पर हम जाति के आधार पर ही किसी को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र मानते हैं परन्तु हिन्दू धर्मग्रन्थों के अनुसार किसी के जन्म से अधिक महत्व उसके कर्मों का है। कर्मों के आधार पर ही उसे वास्तविक रूप में ब्राह्मण या अन्य कुछ कहा जा सकता है। यहाँ हम देखेंगे कि हिन्दू शा

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

क्या होता है गुरु, आचार्य, पण्डित और पुजारी का अर्थ?
संस्कृत · शास्त्र

क्या होता है गुरु, आचार्य, पण्डित और पुजारी का अर्थ?

हम सभी ब्राह्मणों को अक्सर पण्डित जी, गुरु जी, आचार्य जी, ब्राह्मण देवता आदि तरह तरह के नामों से संबोधित करते हैं। पर क्या आपने कभी इन नामों के पीछे जो अर्थ है उसको जानने की कोशिश की है? नहीं की होगी क्योंकि नाम में क्या रखा है यही सबकी सोच है। लेकिन मैंने एक छोटा सा प्रयास किया

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

संस्कृत · शास्त्र

आखिर क्या है अघोरी पंथ का गुप्त रहस्य..

महादेव के पंचम मुख अघोर द्वारा उद्भूत मुक्ति का मार्ग तंत्र में अघोर के नाम से विख्यात है। (यद्यपि अज्ञानता और सनातन संस्कृति के खंडन के षड्यंत्रों के कारण अब यह कुख्यात अधिक है)। अघोर मार्ग के अनुयायी अघोरी कहलाते हैं। जो घोर(जगत प्रपंच की मधुर मोहिनी माया और भेद बुद्धि रुपी अवि

9 अगस्त 2017 · 4 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

श्री राम का सत्य सर्वप्रिय धर्म स्वरूप..

यदि वेदव्यास, आद्य शंकराचार्य, स्वामी दयानन्द आदि वेदज्ञ ऋषि ज्ञान की किसी परोक्ष संस्कृति के किनारे हैं, यदि भगवान श्रीकृष्णचन्द्र अथाह प्रेम और गहन आध्यात्म की किसी अपूर्व धवल जाह्नवी के तट पर हैं, तो श्री राम धर्म, कर्म और करुणा की त्रिवेणी के हृदयंगम प्रयाग-संगम पर खेल रहे है

13 जुलाई 2017 · 8 मिनट का पाठ

धर्म · संस्कृति

श्री कृष्ण के जीवन में बसा है संसार का हर रूप.

द्रोणाचार्य सरीखे शास्त्रज्ञ गुरु भी धर्म का तत्व नहीं समझ पाए। भीष्म पितामह जैसे धर्म सम्राट को भी धर्म का तत्व शर शैय्या पर लेटने से पहले समझ न आया। यहाँ तक कि धर्म अधर्म के नाम पर दो फाड़ हुए राजाओं में धर्म पक्ष के अर्जुन भी धर्म के नाम पर युद्ध छोड़ भिखारी बनने को तैयार हैं। य

3 जुलाई 2017 · 8 मिनट का पाठ